जम्मू-कश्मीर में धार्मिक संस्थानों की जानकारी जुटाने पर बवाल

  • सुरक्षा एजेंसियां ले रहीं हैं मस्जिदों, मदरसों की जानकारी
  • धार्मिक स्वतंत्रता और निजता के अधिकार पर हमला : आगा रुहुल्लाह

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े धार्मिक संस्थानों की विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य कट्टरपंथी नेटवर्क पर लगाम कसना है, जबकि राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने इसे संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और निजता के अधिकार पर हमला बताया है। बता दें इमामों, शिक्षकों और प्रबंधन समिति के सदस्यों से यह भी पूछा गया है कि क्या वे पहले कभी आतंकी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, साथ ही उनसे किसी लंबित मामले या अदालत से हुई सजा का विवरण भी देने को कहा गया है।
दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। नेशनल कॉफ्रेंस के नेता और श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि पहले से ही सीआईडी, आईबी और अन्य एजेंसियों की निगरानी मौजूद है, ऐसे में धार्मिक संस्थानों पर अतिरिक्त जानकारी संग्रह धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। आगा रुहुल्लाह मेहदी ने आरोप लगाया कि यह कदम भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मस्जिदों पर नियंत्रण की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। मेहदी ने कहा, उनके पास आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के रूप में पहले से ही जानकारी मौजूद है। यह जानकारी इक_ा करना धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले एक विशेष धर्म के लोगों के एक विशिष्ट वर्ग को डराने-धमकाने का प्रयास है। सांसद ने कहा,ऐसा लगता है कि इमामों को भाजपा द्वारा अनुमोदित या शायद आरएसएस द्वारा भेजे गए उपदेश देने के लिए कहा जाएगा।

इस प्रक्रिया को तुरंत वापस लें : उमर फारूक

इसी तरह, मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाली मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने इस कवायद पर गहरी चिंता जताते हुए इसे निजता, गरिमा और मौलिक अधिकारों का पूर्ण उल्लंघन बताया है। संगठन ने उपराज्यपाल प्रशासन से इस प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता का सम्मान करने की मांग की है।

जम्मू और कश्मीर संभागों को अलग करें : लोन

विश्वविद्यालय (नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी) को जम्मू स्थानांतरित करने की मांग की है। पीपुल्स कांफ्रें स के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने जम्मू और कश्मीर संभागों के बीच मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर पुनर्विचार की खुली मांग कर एक नई बहस छेड़ दी है। हम आपको बता दें कि सज्जाद लोन घाटी से पहले प्रमुख नेता हैं जिन्होंने दोनों क्षेत्रों के बीच अमिकल डिवोर्स यानी सौहार्दपूर्ण अलगाव की बात कही है। एक आधिकारिक बयान में सज्जाद लोन ने कहा है कि विकास से जुड़े विवादों के साथ-साथ राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों ने हालात को इस मोड़ पर ला खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू को कश्मीर को पीटने वाली लाठी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। लोन ने कहा है कि कश्मीर के लोग अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और अलगाव की भावना पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है।

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