कुत्तों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, आदेश नहीं बदलेंगे; याचिका की खारिज

चंडीगढ़। देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और लोगों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने एक बार फिर साफ कर दिया कि खतरनाक, आक्रामक और रेबीज संक्रमित आवारा कुत्तों को कानून के तहत समाप्त किया जा सकता है। इसी मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को दिए अपने आदेश में कहा था कि ऐसे आवारा कुत्ते जो लोगों की जान और सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं, उन्हें योग्य पशु चिकित्सकों की जांच के बाद संबंधित अधिकारी कानून के तहत खत्म कर सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह कार्रवाई पशु क्रूरता निवारण कानून और अन्य लागू नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया था स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान जारी कर कहा था कि राज्य सरकार खतरनाक और जानलेवा आवारा कुत्तों को हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत भी किया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी कदम है।
हालांकि, इस बयान पर एक पक्षकार ने सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति जताई। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ऐसा दिखा रहे हैं जैसे सुप्रीम कोर्ट ने सभी कुत्तों को मारने की खुली छूट दे दी हो।
सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
इस पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा-
यदि कोई मुख्यमंत्री बयान देता है तो क्या हम अपना आदेश बदल देंगे?
अदालत ने यह भी कहा कि आदेशों के पालन की निगरानी अब हाई कोर्ट करेंगे और यदि किसी को शिकायत है तो वह संबंधित हाई कोर्ट में जाए। सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देते हुए बयान दिया है। इस पर अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस मौखिक उल्लेख पर कोई सुनवाई नहीं करेगी।
बीते वर्ष चर्चा में आया था मुद्दा
गौरतलब है कि आवारा कुत्तों का मुद्दा पिछले वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश दिए थे। बाद में अदालत ने नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रित पुनर्वास पर भी जोर दिया।
अदालत ने अपने हालिया फैसले में कहा कि लोगों को भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलता है। सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों के हमलों का डर लोगों की गरिमा और सुरक्षा दोनों को प्रभावित करता है। अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेशों के पालन की रिपोर्ट अगस्त तक हाई कोर्ट में पेश करने के निर्देश भी दिए हैं।



