जनता अब भाजपा का सच समझने लगी है झांसे में नहीं फंसेगी

सपा के फायरब्रांड नेता व सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी से 4PM के संपादक संजय शर्मा ने बेबाक बातचीत की। उन्होंने आज की मौजूदा राजनीतिक घटनाक्र म से लेकर अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व व वर्तमान गोदी मीडिया पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जनता अब भाजपा का सच जान गई है। अब उसके झांसे में नहीं फंंसेगी। चोरी व अपने पाप छिपाने के लिए योगी जी धार्मिक उन्माद फैलाते है। पेशे से पत्रकार रहे और बाद में मिहिर भोज पोस्ट ग्रेजुएट कालेज में प्रोफेसर भी रह चुके राजकुमार भाटी शुरू से ही संघर्षशील नेता रहे हैं। देहात मोर्चा से उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। किसान आंदोलनों में वह बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं।
करियर की शुरुआत
भाटी ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1987 में गाजियाबाद के एक स्थानीय समाचार पत्र में पत्रकार के रूप में की थी? वह एक जाने-माने लेखक और स्तंभकार भी रहे हैं। पत्रकारिता में सक्रिय रहने के साथ-साथ, उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित मिहिर भोज पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में प्रोफेसर/शिक्षक के रूप में भी अध्यापन कार्य किया है? आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के बावजूद, उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से वर्ष 1990 में राजनीति शास्त्र में परास्नातक और वर्ष 2007 में एलएलबी की डिग्री हासिल की।
राजनीतिक सफर
वह लगातार किसान आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उन्हें समाजवादी पार्टी के तेजतर्रार प्रवक्ताओं में गिना जाता है। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्हें गौतमबुद्धनगर की दादरी विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी भी बनाया था। वह उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के दादरी के रहने वाले एक साधारण किसान परिवार से आते हैं।
अंजना ओम कश्यप के शो हल्ला बोल में जोरदार बहस की
आजतक पर एंकर अंजना ओम कश्यप के शो हल्ला बोल में जब यह मुद्दा उठा, तो राजकुमार भाटी की बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और अन्य मेहमानों से जोरदार बहस हुई। भाटी ने सफाई दी कि उनके भाषण के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से एडिट करके गलत प्रचार किया गया है। भाटी अपनी पार्टी का पक्ष जोरदार तरीकेसे रखते हैं और विपक्ष के दांत खट्टे कर देते हैं।
ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ कथित रूप से विवादित टिप्पणी पर बवाल
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने एक जनसभा में ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ कथित रूप से विवादित टिप्पणी की थी। अपने भाषण में उन्होंने कहा था, न तो ब्राह्मण अच्छा होता है और न ही कोई तवायफ। इस बयान को लेकर टीवी डिबेट्स में उनकी एंकर और बीजेपी प्रवक्ताओं से काफी तीखी बहस हुई थी। विवादित बयान पर उनके खिलाफ गाजियाबाद के कविनगर पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 196(1) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। बयान का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक दलों में भारी आक्रोश फैल गया था। बयान को लेकर पार्टी के भीतर भी घमासान मच गया था। सपा विधायक संतोष पांडे ने इसे अनुशासनहीन और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। वहीं, बीएसपी प्रमुख मायावती और कांग्रेस नेताओं ने भी अखिलेश यादव से भाटी को बर्खास्त करने की मांग की थी। विवाद बढ़ता देख अखिलेश यादव ने राजकुमार भाटी को कड़ी हिदायत दी थी, जिसके बाद भाटी ने बिना शर्त माफी मांग ली थी।
मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समुदाय पर दिए गए विवादित बयान के मामले पर ४क्करू यूट्यूब चैनल के एडिटर संजय शर्मा के साथ बात में इंटरव्यू में राजकुमार भाटी ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया? उन्होंने अपने बचाव में कहा कि उनके भाषण के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से एडिट करके उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार किया गया है? उनका इरादा किसी भी जाति, विशेषकर ब्राह्मण समाज का अपमान करना नहीं था, बल्कि वे केवल सामाजिक न्याय और भेदभाव खत्म करने की बात कर रहे थे? राजकुमार भाटी ने कहा कि अपनी टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी भी मांगी थी, और दावा किया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था।

- सुबह-सुबह उठते आप गोदी मीडिया केपत्रकार को फेसबुक पर धो रहे थे। क्या मामला था आप पत्रकारों से खफा क्यों रहते हैं?
- न्यूज 24 के अखिलेश आनंद का पहला शो था उन्होंने भाजपा, कांगे्रेस केबाद तीसरे व चौथे प्रवक्ता को मौका दिया। मुझे नहीं, तो मैंने कहा मैं चला जाता हूं। बाद में मुझे मौका दिया तो अखिलेश यादव पर कुछ गलत टिप्पणी करने लगे मैंने उन्हें टोका। और आजकल अंजना जैसे और कुछ एंकर बहुत खोखले हैं। हर बार एक बात कहते हैं आप पीएम पर सवाल उठाकर लोकतंत्र का अपमान करते जबकि वे ज्यादा अपमान करतेहैं। उन्हें ये नहीं पता कि आलोचना करने से विदेशों में लोकतंत्र का सम्मान बढ़ता है। आज के मीडिया में सबसे बड़ी बीमारी एंकर है। ऐसे ही एकबार मैंने कहा मंदिर से ज्यादा अस्पताल जरू री है पर एंकर मुझ पर चिल्ला पड़ा कि मंदिर जाएंगे तो अस्पताल जाने की जरू रत नहीं पड़ेगी। दूसरे दिन अयोध्या केएक महंत अस्पताल में भर्ती थे। आपरेशन सिंदूर में इन एंकरों ने पाकिस्तान पर कब्जा करवा दिया। जब मैंने इसपर कहा आप गलत कर रहे तो एक एंकर बोला कि हम सेना का जोश बढ़ा रहे हैं।
- हाल ही में एक टीवी डिबेट शो के दौरान, जब एक बीजेपी प्रवक्ता ने आपके एक पुराने विवादास्पद बयान का जिक्र किया, तो आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने आपको बीच में टोकते हुए कहा कि वह बयान बहुत शर्मनाक था, लेकिन उसे दोबारा डिबेट में न दोहराया जाए? ये क्या मामला था?
- अक्सर लाइव शो में टीवी एंकर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को बोलने का अधिक समय देते हैं और विपक्ष के नेताओं के सवालों और कुतर्कों से दबाया जाता है? एकबार तो एक बहस में सभी को मौका दिया गया मेरा नंबर 25 मिनट बाद आया। मैं तो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता हूँ । जिस पर अक्सर एंकर और मेरे बीच तीखी बहस होती है? एंकर सरकार का गुणगान करते है। जबकि मीडिया का काम है उन चीजों को दिखाए जो सरकार छिपाना चाहती है। भाजपा से ज्यादा तो लोगों का नुकसान ये एंकर कर रहे है जो सच नहीं दिखा रहे हैं।
- क्या मामला था, सुना है आपको आजतक वालों ने बैन कर दिया है?
- बहस में एक गोल टोपी वाले धार्मिक व्यक्ति आते है उनके बयानों पर मैंने आपत्ति की थी। इस पर आजतक की एंकर ने कहा वह पैनल में आए किसी भी व्यक्ति पर टिप्पणी नहीं क रेंगे इसी पर मैंने डिबेट छोड़ दिया था। मैंने बस इतना कहा था कुछ लोग गैर हिंदू होकर हनुमान भक्त होने का दावा करते हैं। तो वह अपना धर्म छोड़कर हिंदू बन जाएं। क्योंकि उनके यहां एक ही भगवान मानते हैं। इस तरह के बहस में आकर धार्मिक उन्माद न फैलाएं। इस पर एंकर उनपर ही पर सवाल उठाते हुए यह मांग करतें हैं कि यदि वह सच्चे हिंदू हैं, तो उन्हें मौलानाओं को भी वही चुनौती देनी चाहिए या मुस्लिम धर्म छोडऩे जैसी बातें कहनी चाहिए। इन्ही सबको लेकर मुझसे बहस हुई थी।
- आजकल के एंकर व एंकरियों केबारे में आपकी क्या राय है?
- आजकल के एंकरों में कोई ज्ञान नहीं है। वो बस मेकअप करकेआते हैं जो लिखके दिया जाता है वो ही बोल देते हैं। कोई रिसर्च नहीं करते हैं । हालांकि आज भी 15-16 पत्रकार ऐसे हंै जो निष्पक्ष है रिसर्च करके डिबेट करते हैं। मैं प्रिंट का पत्रकार रहा हूं कई खबरें लिखता रहा हूं। साथ में मैंने एमए पत्रकारिता के छात्रों को पढ़ाया इसके लिए मैं खुद 4-5 घंटे पढ़ता था। पर आज ऐसा नहीं हो रहा है।
- राम मंदिर चोरी मामले में आपकी क्या राय हैं?
- अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावे और चंदे के कथित गबन/चोरी के मामले को लेकर मैंने भाजपा और संघ पर तीखे हमले किए हैं। राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिया गया चढ़ावा और चंदा चोरी/गबन हुआ है। इसे चोरी नहीं बल्कि डकैती कहें। जब भी दान चोरी जैसे मामले सामने आते हैं, पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ करती है, लेकिन इस मामले में लीपापोती की जा रही है।
- सीएम योगी तो इमानदार हैं तो उनपर चंदा चोरी में शामिल होने का आरोप कैसे लगा सकते हैं?
- सीएम योगी आदित्यनाथ अपने संन्यासी होने और गोरखनाथ मंदिर की परंपरा का हवाला देते हैं, लेकिन राजनीतिक सत्ता में आने के बाद उन आदर्शों का पूरी तरह पालन नहीं करते। जो व्यक्ति संन्यासी का चोला पहनकर, मठ को छोड़कर राजनीति में आ जाए और सत्ता के लिए साधुता त्याग दे, उस पर किस हद तक विश्वास किया जा सकता है। राजनेता का काम जनता की भलाई है, जिसे वर्तमान सरकार पूरा करने में विफल रही है। वह कुछ लोगों की बात सुनते हैं। जबकि राममंदिर मामले में अब तक चंदा चोरों के यहां बुलडोजर चल जाना चाहिए था। पर ऐसा लगता है पैसा ऊपर तक गया है। इसकी लपट तो सीएम पर आएगी।
- आप आरोप लगा रहे हैं भ्रष्टाचार का तो इतना पैसा कहां जा रहा है?
- इस सरकार में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है। हर काम में 50 प्रतिशत कमिशन चल रहा है। जो एक्सप्रेस-वे सपा के समय में इतने साल पहले बना था वह अब तक बढिय़ा चल रहा है। भाजपा के 9 साल में बने देश के हर बड़ा एक्सप्रेस-वे टूट गया। ये सिर्फ कमिशन की वजह से हुआ है। जो सड़केबन रही उनकी कीमत हमारी बनाई सड़कों की कीमत से दुगुना हैं। अगर गोरखपुर मठ की जांच की जाए तो नौ साल में उसकी प्रॉप्रटी कई गुना बढ़ी है। सीएम योगी की कार्यशैली में पक्षपात है। सरकार में जनता वास्तविक रूप से परेशान है। भ्रष्टाचार तो इस सरकार में कई गुना हो गया है।
- सीए योगी ने कहा है कि सपा हनुमान गढ़ी की सीढिय़ों पर नमाज पढ़वाएगी ऐसे आपकी पार्टी भाजपा के नमाज व रोजा इफ्तार के नैरेटिव को कैसे तोड़ेगी?
- सीएम योगी झूठ बोलते हैं । सपा ने कभी वहां पर नमाज नहीं पढ़वाया। ये केवल धार्मिक उन्माद फै लाते हैं। मुझे लगता है मंदिर में योगी जी की सहमति से डकै ती हुई है। ऐसा न होता तो जिस अविनाश शुक्ला के घर से 80 लाख बरामद हुए थे उसी दिन उसके खिलाफ एफआईआर होना चाहिए था। योगी जाति व धर्म देखकर फै सले करते हैं। सीएम कई बार यहां तक सदन में भी कह चुके हैं कि सपा सरकार अधिकतर थानों में केवल यादव थानाध्यक्ष बनाए गए थे जबकि वह इसका आंकड़ा नहीं दे पातें। अब लोग सबकुछ जान गए है बीजेपी केचक्कर में नहीं फसेंगे। भाजपा द्वारा आगामी चुनावों से पहले जनता को भड़काने और हिंदू-मुसलमान की राजनीति करने की रणनीति बनाती है। ऐसे बयानों के जरिए बेरोजगारी, महंगाई और घोटालों जैसे असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है।
- भाजपा कहती है सपा मुस्लिमों की पार्टी है। वो अखिलेश को मौलाना और नेता जी को मुल्ला कहती है। इसकी काट सपा कै से निकालेगी?
- अखिलेश यादव और उनकी पार्टी सभी वर्गों की सच्ची हितैषी हैं। उनकी पार्टी बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों के विकास के लिए काम करती है। भाजपा पर संविधान को कमजोर करने का काम करती है अखिलेश मुसलमानों, दलितों व पिछड़ों के अधिकारों का रक्षक हैं। सैफई में पूरा परिवार हर त्योहार में पूरे सांस्कृतिक विधान से त्योहार मनाता है। नेताजी (मुलायम सिंह यादव) नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा करते थे, मंदिरों में जाते थे, और मंगलवार का व्रत भी रखते थे। पूरा सैफई परिवार पूरी निष्ठा से पूजा-पाठ और व्रत करता है।
- भाटी जी आप ब्राहम्णों को बहुत कुछ कह देते हैं , वो बेचारे किसी तरह पूजा-पाठ करकेअपना जीवन यापन कर रहे उन्हें क्यों आप परेशान कर रहे हैं?
- आस्था और पूजा व्यक्तिगत हो सकती है, लेकिन धर्म-कर्म को अंधविश्वास या पाखंड से जोडऩा ठीक नहीं। मंदिर में भगवान को हाथ जोड़ों पर उसके नाम मुर्खता सही नहीं है। किसी को भी अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने या मानने का पूरा हक है, लेकिन धर्म के नाम पर पाखंड, अंधविश्वास, और समाज में ऊंच-नीच फैलाने की मानसिकता को वे मूर्खता या तर्कहीन हैं। उनका उद्देश्य किसी जाति या धर्म का अपमान करना नहीं है, बल्कि वे केवल रूढि़वादिता और पाखंड के खिलाफ हैं। कोई इन बातों को अपने से जोड़ ले तो मैं इसमें क्या कर सकता हूं।
- अखिलेश को भाजपा वाले गलत तरीकेसे पेश करते हैं इसपर आपकी क्या राय हैं?
- भाजपा गलत चीजें फैलातीं हैं। हाल में मेरठ में पुलिस कप्तान ने एक दलित व्यक्ति को थप्पड़ मारा। हमारे नेता अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाया। उनके परिवार से मिले। पीडि़त परिवाारों को मुआवजा तक प्रदान किया। जबकि बहन जी पुलिस केसमर्थन में दिखाई दीं। इस सरकार में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली ठीक नहीं है। दलित और वंचित समाज के उत्पीडऩ और जातीय अहंकार दिखता है। पुलिस कानून के तहत कार्रवाई करने के बजाय खुलेआम मारपीट और गाली-गलौज पर उतर आई, जो किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में निंदनीय है।
- मुलायम सिंह पर अयोध्या में गोली चलवाले का आरोप लगाते हैं पर उनके समय में प्रमुख सचिव नृपेन्द्र मिश्रा थे। उन्हीं को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई उनकेबनवाए गए मंदिर की छत टपक गई। आप उनकी गिरफ्तारी की मांग क्यों नहीं करते है?
- जब अयोध्या में वह घटना घटी तब राज्य के सीएम नेता जी थे। नेता जी (मुलायम सिंह यादव) ने जो भी निर्णय लिया या जो भी कार्य किया, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया। क्योंकि ढांचे की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य की सरकार की थी। नृपेन्द्र मिश्रा तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया उन्होंने कानून व्यवस्था के लिए गोली चलवाई।



