बहराइच में समाधान दिवस के दौरान हंगामा, जमीन के झगड़े से परेशान महिला का बड़ा कदम
भाजपा राज में गरीब हर जगह परेशान हैं। यूं तो सरकार कागजों में बड़े-बड़े दावे करती है कि हमारे राज में कोई भ्रष्टाचार नहीं है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में गरीब हर जगह परेशान हैं। यूं तो सरकार कागजों में बड़े-बड़े दावे करती है कि हमारे राज में कोई भ्रष्टाचार नहीं है।
इस सरकार में सबका साथ सबका विकास जैसे नारे सकारात्मक हैं लेकिन दोस्तों ये सब महज दिखावा है या यूँ कह लें कि ये सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए चंद जुमले हैं जो की जनता को अपनी तरफ बरगलाने के लिए किये जाते हैं ,यानी वास्तविक्ता से इनका कोई लेना देना नहीं है। आज भी लोगों को न्याय और अपने हक़ के लिए घंटों लाइनों में लगना पड़ रहा है।
खैर ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सामने आया है जहां समाधान दिवस में न्याय के लिए परेशान महिला जान देने की धमकी देते हुए नजर आ रही है
बहराइच जिले के नानपारा तहसील में बीते शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस मनाया जा रहा था। इस दिन आम लोगों की समस्याएं सुनने के लिए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव मौजूद थे। लेकिन इस कार्यक्रम का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
एक गरीब महिला, सुनीता सिंह,, रोती-बिलखती वहां पहुंची। दो साल से अपनी जमीन के विवाद में न्याय की लड़ाई लड़ रही वह महिला, हताश होकर डीएम और एसपी के सामने खड़ी हो गई और चीख-चीख कर कहा, “मैं आत्मदाह कर लूंगी।”
वहीँ इस घटना का वीडियो अब चर्चा का विषय बना हुआ है इसे लेकर विपक्ष भाजपा सरकार पर हमलावर है। इसी बीच कांग्रेस प्रवक्ता ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि बहराइच ,उत्तर प्रदेशी नारी वंदन बस नारों में है, बिना पैसे के न्याय नहीं मिलता, हकीकत है,
यह घटना भाजपा सरकार की “समाधान दिवस” जैसी योजनाओं की सच्चाई उजागर करती है। सरकार कहती है कि हम जनता की समस्याएं जल्दी निपटाते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है।
सुनीता सिंह जैसी आम महिला दो साल से अदालतों, तहसीलों और थानों के चक्कर काट रही है। उसके जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। पुलिस और प्रशासन ने उसकी मदद नहीं की। उल्टा शायद दबंगों का साथ दिया गया। जब सब जगह से निराश हो गई तो मजबूरन तहसील दिवस पर आकर जान देने की धमकी दी। यह दर्शाता है कि भाजपा शासन में गरीब, खासकर महिलाओं को न्याय मिलना कितना मुश्किल हो गया है।
भाजपा सरकार लगातार दावा करती है कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज है, विकास हो रहा है और महिला सुरक्षा पर पूरा ध्यान है। लेकिन बहराइच जैसी घटनाएं बताती हैं कि जमीन-जायदाद के मामलों में दबंगों और माफियाओं का बोलबाला है। गरीब किसान और महिलाएं अपने हक के लिए तरस रही हैं।
समाधान दिवस जैसे कार्यक्रम सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं। जहां अधिकारी बैठकर फाइलें देखते हैं, लेकिन असली समस्या का समाधान नहीं होता। सुनीता सिंह की कहानी कई अन्य महिलाओं की कहानी है जो भाजपा के राज में न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं।
यह घटना पूरे उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार को दिखाती है। अगर सरकार सच में जनता की सेवा करना चाहती तो दो साल में एक गरीब महिला की जमीन का मामला क्यों नहीं सुलझा? पुलिस क्यों दबंगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती? डीएम और एसपी जैसे बड़े अधिकारी मौजूद रहते हुए भी महिला को आत्मदाह की नौबत क्यों आई? यह साफ है कि सत्ता में बैठे लोग आम आदमी की पीड़ा नहीं समझ रहे हैं।
भाजपा सरकार के समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोग न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या या आत्मदाह की कोशिश करते हैं। विकास के नाम पर बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेसवे तो बन रहे हैं, लेकिन गांवों में गरीबों की जमीन बचाने का कोई इंतजाम नहीं है। महिला सशक्तिकरण की बातें तो की जाती हैं, लेकिन हकीकत में महिलाएं दबंगों के सामने बेबस हैं।
नानपारा की यह घटना भाजपा सरकार के लिए चेतावनी है। अगर जल्दी ही सुनीता सिंह जैसी महिलाओं को न्याय नहीं मिला तो लोगों का गुस्सा बढ़ेगा। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। दबंगों पर एक्शन हो, महिला को उसकी जमीन वापस मिले। वरना “समाधान दिवस” का नाम सिर्फ मजाक बनकर रह जाएगा। गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब बीजेपी राज में फैला भ्रष्टाचार उजागर हुआ हो बल्कि ऐसे मामले आये दिन सामने आते रहते हैं और सत्ता का सुख भोग रहे नेता इसपर ध्यान देना तो दूर की बात ये ऐसे मामलों पर बात करने से भी कतराते हुए नजर आ रहे हैं।



