एआई इम्पैक्ट समिट पर नहीं थमी रार

- बीजेपी का आरोप- बदनाम करने के लिए दी 40 हजार की सुपारी, कांग्रेस ने रची साजिश
- कांग्रेस व भाजपा में जारी है वार- पलटवार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट पर अब भी बवाल व रार जारी है। यह आयोजन अब केवल तकनीक और नवाचार का केंद्र नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक युद्ध का अखाड़ा बन गई है। यूथ कांग्रेस के सदस्यों द्वारा किए गए शर्टलेस प्रोटेस्ट के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस अंतरराष्ट्रीय इवेंट की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर एक नेगेटिव पीआर कैंपेन चलाया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया। पार्टी के मुताबिक, कांग्रेस पीआर टीम के सदस्यों ने इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क किया और समिट को फेल दिखाने वाले कंटेंट के बदले 10,000 रुपये से 40,000 रुपये तक के पेमेंट का प्रस्ताव दिया। हांलाकि कांग्रेस ने इन सब घटनाओं पर कोई प्रतिक्रि या नहीं दी। कई इन्फ्लुएंसर्स के पब्लिकली यह दावा करने के बाद विवाद और बढ़ गया कि उन्हें ऐसे ऑफर मिले थे। ऑनलाइन शेयर किए गए वीडियो में, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े लोगों ने उनसे इवेंट की बुराई करने वाला स्क्रिप्टेड कंटेंट बनाने के लिए कहा था।उनमें से कुछ ने कहा कि उनके पास कथित फाइनेंशियल डील के सबूत के तौर पर चैट मैसेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं।
नेहरू के कार्यालय में सक्रिय थे विदेशी जासूस : पात्रा
नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी सांसद संबित पात्रा ने नेहरू काल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उस समय भारत का सचिवालय विदेशी खुफिया एजेंसियों का अड्डा बन गया था। पात्रा ने आरोप लगाया कि नेहरू के विशेष सहायक एम.ओ. मथाई एक अमेरिकी एजेंट के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने दावा किया कि 1960 के दशक में रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी के एजेंट भी नेहरू के कार्यालय में सक्रिय थे। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, उस समय यह कहा जाता था कि विदेशी शक्तियों को जो भी गुप्त दस्तावेज चाहिए होते थे, वे नेहरू के कार्यालय से आसानी से उपलब्ध हो जाते थे।



