न्यायाधीशों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, कॉलेजियम की स्वायत्तता बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम सिस्टम पर बड़ा बयान दिया है. कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम के फैसले RTI और न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम सिस्टम पर बड़ा बयान दिया है. कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम के फैसले RTI और न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं. कॉलेजियम का फैसला उसकी अपनी समझ पर आधारित होता है और हम कॉलेजियम के फैसलों में दखल नहीं देंगे.
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की चयन की प्रक्रिया को लेकर सर्वोच्च अदालत ने बड़ा बयान दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि चयन की प्रक्रिया (कॉलेजियम के फैसले) सूचना के अधिकार यानी आरटीआई और न्यायिक समीक्षा के बाहर है. कोर्ट ने कहा कि जजों की चयन प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा भी नहीं की जा सकती है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट का यह बयान, उस याचिका की सुनवाई के दौरान आया जिसमें कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता की कमी का सवाल उठाया गया था.
जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा कि कॉलेजियम का फैसला उसकी अपनी समझ और संतुष्टि पर आधारित होता है. इसमें ना ही हाई कोर्ट और ना ही सुप्रीम कोर्ट किसी उम्मीदवार की सिफारिश को लेकर याचिकाएं सुनकर या निर्देश जारी करके उसमें कोई कमी निकाल सकते हैं. बेंच ने कहा कि हम कोई ऐसी स्थिति पैदा नहीं करना चाहते, जिससे नई-नई मुश्किलें खड़ी हों.
हम कॉलेजियम के फैसलों में दखल नहीं देंगे-SC
जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा कि हम कॉलेजियम के फैसलों में दखल नहीं देंगे. बेंच ने यह भी बताया कि कुछ उम्मीदवारों को चुनने और उनके नामों की सिफारिश करने से पहले सैकड़ों उम्मीदवारों को बातचीत के लिए बुलाया जाता है.
कॉलेजियम सिस्टम क्या है?
कॉलेजियम सिस्टम एक प्रकार की व्यवस्था है. इसके जरिए सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न राज्यों के हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति, पदोन्नति यानी प्रमोशन और ट्रांसफर किए जाते हैं. इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें जजों की नियुक्ति खुद जजों के द्वारा ही की जाती है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं. वहीं, हाई कोर्ट कॉलेजियम में संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और उसी कोर्ट के दो सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं.
कैस काम करता है कॉलेजियम?
कॉलेजियम नामों की सिफारिश करता है. इसके बाद नाम सरकार के पास भेजे जाते हैं. सरकार नाम जांच करती है और अगर इसमें कोई आपत्ति हो तो एक बार वापस भी भेज सकती है. लेकिन अगर कॉलेजियम फिर से वही नाम भेजे तो सरकार को मंजूर करना पड़ता है. ऐसा ज्यादातर मामलों में होता है. अंत में राष्ट्रपति नामों पर साइन करते हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति होती है.



