खुद को दोहराता इतिहास : टूटेगा 4PM पर पाबंदी का ताला

- सु्प्रीम कोर्ट का सरकार को नोटिस, 14 अप्रैल को सुनवाई
- घबरा गयी सरकार, नहीं बन पड़ रहा कोर्ट में देते जवाब
- कपिल सिब्बल की गुगली में फंस गया सिस्टम
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आखिरकार इतिहास अपने आप में एक बार फिर दोहराता हुआ दिखायी दे रहा है। आज 4पीएम पर सरकारी तालाबंदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। एडवोकेट कपिल सिब्बल की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 14 अप्रैल तय कर दी है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि चैनल पर पाबंदी लगायी गयी हो।
इससे पूर्व में भी 4पीएम न्यूज चैनल को इसी तरह अचानक ब्लाक कर दिया गया था और तब भी मामला अदालत तक पहुंचा था। तब भी सरकार के फैसले पर सवाल उठे थे और तब भी अदालत के हस्तक्षेप के बाद चैनल बहाल हुआ था। आज अदालत में सिर्फ कानूनी दलीलें नहीं चलीं बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर ही सवाल खड़े हो गए। 4पीएम संपादक संजय शर्मा याचिकाकर्ता की तरफ से देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल, हैदर रिजवी और तलहा अबदुल रहमान ने मोर्चा संभाला। इन वकीलों ने अदालत के सामने जो तस्वीर रखी वह चौंकाने वाली थी। चैनल को बिना कारण बताए ब्लाक कर दिया गया। चैनल को ब्लाक करने के लिए कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया और 26 वीडियो भी उसी दिन हटा दिए गए।
लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में आज सुनवाई के दौरान जज साहब ने सीधे सरकार से जवाब तलब किया। आखिर किस आधार पर एक पूरे चैनल को ब्लाक कर दिया गया। क्या नोटिस जारी हुआ और 14 अप्रैल का फैसला सिर्फ एक चैनल का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की नीयत का भी होगा। इतिहास जैसे खुद को दोहरा रहा है। 4पीएम न्यूज पहले भी इसी तरह अचानक बंद किया गया था और तब भी अदालत की दखल के बाद ही चैनल फिर से सांस ले पाया था। आज फिर वही कहानी वही सन्नाटा, वही सवाल। सरकार ने जिस आधार पर चैनल को बंद करने का फैसला लिया है सरकार उसी आधार को कोर्ट में नहीं बता पायी। और यहीं पर अदालत का रुख बदल गया। यह सिर्फ ब्लॉकिंग नहीं रही यह पारदर्शिता बनाम ताकत की लड़ाई बन गई। आज वकीलों ने सिर्फ दलील नहीं दी बल्कि सरकार की प्रक्रिया को आईना भी दिखाने का काम किया। कपिल सिब्बल की दलीलों की धार एस एम हैदर रिजवरी की की सटीक पकड़ और तलहा अब्दुल रहमान की कानूनी बारीकियों ने मिलकर पूरा केस एक तकनीकी विवाद से निकालकर संवैधानिक बहस में बदल दिया। यदि आज की कार्रवाई को सीधे शब्दों में कहें तो वकीलों ने अदालत को यह एहसास दिलाया कि मामला छोटा नहीं है यह लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा है।
लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी?
यह मामला अब सिर्फ 4पीएम न्यूज का नहीं रहा यह सीधे-सीधे उस हर आवाज का मामला बन चुका है जो इंटरनेट पर सवाल पूछने की हिम्मत रखती है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई ने इस पूरे विवाद को एक नई दिशा दे दी है जहां सवाल सिर्फ क्यों ब्लाक किया गया का नहीं बल्कि क्या बिना जवाब दिए भी किसी को चुप कराया जा सकता है का है। यह हर उस व्यक्ति का मामला है जो इंटरनेट पर सवाल पूछता है। सोचिए अगर एक स्थापित चैनल को बिना ठोस वजह सार्वजनिक किए लीगल प्रोसेस के नाम पर बंद किया जा सकता है तो एक आम यूजर एक छोटा क्रिएटर या एक स्वतंत्र पत्रकार किस भरोसे पर अपनी बात रखेगा? यही वह बिंदु है जहां यह मामला लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बन जाता है। अगर बिना कारण बताए चैनल ब्लाक हो सकता है तो कल कोई भी आवाज चुप कराई जा सकती है। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि जिस मटेरियल के आधार पर कार्रवाई हुई वही आज तक पर्दे के पीछे है। न पारदर्शिता न जवाबदेही सिर्फ कार्रवाई। यह वही रास्ता है जहां कानून का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि नियंत्रण के लिए होता दिखायी दे रहा है।
एक संपादक का दर्द, लड़ाई का एलान
4पीएम न्यूज चैनल के संपादक संजय शर्मा के अथक परिश्रम से वजूद में आये 4पीएम न्यूज चैनल के लाखों सब्सक्राइबर और फालोवर है जो चैनल को सुनते और समझते हैं। 4पीएम की विश्वसनीयत इसी बात से समझी जा सकती है कि यह देश का नम्बर एक चैनल है। संजय शर्मा ने सरकार के इस हिटलरशाही रवैये से लड़ाई को लडऩे का ऐलान कर दिया है। उनके आज के लाइव शो कोई औपचारिक बयान जैसा नहीं था बल्कि सीधे सिस्टम को चुनौती देने वाला खुला संदेश था। संपादक संजय शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि उनका चैनल किसी गलती की वजह से नहीं बल्कि सवाल पूछने की वजह से बंद किया गया। उनका दावा है कि उन्होंने हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा का सम्मान किया लेकिन सरकार से जवाब मांगना उनका अधिकार भी है और जिम्मेदारी भी। लाइव शो में उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें चैनल ब्लाक होने की जानकारी सीधे सरकार से नहीं बल्कि यूटयूब के जरिए मिली। यानी जिस पर कार्रवाई हुई उसे ही आधिकारिक रूप से कारण तक नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि अगर कोई कंटेंट गलत था तो उसे हटाया जा सकता था लेकिन पूरे चैनल को ब्लाक करना सीधा हमला है। यह सिर्फ प्लेटफार्म को बंद करना नहीं बल्कि लाखों दर्शकों तक पहुंचने वाली आवाज को खत्म करना है।




