UPSC में तीन चरणों वाली परीक्षा कब शुरू हुई? जानिए 100 साल का इतिहास

UPSC के 100 साल पूरे हाे गए हैं. अपने 100 साल के इस सफर में UPSC ने ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों को तैयार किया है, जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को गति देने में अहम भूमिका निभाई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: UPSC के 100 साल पूरे हाे गए हैं. अपने 100 साल के इस सफर में UPSC ने ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों को तैयार किया है, जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को गति देने में अहम भूमिका निभाई है.

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 साल पूरे हो गए हैं. इस अवसर पर आयोजित हो रहे एक कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित कर रहे हैं. 1 अक्टूबर 1926 को अंग्रेजी हुकूमत में भारत के लिए पहला पब्लिक सर्विस कमीशन स्थापित किया गया, जो आगे चलकर UPSC के नाम से जाना गया. इन 100 सालों में भारत ने आजादी से लेकर विकास यात्रा में कई अहम पड़ाव पार किए हैं. इसमें UPSC की भूमिका भी अहम रही है. कई मायनों में देखें तो UPSC से निकलने वाले अधिकारियों ने ही भारत की विकास यात्रा का सपना देखा और उसे धरातल पर उतारा.

लंदन में ICS एग्जाम का होता था आयोजन
भारत के लिए पहला पब्लिक सर्विस कमीशन 1 अक्टूबर 1926 में स्थापित किया गया. इससे पूर्व तक लंदन में इंडियन सर्विस कमीशन (ICS) एग्जाम के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों का चयन किया जाता था, जिसकी शुरुआत 1955 में की गई थी, जो एक ओपन कॉम्पिटेशन एग्जाम होता था. इससे पूर्व तक ईस्ट इंडिया कंपनी प्रशासनिक अधिकारियों कानॉमिनेशन करती थी. ICS परीक्षा सिर्फ अंग्रेजी में होती थी, जबकि इसमें ग्रीक और लैटिन जैसे विषय शामिल थे. ऐसे में ब्रिटिश सिस्टम से बाहर पढ़े-लिखे भारतीयों के लिए ICS पास करना बेहद ही मुश्किल होता था.

सत्येंनाथ टैगोर पहले भारतीय ICS, उसके बाद उम्र सीमा कर दी गई
ICS परीक्षा सिर्फ अंग्रेजी में होती थी और इसमें ग्रीक और लैटिन जैसे विषय शामिल होते थे, ऐसे में भारतीय कैंडिडेट्स के लिए इसे पास करना मुश्किल होता था, लेकिन तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए1963 में सत्येंनाथ टैगोर ने ICS एग्जाम पास किया और वह ICS एग्जाम पास करने वाले पहले भारतीय बने. वह परीक्षा देने के लिए कलकता से इंग्लैंड गए थे. सत्येंद्रनाथ टैगाेर रविंद्रनाथ टैगाेर के बड़े भाई थे. इसके बाद 1977 में ICS में शामिल होने की उम्र सीमा कम कर दी गई, जिसके तहत 23 से 19 साल की उम्र सीमा निर्धारित कर दी गई. इससे भारतीयों को तैयारी के लिए बेहद कम समय मिलने लगा.

1922 में पहली बार भारत में हुआ ICS एग्जाम
ICS एग्जाम में बड़ा बदलाव साल 1922 में आया. इस साल पहली बार ICS एग्जाम पहली बार भारत में कराया गया, जिसके तहत इलाहाबाद में पहली बार परीक्षा केंद्र बनाया गया, जिसे 1928 में दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया. इसी बीच 1 अक्टूबर 1926 को भारत के लिए पहला पब्लिक सर्विस कमीशन 1 अक्टूबर 1926 में स्थापित किया गया.

आजादी के बाद बना UPSC, ICS की जगह IAS-IFS
भारत को स्वतंत्रता मिलने ICS की जगह IAS ने ली. इसी कड़ी में आजादी के बाद दिसंबर 1947 में पहली बार IAS परीक्षा आयोजित की गई. तो वहीं साल 1948 में संयुक्त परीक्षा के माध्यम से इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) अधिकारियों के पहले बैच की भर्ती की गई. वहीं संविधान लागू होने के बादफेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के तौर पर स्थापित किया गया .

1979 में UPSC में 3 स्टेज एग्जाम की एंट्री
UPSC ने अपनी 100 साल की यात्रा में खुद में कई बदलाव किए हैं. इसमें 1976 में हुए बदलाव को अहम माना जाता है. 1976 में डीएस कोठारी समिति ने UPSC में 3 स्टेज एग्जाम का प्रस्ताव रखा, जिसे 1979 में लागू किया गया. इसी कड़ी में यूपीएससी में प्रीलिम्स, मेंन्स और इंटरव्यू यानी 3 स्टेज एग्जाम के माध्यम से सिलेक्शन पहोने लगा. वहीं UPSC एग्जाम में 1989 में, ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) टेक्नोलॉजी शुरू की गई.

वहीं साल 2000 UPSC में ऑनलाइन रिक्रूटमेंट एप्लीकेशन (ORA) सिस्टम लॉन्च किया गया. 2010 तक, UPSC की कई परीक्षाओं के लिए आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन हो गए थे. इसी तरह 2013 में पहली बार उसी साल, कंप्यूटर-आधारित भर्ती परीक्षा आयोजित की गई. तो वहीं इसी साल से यूपीएससी मेन एग्जाम के दायरे को सीमित किया गया और इसमें एथिक्स, इंटीग्रिटी और एप्टीट्यूड सहित चार सामान्य अध्ययन (General Studies) पेपर और एक वैकल्पिक विषय (optional subject) शुरू किए गए.

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