विरासत की जंग या कुछ और? Rohit Pawar के खुलासे ने खड़े किए नए सवाल

महाराष्ट्र की राजनीति के लिए पिछला कुछ समय उथल-पुथल भरा रहा है…लेकिन अजित पवार के अचानक निधन ने न केवल पवार परिवार बल्कि पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र की राजनीति के लिए पिछला कुछ समय उथल-पुथल भरा रहा है…लेकिन अजित पवार के अचानक निधन ने न केवल पवार परिवार बल्कि पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है…

इस दुखद घड़ी के बीच, बारामती के पिंपली गांव में जिला परिषद चुनाव के लिए मतदान करने पहुंचे विधायक रोहित पवार ने अपने चाचा को याद करते हुए कुछ ऐसे खुलासे किए हैं…जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है…रोहित पवार ने बेहद भावुक अंदाज में बताया कि सत्ता और संघर्ष की तमाम खबरों के बीच अजित दादा के मन में हमेशा एक ही टीस रहती थी…पूरा पवार परिवार एक साथ आ जाए…रोहित के अनुसार, दादा अपनी आखिरी सांस तक इसी कोशिश में थे कि सुप्रिया ताई…पवार साहब और बाकी सभी सदस्य मतभेदों को भुलाकर एक छत के नीचे आ जाएं…

कैसे रोहित पवार ने खुद बताया कि…अजित पवार चाहते थें कि पूरा परिवार एक साथ आ जाए…..अजित पवार के निधन के बाद ये पहली बार है जब परिवार के किसी सदस्य ने उनके भीतर की उस छटपटाहट को जनता के सामने रखा है…रोहित पवार ने साफ किया कि भले ही राजनीतिक रास्ते अलग दिख रहे थे…लेकिन पारिवारिक स्तर पर दादा ने कभी दूरियां स्वीकार नहीं की थीं…आज जब परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि पूरा परिवार एक साथ खड़ा नजर आ रहा है…तो रोहित इसे दादा के उसी अधूरे सपने का सच होना मान रहे हैं…उन्होंने कहा कि…दादा का ये सपना कि परिवार हमेशा संगठित रहे…अब साकार हो रहा है…आज जो एकजुटता दिख रही है…वो शायद दादा के उन्हीं प्रयासों का फल है…

इस दौरान चुनाव और राजनीति के प्रति अजित पवार के जुनून को याद करते हुए रोहित पवार ने एक बड़ा खुलासा उनके अंतिम सपने को लेकर किया…रोहित पवार ने बताया कि निधन से पहले दादा की सबसे बड़ी इच्छा यही थी कि…उनके द्वारा तैयार किए गए जमीनी कार्यकर्ता और समर्थक जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में भारी जीत दर्ज करें…रोहित पवार के शब्दों में अजित दादा हमेशा अपने कार्यकर्ताओं के लिए ढाल बनकर खड़े रहते थे…आज उनके जाने के बाद…ये चुनाव सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं बल्कि उन्हें दी जाने वाली श्रद्धांजलि है…रोहित को पूरा भरोसा है कि बारामती और आसपास की जनता दादा के इस अंतिम सपने को अपने वोटों के जरिए जरूर पूरा करेगी…

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार को एक मास्टर आर्किटेक्ट माना जाता था…जो चुनाव प्रचार की पूरी कमान अकेले अपने कंधों पर उठाने का माद्दा रखते थे…रोहित पवार ने उनके काम करने के तरीके पर रोशनी डालते हुए कहा कि..दादा सिर्फ नेता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के संरक्षक थे…वो हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता के राजनीतिक भविष्य की चिंता करते थे…आज उनकी कमी पार्टी और समर्थकों को खल रही है…लेकिन रोहित का मानना है कि दादा की कार्यशैली ही अब उनके समर्थकों का मार्गदर्शन करेगी….

यही नहीं पवार परिवार के भीतर बदलती केमिस्ट्री पर बात करते हुए रोहित पवार ने शरद पवार और पार्थ पवार के बीच हुए हालिया संवाद का भी जिक्र किया…उन्होंने कहा कि उनके बीच जो बातचीत हुई है…वो पूरी तरह भावनात्मक थी और इसमें राजनीति से ऊपर उठकर परिवार को प्राथमिकता दी गई….रोहित पवार ने संकेत दिया कि आने वाले समय में पवार परिवार कुछ ऐसे सामाजिक कार्य करेगा…जो राजनीति के दायरे से बाहर होंगे और समाज सेवा को समर्पित होंगे…ये बयान दिखाता है कि अजित पवार के जाने के बाद परिवार अब अपनी विरासत को नए सिरे से संजोने की कोशिश कर रहा है… इस दौरान रोहित पवार ने प्लेन हादसे के पीछे साजिश होने का भी जिक्र किया…और इस हादसे को लेकर बहुत सारे लोगों के मन में बहुत सारे सवाल हैं और हमारे मन भी बहुत सारे सवाल हैं…

इस दौरान सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण सुझाव रोहित पवार ने पार्टी के नेतृत्व को लेकर दिया…उन्होंने भावुक होकर कहा कि…मुझे सुनेत्रा ताई यानी अजित पवार की पत्नी में दादा की छवि दिखाई देती है….रोहित ने पुरजोर वकालत की कि पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का जो पद खाली हुआ है…उसकी जिम्मेदारी सुनेत्रा ताई को दी जानी चाहिए…उनका मानना है कि सुनेत्रा पवार ही वो कड़ी हैं जो दादा के समर्थकों को एकजुट रख सकती हैं और उनके अधूरे मिशन को आगे बढ़ा सकती हैं….

कुल मिलाकर, रोहित पवार का ये बयान न केवल एक भतीजे का अपने चाचा के प्रति प्रेम है…बल्कि ये महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति का एक नया रोडमैप भी है…जहां पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन ने जो खालीपन पैदा किया है….उसे भरने के लिए अब परिवार और कार्यकर्ता भावनात्मक रूप से एकजुट हो रहे हैं….रोहित पवार की बातों से साफ है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में पवार पावर का एक नया और संगठित रूप देखने को मिल सकता है…जो अजित दादा की अंतिम इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होगा.

Related Articles

Back to top button