ईरान पर दबाव नहीं बना पाए ट्रंप, अब सेना भेजने का फैसला
इराक ने दो टूक कह दिया है कि अगर अमेरिका की जमीन पर 'बूट' पड़े, तो अंजाम 'कब्रिस्तान' होगा। जहाँ एक तरफ मुस्लिम मुल्क एकजुट हो रहे हैं,

4pm न्यूज नेटवर्क: जिस ‘महाजंग’ का डर था, उसका आगाज़ हो चुका है। खबर आ रही है कि इराक ने आधिकारिक तौर पर ईरान का साथ देने और इस जंग में कूदने का ऐलान कर दिया है।
इराक ने दो टूक कह दिया है कि अगर अमेरिका की जमीन पर ‘बूट’ पड़े, तो अंजाम ‘कब्रिस्तान’ होगा। जहाँ एक तरफ मुस्लिम मुल्क एकजुट हो रहे हैं, वहीं यूएई और सऊदी अरब ने अपनी अरब पहचान को ताक पर रखकर ट्रंप और नेतन्याहू के साथ हाथ मिला लिया है। उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के मिडिल ईस्ट में एक्टिव होने से रूस के सब्र का पैमाना छलक गया है।
ईरान-अमेरिका जंग को शुरू हुए आज मुकम्मल 30 दिन हो चुके हैं। कल तक जो ट्रंप कह रहे थे कि ईरान को चुटकियों में मसल देंगे, अब उन्हें लगने लगा है कि उन्होंने ‘गलत बयाना’ ले लिया है। क्योंकि 30 दिन में वे ईरान को हिला नहीं सके हैं, बल्कि अब हताश और निराश होकर अपनी सेना को ईरान की सरज़मीन पर उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
ट्रंप ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस जंग को महज चार हफ्ते में खत्म करने का दावा किया था, लेकिन ये समय सीमा पूरी हो चुकी है और ट्रंप ईरान का बाल भी बांका नहीं कर पाए हैं। आखिरकार थक-हारकर ट्रंप ने अपनी सेना ईरान में उतारने का फैसला लिया है। खासकर ट्रंप की मंशा है कि किसी तरह खार्ग द्वीप और होर्मुज पर कब्जा किया जाए, लेकिन इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को ज़ोर का झटका लगा है। क्योंकि जंग में इराक ने सीधे तौर पर शामिल होने का ऐलान कर दिया है।
ऐसे में जंग का रुख अचानक मुड़ गया है। अमेरिका ने खार्ग और होर्मुज को जीतने के लिए अपने 3500 सैनिकों की टुकड़ी भेजी है। दावा किया जा रहा है कि ये सैनिक ईरान की जमीन पर उतरकर उसे कब्जे में लेने का प्रयास करेंगे, लेकिन इसके उलट जहाँ एक ओर ईरान ने अपने 10 लाख सैनिकों को उतारने का ऐलान किया है, तो वहीं दूसरी ओर ईरान की धरती पर कदम रखने वाले अमेरिकी सैनिकों के विरोध में इराक भी ईरान के साथ चट्टान की तरह खड़ा हो गया है।
यमन, ओमान, लेबनान, सीरिया और बहरीन के बहुत से हिस्सों में ईरान के समर्थक पहले से ही मौजूद हैं। जंग में खुले तौर पर हिजबुल्ला और हूती आ चुके हैं, जबकि सीरिया और बहरीन में ईरानी समर्थक तेहरान की पूरी मदद कर रहे हैं।
लेकिन इराक ने इस जंग का पासा ही पलट दिया है। इराक की सरकार और वहाँ के ‘पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस’ ने ऐलान किया है कि वे अब ईरान के ‘साइलेंट पार्टनर’ नहीं, बल्कि ‘एक्टिव वारियर’ हैं। इराक ने साफ कर दिया है कि उनके देश की संप्रभुता पर अमेरिकी और इज़रायली हमले अब बर्दाश्त नहीं होंगे। इराक की तरफ से ये पैगाम आया है कि— “अगर अमेरिका अपनी सेना ज़मीन पर उतारता है, तो इराक की धरती अमेरिकी सैनिकों के लिए ‘नरक’ साबित होगी।”
ट्रंप साहब, आप 3500 कमांडोज़ को ‘यूएसएस त्रिपोली’ पर लादकर खार्ग द्वीप की तरफ भेज तो रहे हैं, लेकिन क्या आपको अंदाज़ा है कि ईरान और इराक की ये ‘जुगलबंदी’ आपके सैनिकों का क्या हश्र करेगी? क्या आप वियतनाम और अफ़गानिस्तान के जख्म भूल गए? ये ज़मीनी जंग आपको इतनी महंगी पड़ेगी कि आप व्हाइट हाउस में बैठने लायक भी नहीं बचेंगे।
हालांकि, जहाँ एक ओर मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ इराक, लेबनान और हूती खुलकर सामने आए हैं, तो वहीं दूसरी ओर इस पूरी कहानी का सबसे शर्मनाक पहलू यूएई और सऊदी अरब का रुख है। खबर है कि यूएई ने अपने एयरबेस अमेरिकी फाइटर जेट्स के लिए खोल दिए हैं और सऊदी अरब भी अब धीरे-धीरे ट्रंप के पाले में खड़ा नज़र आ रहा है।
ये वही मुल्क हैं जो कभी ‘इस्लामी एकता’ की कसमें खाते थे, आज इज़राइल के बमों को रास्ता दे रहे हैं। यूएई ने तो यहाँ तक कह दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की मदद करेगा। वहीं दूसरी ओर, सऊदी अरब भी अपने एयरबेसों से अमेरिका को उड़ान भरने की इजाजत दे सकता है।
अभी कल ही सऊदी के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की भरे मंच से ट्रंप ने पूरी दुनिया के सामने फजीहत कराई थी। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया था कि— “वह मेरी चापलूसी करते हैं” और इसके लिए उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और गंदे शब्दों का प्रयोग किया। सोशल मीडिया और ‘एक्स’ पर इसके बहुत से मीम (Memes) वायरल हैं।
वैसे भी ट्रंप का किरदार अब तक एक ‘सनकी राजा’ जैसा ही रहा है। वे कभी किसी के साथ सम्मान से पेश नहीं आए, लेकिन ये बात यूएई और सऊदी अरब को समझ नहीं आ रही। इससे मिडिल ईस्ट में ‘दो फाड़’ हो गया है। खाड़ी के कुछ देश इस पक्ष में हैं कि जंग नहीं होनी चाहिए, लेकिन ईरान, इराक, लेबनान, यमन, सीरिया और बहरीन के लोग जंग के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इस आग में घी डालने का काम यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने शुरू कर दिया है। वे मिडिल ईस्ट के बहाने रूस से अपना बदला लेना चाहते हैं। जेलेंस्की का मिडिल ईस्ट में चक्कर लगाना इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब इस जंग को ‘ग्लोबल’ बनाना चाहता है। जेलेंस्की की इस सक्रियता ने रूस को भड़का दिया है। अगर पुतिन ने इस जंग में अपनी मिसाइलें खोल दीं, तो न्यूयॉर्क से लेकर तेल अवीव तक कोई सुरक्षित नहीं बचेगा।
इधर, अमेरिका अपनी नाकामी छुपाने के लिए चीन और रूस पर आरोप लगा रहा है। पेंटागन का दावा है कि चीन ईरान को हाई-टेक चिप्स, लोकेशन डेटा और मिसाइल फ्यूल सप्लाई कर रहा है। हाल ही में अमेरिका के एक बड़े अधिकारी का बयान आया था कि ईरान जो मिसाइलें बना रहा है, उनमें चीन की चिप लग रही है, जिससे उनकी सटीकता 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है। यही वजह है कि जंग के दूसरे पखवाड़े में ईरान ने जिस तरह से अमेरिकी एयरबेस और सेना को निशाना बनाया है, वह वाकई घातक है। साथ ही मिसाइलों के लिए ज़रूरी खास ‘फ्यूल’ भी चीन द्वारा सप्लाई करने का आरोप है। लेकिन सवाल यह है कि ट्रंप साहब— जब आप इज़राइल को मुफ़्त में बम और गोला-बारूद दे सकते हैं, तो ईरान की मदद पर आपको मिर्ची क्यों लग रही है?
दूसरी तरफ, अमेरिका और ट्रंप रूस-चीन की एंट्री से सहमे हुए हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिकी सैनिकों के स्वागत के लिए ईरानी फोर्स पूरी तरह तैयार है। ईरानी समाचार एजेंसी ‘ईरना’ के अनुसार, गालिबाफ ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे एक तरफ बातचीत का नाटक कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर ज़मीनी हमले की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा— “दुश्मन खुलकर बातचीत का संदेश दे रहा है और छुपकर हमले की तैयारी कर रहा है। हमारे सैनिक अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतज़ार कर रहे हैं।”
साथ ही ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अपनी मांगों की सूची में एक नई शर्त जोड़ दी है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता (पूर्ण नियंत्रण) को मान्यता देने की मांग की है। यह स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और LNG इसी रास्ते से गुज़रता है। अब ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ईरानी हमलों के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जिससे पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई पर भारी असर पड़ा है।
साफ़ है कि ट्रंप और नेतन्याहू— आप दोनों अपनी सियासी कुर्सियाँ बचाने के लिए मासूमों का खून बहा रहे हैं। आपने एक तरफ सीज़फायर का नाटक किया और दूसरी तरफ ईरान के वॉटर प्लांट और न्यूक्लियर साइट्स पर हमले करवाए। आपकी ये ‘दोहरी चाल’ अब दुनिया के सामने उजागर हो चुकी है। अमेरिका के 80 लाख लोग सड़कों पर आपको आईना दिखा रहे हैं, लेकिन आपकी आँखों पर तो सत्ता और तेल की हवस का चश्मा चढ़ा है।



