अंजना को फिलहाल राहत नहीं, संजय शर्मा का वीडियो हटवाने के लिए पहुंची थीं हाईकोर्ट

- 4PM के संपादक पर लिखवाया है मानहानि का मुकदमा
- सोशल मीडिया पर अंजना ओम कश्यप लगातार ट्रोलर्स के निशाने पर
- खान सर कंट्रोवर्सी के बाद से अंजना की बड़ रही मुसीबतें
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने आज एंकर अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क द्वारा दायर मानहानि मामले में खान सर समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। हालांकि अदालत ने फिलहाल किसी भी सामग्री को हटाने या रोक लगाने संबंधी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 17 जून के लिए तय कर दी।
गौरतलब है कि जब व्यक्ति की परछाई उसके शरीर से लंबी हो जाए तो उसका अंत निकट समझना चाहिए। आज कुछ ऐसा ही हाल भारतीय मेन स्ट्रीम मीडिया और उसके महारथियों का हो गया है। अंजना ओम कश्यप ने 4PM के संपादक संजय शर्मा समेत कई लोगों पर मानहानि का मुकदमा दर्ज करा कर अपनी और जग हंसाई कराने का रास्ता साफ कर लिया है। पूरे सोशल मीडिया पर उन्हें इस कृत्य के लिए कोसा जा रहा है। खान सर कंट्रोवर्सी के बाद से अंजना ओम कश्यप की मुसीबतें बड़ रही है। जगह-जगह उन्हें लाइव रिपोर्टिंग के दौरान रोका जा रहा है। उनके खिलाफ नारे लगाये जा रहे हैं सोशल मीडिया पर वह लगातार ट्रोलर्स के निशाने पर है। आज सुनवाई में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब अंजना के वकील ने उन वीडियो को हटाने की कोर्ट से गुजारिश की जिसमें उनके बारे में सच बोला जा रहा है तो कोर्ट ने वकील के निवेदन को निरस्त कर अगली सुनवाइ आज से 10 दिन बाद के लिए निर्धारित कर दी। भारतीय मीडिया के इतिहास में कई ऐसे दौर आए हैं जब पत्रकार सत्ता से सवाल पूछते हुए विवादों में घिरे। लेकिन आज का दौर कुछ अलग है। आज सवाल यह नहीं है कि मीडिया क्या पूछ रहा है बल्कि यह है कि जनता मीडिया से क्या पूछ रही है। टीवी स्टूडियो की चमक प्राइम टाइम की ऊंची आवाजें और स्क्रीन पर दौड़ती ब्रेकिंग न्यूज के बीच एक बड़ा वर्ग यह पूछ रहा है कि आखिर मीडिया जनता की आवाज है या सत्ता और कॉरपोरेट हितों का विस्तार?
संजय शर्मा पत्रकारिता के क्षेत्र में विश्वास का दूसरा नाम
भारतीय मीडिया के इस शोरगुल भरे दौर में जहां खबरों से ज्यादा चेहरों की चर्चा होती है और तथ्यों से ज्यादा नैरेटिव की लड़ाई दिखाई देती है वहां कुछ पत्रकार ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। संजय शर्मा उन्हीं नामों में शामिल हैं। पाठक उन्हें सिर्फ एक संपादक नहीं बल्कि सवाल पूछने वाली पत्रकारिता की आवाज मानते हैं। पत्रकारिता का मूल धर्म सत्ता से सवाल करना है। यह सवाल किसी एक दल एक सरकार या एक विचारधारा से नहीं बल्कि हर उस ताकत से होना चाहिए जो जनता के अधिकारों को प्रभावित करती हो। संजय शर्मा की पत्रकारिता को पसंद करने वाले लोग मानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह प्रचलित धारणाओं के विपरीत जाकर भी सवाल उठाने का साहस दिखाते हैं।
संजय शर्मा ने जनता के मुद्दों से निकटता के आधार पर बनाई साख
आज जब मीडिया का बड़ा हिस्सा अक्सर पक्षधरता के आरोपों से घिर जाता है, तब संजय शर्मा के समर्थक दावा करते हैं कि उन्होंने अपनी पहचान सत्ता प्रतिष्ठानों से दूरी और जनता के मुद्दों से निकटता के आधार पर बनाई है। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बहस और आम नागरिक से जुड़े मुद्दे उनके मंच पर लगातार जगह पाते रहे हैं। यही कारण है कि उनके दर्शकों का एक बड़ा वर्ग उन्हें अपनी आवाज मानता है। दर्शकों की इसी आवाज पर बड़बोली टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप ने मानहानि का मुकदमा करावा इससे एक बात और सिद्ध होती है कि अंजना और सरकार दोनों एक ही रास्ते के मुसाफिर सिद्ध हो गये। क्योंकि सरकार ने भी संजय शर्मा उनके संस्थान को बंद करने के लिए तमाम एढ़ी चोटी का जोर लगाया लेकिन कर कुछ नहीं सके क्योंकि संजय शर्मा के साथ दर्शकों का विश्वास और दुआएं दोनों हैं।
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ
टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप द्वारा एक ऐसे पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है जिसकी पहचान जनता की अवाज के तौर पर होती है को भारी आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है। यही नहीं अंजना की इस बचकाना हरकत का असर टीवी टुडे ग्रुप पर भी पड़ रहा है और वह भी एक पार्टी बनता दिखाई दे रहा है। पाठकों की राय के मुताबिक खबरों के मामले में ग्रुप पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो चुका और अंजना की इस हरकत ने उसे शर्मसार कर दिया है। वरिष्ठ पत्रकार आशीष के मुताबिक चैनल को इस तरह की एंकर से दूरी बना कर रखना चाहिए। अंजना बार—बार आजतक जैसे चैनल का ब्रांड खराब कर रही है। वहीं पत्रकार पी त्यागी का कहना है कि ऐसा पहले कभी नहीं होता था जैसा आज हो रहा है। एक टीवी एंकर की हिम्मत कैसे हो गयी एक वरिष्ठ जमीन से जुड़े पत्रकार पर मुकदमा दर्ज कराने की।




