स्मार्ट मीटर बना गुस्से का मीटर! बांदा में महिलाओं ने कलेक्ट्रेट घेरकर दी चेतावनी
बांदा में स्मार्ट मीटर के खिलाफ महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। बढ़े हुए बिजली बिल, विभागीय दबाव और पुराने मीटर बहाल करने की मांग को लेकर महिलाओं ने कलेक्ट्रेट घेरकर प्रशासन को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा में स्मार्ट मीटर को लेकर जनता का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बिजली सुधार और पारदर्शिता के नाम पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का कारण बनते नजर आ रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इसे सीधे तौर पर “लूट” करार देते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बेलन गैंग के विरोध के बाद अब किसान यूनियन से जुड़ी महिलाओं ने भी कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करते हुए साफ शब्दों में कहा कि यदि स्मार्ट मीटर के नाम पर बढ़ते बिजली बिलों का खेल बंद नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
गांव-गांव से उठता गुस्सा पहुंचा कलेक्ट्रेट
करीब आधा सैकड़ा महिलाएं नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। उनके हाथों में विरोध के स्वर थे और चेहरे पर बढ़ते बिजली बिलों की चिंता साफ दिखाई दे रही थी। महिलाओं का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां सामान्य बिल आता था, अब उतनी ही खपत पर कई गुना ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है।
“स्मार्ट मीटर नहीं, गरीबों की जेब काटने का सिस्टम”
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर गरीबों की जेब काटी जा रही है। उनका कहना है कि पहले किसी तरह घर का खर्च और बिजली बिल दोनों संभल जाते थे, लेकिन अब स्थिति यह है कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। महिलाओं ने कहा कि जब बिल भरने में देरी होती है, तो बिजली विभाग के कर्मचारी रात में घर तक पहुंच जाते हैं और कूलर-पंखा बंद कराने की धमकी देते हैं। इस व्यवहार ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।
“अफसर एसी में, गरीब अंधेरे में”
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने प्रशासन पर भी तीखा हमला बोला। उनका कहना था कि अफसर एयर कंडीशनर वाले दफ्तरों में बैठकर फैसले लेते हैं, लेकिन गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों की परेशानियों को समझने की कोशिश नहीं करते। एक महिला ने कहा, “हम गरीब लोग हैं, इतना महंगा बिल नहीं भर सकते। स्मार्ट मीटर के नाम पर खुली लूट हो रही है। अगर यह बंद नहीं हुआ तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।” यह बयान वहां मौजूद लोगों की सामूहिक नाराजगी को साफ तौर पर दिखाता है।
पुराने मीटर बहाल करने की मांग
महिलाओं की मुख्य मांग है कि स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर दोबारा लगाए जाएं। उनका कहना है कि पुराने सिस्टम में बिल स्पष्ट और समझने योग्य होता था, जबकि स्मार्ट मीटर के बाद उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन केवल गांवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहर तक फैलाया जाएगा।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
बांदा में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ता विरोध अब प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। लगातार हो रहे प्रदर्शन यह संकेत दे रहे हैं कि जनता अब इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बिजली सुधार की किसी भी योजना की सफलता तभी संभव है, जब उपभोक्ता उसमें भरोसा महसूस करें। यदि लोगों को व्यवस्था ही शोषण जैसी लगे, तो विरोध स्वाभाविक है।
अब फैसला प्रशासन के हाथ में
सवाल अब सिर्फ स्मार्ट मीटर का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का है। क्या प्रशासन लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनेगा या विरोध को केवल सामान्य असंतोष मानकर नजरअंदाज करेगा? बांदा में उठी यह चिंगारी तेजी से बड़ी आग का रूप लेती दिख रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख तय करेगा कि यह मामला शांत होगा या एक बड़े जनआंदोलन में बदल जाएगा।
रिपोर्ट -इक़बाल खान
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