बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन बन सकते हैं बिहार के नए सीएम, अचानक इस्तीफे से मचा सियासी भूचाल, बैरन दिल्ली लौटे

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, जो कि बिहार के विधायक हैं, वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, लेकिन अभी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है।

4pm न्यूज नेटवर्क: बिहार की सियासत में वो भूचाल आया है जिसकी गूँज दिल्ली के गलियारों तक सुनाई दे रही है। खबर थी कि नीतीश कुमार इस्तीफा दे देंगे, खबर थी कि बीजेपी के ‘पोस्टर बॉय’ और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन बिहार के नए निज़ाम होंगे। लेकिन ऐन वक्त पर बाजी पलट गई है।

इस्तीफा देने पहुँचे नितिन नबीन बिना इस्तीफा दिए ही वापस दिल्ली लौट गए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। चर्चा गर्म है कि क्या नीतीश बाबू ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए, या फिर अपने बेटे निशांत कुमार को सत्ता की सीढ़ी चढ़ाने के लिए बीजेपी के सामने कोई बड़ी शर्त रख दी है?

कल तक बिहार की गलियों में एक ही चर्चा थी कि बीजेपी ने अपना दांव खेल दिया है और नए सीएम के नाम पर मुहर लग चुकी है। यहाँ तक कि शपथ ग्रहण की तारीखें भी हवा में तैर रही थीं। लेकिन तभी खबर आती है कि नीतीश कुमार के मन में एक बार फिर कुर्सी का मोह जाग गया है। इससे पूरी बीजेपी में खलबली मच गई है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, जो कि बिहार के विधायक हैं, वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, लेकिन अभी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। 27 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने बयान दिया था कि 29 मार्च को बीजेपी अध्यक्ष का इस्तीफा होगा क्योंकि वे राज्यसभा जा रहे हैं। लेकिन आज 29 मार्च को तस्वीर पूरी तरह धुंधली हो गई है।

नितिन नबीन के इस्तीफे के लिए आज सुबह 8 बजकर 40 मिनट का मुहूर्त तय किया गया था, लेकिन अचानक वे इस्तीफा दिए बगैर ही दिल्ली लौट गए। बिहार विधानसभा सचिवालय से इस तय समय का संदेश भी जारी किया गया था, मगर आखिरी वक्त पर इस्तीफा टल गया।

कहा गया कि ‘अपरिहार्य कारणों’ से नितिन नबीन आज इस्तीफा नहीं देंगे। ऐसे में जहाँ उनके इस्तीफे पर सस्पेंस बना हुआ है, वहीं एनडीए (NDA) की एकजुटता पर भी सवाल उठने लगे हैं। रविवार को विधानसभा में इस्तीफे की प्रक्रिया के लिए विशेष तैयारी की गई थी; छुट्टी होने के बावजूद विधानसभा को खोला गया था।

अध्यक्ष प्रेम कुमार भी दिल्ली से पटना लौटकर सुबह से मौजूद थे। नियमावली के अनुसार, यदि कोई विधायक राज्यसभा के लिए निर्वाचित होता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर इस्तीफा देना अनिवार्य होता है और इसके लिए सदस्य को खुद सचिवालय में उपस्थित होना पड़ता है।

गौरतलब है कि 16 मार्च को नीतीश कुमार, नितिन नबीन, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। ऐसे में 30 मार्च को इस्तीफा देने की अंतिम तिथि मानी जा रही है।

नितिन नबीन के इस फैसले के बाद अब सबकी नज़रें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर टिक गई हैं। चूंकि दोनों का निर्वाचन एक साथ हुआ है, इसलिए नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर भी उत्सुकता बढ़ गई है। चर्चा यह भी है कि अब तक राज्यसभा निर्वाचन का आधिकारिक गजट जारी नहीं हुआ है और गजट जारी होने के बाद ही इस्तीफे का नया समय तय किया जा सकता है।

अंदरखाने की खबर है कि असली हड़कंप ‘निशांत कुमार’ के नाम को लेकर मचा है। जदयू के ज़्यादातर कार्यकर्ता कभी नहीं चाहते कि उनके हाथ से सीएम की कुर्सी खिसक जाए। जेडीयू के कई कद्दावर नेताओं और समर्थकों ने खुलेआम मांग कर दी है कि अगर नीतीश कुमार कुर्सी छोड़ रहे हैं, तो उनकी विरासत किसी बीजेपी नेता को नहीं, बल्कि उनके बेटे निशांत को मिलनी चाहिए।

निशांत कुमार ने हाल ही में जेडीयू की सदस्यता ली है और जिस तरह पटना में उनका ‘बुलडोजर’ से स्वागत हुआ, उसने बीजेपी के माथे पर बल ला दिए हैं। बीजेपी को डर है कि कहीं नीतीश कुमार ‘महाराष्ट्र मॉडल’ न खेल दें, जहाँ कुर्सी भी रहे और रुतबा भी।

हालांकि, जो खबर आई है वो चौंकाने वाली है क्योंकि नीतीश कुमार ‘ऑपरेशन तीर’ में जुट गए हैं। नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच सिर्फ चार सीटों का अंतर है और नीतीश अपने कुनबे को बढ़ाने में लग गए हैं। ‘प्रभात खबर’ के हवाले से खबर सामने आई है कि कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने में जदयू जुट गई है।

खबर में भले ही ‘एनडीए’ बताया जा रहा है, लेकिन अंदरखाने की खबर है कि सुरेंद्र कुशवाहा जदयू में जाने की कवायद में जुटे हैं। इसीलिए उन्होंने अशोक चौधरी से मुलाकात की है, क्योंकि नीतीश कुमार के बाद अगर जदयू में कोई ‘नंबर दो’ है, तो वे अशोक चौधरी ही हैं। वे नीतीश के बेहद करीबी माने जाते हैं।

ऐसे में चर्चा है कि बिहार की पॉलिटिक्स में ‘डबल गेम’ हो जाए तो कोई अचरज नहीं होगा। माना जा रहा है कि सुरेंद्र कुशवाहा जल्द ही औपचारिक रूप से पाला बदल सकते हैं, जिससे विपक्ष को बड़ा झटका लगेगा। अशोक चौधरी के सरकारी आवास पर उनका पहुँचना कई सवाल खड़े कर रहा है।

मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और पिछले दरवाज़े से निकल गए। लेकिन राज्यसभा चुनाव में एनडीए की ‘क्लीन स्वीप’ जीत के बाद इस मुलाकात के मायने साफ़ हैं। सुरेंद्र कुशवाहा काफी समय से कांग्रेस की लाइन से अलग चल रहे हैं।

राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने और कांग्रेस के दो अन्य विधायकों ने राजद उम्मीदवार को वोट न देकर सबको चौंका दिया था। उन्होंने खुलकर कहा था कि उन्हें राजद का ‘भूमिहार’ उम्मीदवार पसंद नहीं था। अब जदयू कुछ और विधायकों को जोड़कर बड़ा गेम कर सकती है।

ऐसे में बीजेपी भी ‘सांप-सीढ़ी’ का खेल खेल सकती है। यही वजह है कि अचानक बीजेपी ने यू-टर्न लिया है। यह भी संभव है कि नितिन नबीन की ताजपोशी सीधे सीएम पद पर कर दी जाए। सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार ने साफ़ कह दिया है कि वे राज्यसभा तभी जाएंगे जब सत्ता का समीकरण उनके हिसाब से होगा।

क्या नीतीश बाबू चाहते हैं कि निशांत को डिप्टी सीएम बनाया जाए? या फिर वे खुद ही 6 महीने और सीएम पद पर बने रहना चाहते हैं? संविधान का अनुच्छेद 164(4) उन्हें ये छूट देता है, और नीतीश बाबू इसी संवैधानिक लूपहोल (Loophole) का इस्तेमाल कर बीजेपी को एक तरह से ‘ब्लैमेल’ कर रहे हैं।

साफ़ है कि कभी ‘न्याय यात्रा’ तो कभी ‘समृद्धि यात्रा’ के नाम पर नीतीश बाबू ने बिहार को यात्राओं में तो उलझाए रखा, लेकिन हकीकत में सत्ता का ये ‘म्यूजिकल चेयर’ बिहार के विकास को दीमक की तरह चाट रहा है। क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारेंगे? क्या वे बीजेपी के अरमानों पर पानी फेरकर निशांत कुमार को बिहार की राजनीति का नया केंद्र बनाएंगे? या फिर बीजेपी अपनी आक्रामक सियासत से नीतीश को सरेंडर करने पर मजबूर कर देगी?

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