कल केरल में 140 सीटों के लिए वोटिंग, तीन प्रमुख गठबंधनों के बीच कांटे की टक्कर
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा. 2.71 करोड़ मतदाता एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के 883 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.

4pm न्यूज नेटवर्क: केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा. 2.71 करोड़ मतदाता एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के 883 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. चुनाव प्रचार में गोल्ड स्मगलिंग, सबरीमाला जैसे मुद्दों पर तीखी टक्कर देखने को मिली. सभी दलों ने जनता के बीच अपने दावे-वादे किए.
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में वोटिंग होगी. राज्य के 2.71 करोड़ मतदाता 883 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. इनमें 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 ट्रांसजेंडर वोटर हैं. चुनाव में मुकाबला (CPI-M) की अगुवाई वाले एलडीएफ, कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ और बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के बीच है. करीब एक महीने तक चले चुनाव प्रचार के दौरान केरल में दिल्ली के दिग्गजों का जमावड़ा भी रहा. एनडीए के उम्मीदवारों के लिए पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, यूडीएफ के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रचार किया. जबकि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सत्ताधारी एलडीएफ के प्रचार अभियान की अगुवाई की. सभी ने जनता के बीच जाकर अपने-अपने दावे और वादे किए.
बात करें चुनावी मुकाबले की तो अभी तक एलडीएफ और यूडीएफ के बीच टक्कर रही है. बीजेपी भी तेजी से राज्य में अपनी जड़ें मजबूत कर रही है. एलडीएफ के पास मजबूत कैडर बेस है. ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ काफी अच्छी रही है. बात करें कमजोरी की तो उसे एंटी-इन्कम्बेंसी का खतरा हो सकता है. विपक्ष गोल्ड स्मगलिंग केस और प्रशासनिक फैसलों को लेकर लगातार हमलावर रहा है.
मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर यूडीएफ का फोकस
बात करें यूडीएफ की तो इसके पक्ष में परंपरागत वोट है, जिसमें मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर अच्छी पकड़ है लेकिन आंतरिक गुटबाजी उसके लिए बड़ी चुनौती है. वहीं, बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का पूरा फोकस हिंदू वोट बैंक पर है. खासकर सबरीमाला मुद्दे के बाद कुछ क्षेत्रों में समर्थन भी बढ़ा है.
धीरे-धीरे ही सही पर पंचायत और लोकसभा चुनावों में बीजेपी का यहां वोट शेयर बढ़ा है. इससे उसके हौंसले बुलंद हैं. एनडीए तीसरे विकल्प के तौर पर ग्राउंड जगह बना रहा है. वोट बैंक का समीकरण देखें तो एलडीएफ का फोकस वामपंथी, मजदूर, कुछ हिंदू और पिछड़े वर्ग पर रहता है. जबकि यूडीएफ को मुस्लिम और ईसाई समुदाय का समर्थन मिलता आया है.
किसने क्या मुद्दे उठाए?
(CPI-M) ने 2024 में वायनाड में भूस्खलन का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस पर हमला बोला. (CPI-M) ने कहा, भूस्खलन के पीड़ितों के लिए पुनर्वास के लिए इकट्ठा किए गए पैसे का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है. वहीं, कांग्रेस ने माकपा के कई नेताओं के दलबदल को लेकर हमला बोला. कांग्रेस ने वाम दल के अंदर फूट का आरोप लगाया. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री विजयन पर तानाशाही तरीके से सरकार चलाने का आरोप लगाया.
उधर, बीजेपी ने एलडीएफ और यूडीएफ दोनों को निशाने पर लिया. बीजेपी ने आरोप लगाया कि एलडीएफ-यूडीएफ के राज में केरल का विकास नहीं हुआ. इस तरह उसने खुद को एक तीसरे विकल्प के तौर पर पेश किया. बीजेपी ने दावा किया, अगर वो सत्ता में आई तो सबरीमाला सोना चोरी मामले की जांच सीबीआई को सौंपेगी. इसके साथ ही 2 साल के अंदर एक एम्स अस्पताल चालू करने का वादा किया.
कैसी हैं वोटिंग की तैयारियां?
केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, 9 अप्रैल को होने वाले मतदान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. राज्य में 30 हजार 495 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. इनमें 24 सहायक पोलिंग बूथ भी हैं. इनकी जरूरत एसआईआर के बाद पड़ी. कासरगोड, कन्नूर, पलक्कड़, मलप्पुरम और एर्नाकुलम जिलों में नए पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे. इन पोलिंग स्टेशन में से 352 का संचालन महिलाएं और 37 का संचालन दिव्यांग करेंगे. वोटों की गिनती 140
स्ट्रांग रूम में होगी. मतदान शांतिपूर्ण हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे इसके लिए 76 हजार पुलिस कर्मियों और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है.



