नेपाल में हिंसा बालेन शाह की अग्नि परीक्षा

- एलर्ट मोड में भारत, बढ़ाई गयी निगरानी
- सीमा पर भारत सतर्क नेपाल में सांप्रदायिक तनाव के बीच सरकार विपक्ष के निशाने पर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नेपाल को लंबे समय तक दक्षिण एशिया के उन देशों में गिना जाता रहा है जहां सामाजिक तनाव तो रहे लेकिन बड़े पैमाने की सांप्रदायिक हिंसा अपेक्षाकृत कम देखने को मिली। अब वही नेपाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है जहां तीन मौतों से आगे बढ़कर सवाल उसके सामाजिक संतुलन राजनीतिक नेतृत्व और क्षेत्रीय स्थिरता पर उठने लगे हैं। सुनसरी से शुरू हुई हिंसा का तत्काल कारण धार्मिक जुलूस के दौरान तेज संगीत को लेकर हुआ विवाद बताया जा रहा है। देखते ही देखते स्थानीय तनाव हिंसक झड़पों आगजनी पुलिस कार्रवाई और कर्फ्यू तक पहुंच गया। इसके बाद मधेश प्रदेश के अन्य जिलों में भी तनाव फैल गया है खबर लिखे जाने तक नेपाल में तनावपूर्ण स्थिति के बीच प्रधानमंत्री बलेन शाह को टीवी पर आना पड़ा है और शांति की अपील करनी पड़ी। हिंसा और तनाव तेजी से नये इलाकों को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। वहां के हालत देखते हुए भारत ने निकटवर्ती सीमाओं पर चौकसी बड़ा दी है और एसएसबी की गश्त को तेज कर दिया गया है।
पीएम पर लग रहे निष्क्रिय रहने के आरोप
नेपाल के विपक्षी नेताओं ने पीएम बालेन शाह पर पर संकट के समय राष्ट्रीय नेतृत्व देने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने आलोचना की है कि प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई। साथ ही यह मुद्दा भी उठाया गया कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री शामिल हुए। आलोचकों ने यह भी कहा है कि शाह ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और सरकार की प्रतिक्रिया की जानकारी भी नहीं दी।
स्थानीय स्तर पर हुई थी झड़प
हिंसा की शुरुआत 26 जुलाई को हुई थी जब सुनसरी जिले की देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका तीन के कप्तानगंज क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच स्थानीय स्तर पर झड़प हुई। श्रावण महीने के दौरान आयोजित होने वाले बोलबम पर्व में शामिल हिंदू श्रद्धालु कोशी बैराज से पवित्र जल लेकर कप्तानगंज चौक की ओर जा रहे थे और रास्ते में तेज डीजे संगीत बजा रहे थे। पुलिस के अनुसार मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने तेज संगीत पर आपत्ति जताई जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद धक्का-मुक्की में बदल गया और फिर हिंसक हो गया। दोनों समुदायों के बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए। उनके पास लाठियां पत्थर बांस के डंडे और लोहे की रॉड जैसे अस्थायी हथियार थे जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान ओम प्रकाश मेहता नाम के एक युवक की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई।
बालेन शाह को कड़ी चुनौती
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के सामने यह उनके कार्यकाल की पहली बड़ी आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक चुनौती मानी जा रही है। विपक्ष उन पर संकट के शुरुआती दौर में प्रभावी नेतृत्व न दिखाने का आरोप लगा रहा है। सरकार ने जांच समिति बनाई है दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है और शांति बनाए रखने की अपील की है। सवाल यह है कि क्या यह कदम पर्याप्त साबित होंगे या यह विवाद आने वाले दिनों में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस का कारण बनेगा। भारत के लिए भी यह घटनाक्रम केवल पड़ोसी देश की एक खबर नहीं है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा गहरे सामाजिक सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में सीमा से लगे भारतीय क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा निगरानी बढ़ाना एक एहतियाती कदम माना जा रहा है। अभी तक भारत में किसी राष्ट्रव्यापी हाई अलर्ट की घोषणा नहीं हुई है लेकिन सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है। एक्सपर्ट की नजर एक और पहलू पर है दक्षिण एशिया में पिछले वर्षों के कई सांप्रदायिक तनावों की शुरुआत स्थानीय धार्मिक आयोजनों जुलूसों या ध्वनि-विवाद जैसे छोटे कारणों से हुई और बाद में वह बड़े राजनीतिक मुद्दों में बदल गए सवाल यही है कि क्या नेपाल का ताजा घटनाक्रम भी उसी दिशा में जाएगा। यदि स्थिति समय रहते नियंत्रित नहीं हुई तो इसका असर नेपाल की आंतरिक राजनीति और सामाजिक विश्वास दोनों पर पड़ सकता है।
राष्ट्र के नाम बालेन शाह का संबोधन
राष्ट्र के नाम टेलीविजन संबोधन में पीएम बालेन शाह ने कहा है कि सरकार इस स्थिति को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने हिंसा के दौरान पुलिस से हुई झड़पों में मारे गए जय प्रकाश मेहता, ओम प्रकाश मेहता और गणेश यादव के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए जनता को भरोसा दिलाया है कि सुनसरी, सिराहा और अन्य प्रभावित जिलों में हुई घटनाओं के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अपने टीवी संबोधन में कहा है कि मैं सभी को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। सरकार सभी दोषियों को चाहे वह कोई भी हों कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम बालेन शाह ने बताया कि गृह मंत्रालय ने घटनाओं की जांच के लिए पहले ही एक जांच समिति बना दी है। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घायल लोगों का तुरंत और बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी दिखाने की अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर अफवाहें अपुष्ट जानकारी या ऐसी सामग्री साझा न करें जो सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती हो।
तनाव बरकरार तेजी से फैल रही है हिंसा
मधेश प्रदेश के कई जिलों में तनाव बना हुआ है। सुनसरी के कप्तानगंज क्षेत्र में हुई हिंसा के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पूरे क्षेत्र में फैल गए है। सिराहा जिले के गोलबाजार और लहान तथा धनुषा जिले के जनकपुरधाम सहित कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। यह प्रदर्शन दिन भर विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित किए गए थे। सिराहा में हुई झड़पों के दौरान गोली लगने से एक किशोर, गणेश यादव, की मौत हो गई। वहीं जय प्रकाश मेहता की सुनसरी में हुई झड़पों में लगी चोटों के कारण मौत हो गई। ओम प्रकाश मेहता की भी सुनसरी की हिंसा में जान चली गई थी। धनुषा और सिराहा में पुलिस के कई जवान भी घायल हुए है। सिराहा में आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। हालात बिगडऩे पर प्रशासन ने सिराहा के कई इलाकों और धनुषा के जनकपुरधाम में कर्फ्यू लगा दिया। वहीं भारत सीमा से लगे पर्सा जिले में निषेधाज्ञा लागू की गई।




