गोरखधंधों पर कब लगेगी रोक? गुजरात में अवैध कारोबार बेलगाम, शराब की खेप बरामद

शराबबंदी वाले गुजरात में एक बार फिर अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है... भावनगर में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शराब की खेप बरामद की है...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात महात्मा गांधी की जन्मभूमि है.. वहां शराब पर पूरी तरह पाबंदी है.. लेकिन फिर भी अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है.. हाल ही में भावनगर जिले में पुलिस ने तीन अलग-अलग छापेमारी में चार लोगों को गिरफ्तार किया.. और 1.21 लाख रुपये की शराब जब्त की.. यह घटना बताती है कि राज्य में शराब की तस्करी.. और बिक्री कितनी आसानी से हो रही है.. अधिकारियों का कहना है कि शराब के अवैध कब्जे और बिक्री के मामले में छह लोगों के खिलाफ तीन केस दर्ज किए गए हैं.. यह सिर्फ एक उदाहरण है.. लेकिन पूरे गुजरात में ऐसे गोरखधंधे चल रहे हैं.. सवाल यह है कि इस पर रोक कब लगेगी..

बता दें बुधवार को गुजरात के भावनगर शहर और जिले में पुलिस ने तीन अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की.. इसमें चार लोगों को गिरफ्तार किया गया.. और कुल 1.21 लाख रुपये कीमत की शराब और बीयर जब्त की गई.. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये मामले शराब के अवैध भंडारण और बिक्री से जुड़े हैं.. पहली घटना में गंगाजलिया पुलिस ने भावनगर शहर के लखावाड़ इलाके में कानबीवाड़ धजाग्रावाली शेरी में एक किराए के मकान पर छापा मारा.. वहां तीसरी मंजिल पर एक कमरे में 60 बोतलें भारतीय बनी विदेशी शराब मिलीं.. जिनकी कीमत 41,266 रुपये है.. आरोप है कि यह शराब साहिल उर्फ भुरो अशोकभाई जादव ने रखी थी.. उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है..

दूसरी घटना में गंगाजलिया पुलिस को सूचना मिली कि.. भीलवाड़ा सर्कल के पास रिक्शा स्टैंड पर तीन लोग शराब के साथ खड़े हैं.. पुलिस ने चित्रा इलाके के कल्पेश उर्फ केपी पथुभाई प्रजापति.. और आनंदनगर के धनजी उर्फ धनु लालजीभाई मकवाना.. और बकुल हर्षदराय पंड्या को गिरफ्तार किया.. इनके पास से 139 बोतलें शराब और 11 टिन बीयर मिली.. जिनकी कुल कीमत 26,211 रुपये है.. इस मामले में भी केस दर्ज हो गया..

वहीं तीसरी छापेमारी गरियधार पुलिस ने मांडवी गांव के थोथ इलाके में एक खेत पर की.. वहां सूचना थी कि शराब स्टोर करके बेची जा रही है.. तलाशी में हॉर्नबीम के पत्तों के ढेर में छिपी 36 बोतलें शराब.. नौ टिन बीयर और 53,780 रुपये नकद मिले.. मांडवी के राहुल भूपतभाई डेर को गिरफ्तार किया गया.. पूछताछ में डेर ने बताया कि शराब रायपर के मधु हाथीभाई गोवालिया ने सप्लाई की थी.. दोनों के खिलाफ केस दर्ज हो गया.. ये घटनाएं दिखाती हैं कि अवैध शराब का नेटवर्क गांवों से शहरों तक फैला हुआ है.. पुलिस की कार्रवाई से कुछ लोग पकड़े जाते हैं.. लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हो रही है..

आपको बता दें कि गुजरात में शराब पर पाबंदी की शुरुआत 1960 से हुई, जब बॉम्बे स्टेट से गुजरात अलग बना.. यह कानून बॉम्बे प्रोहिबिशन एक्ट, 1949 पर आधारित है.. जो गांधीजी के विचारों से प्रेरित है.. गांधीजी शराब को समाज के लिए जहर मानते थे.. और इसे रोकने की वकालत करते थे.. राज्य बनने के बाद गुजरात ने इस कानून को सख्ती से लागू किया.. 2011 में इसे गुजरात प्रोहिबिशन एक्ट नाम दिया गया.. और 2017 में संशोधन से शराब बनाने, खरीदने, बेचने या ट्रांसपोर्ट करने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान जोड़ा गया..

लेकिन क्या यह कानून प्रभावी है.. विशेषज्ञ कहते हैं कि गुजरात में शराब की बिक्री, खरीद, स्टोरेज.. और पीना गैरकानूनी है.. लेकिन विदेशी पर्यटकों और कुछ मामलों में परमिट से पीने की छूट है.. हाल में GIFT सिटी में प्रोहिबिशन में छूट दी गई, जहां कर्मचारी.. और विजिटर वाइन और डाइन कर सकते हैं.. यह 2023 में हुआ बदलाव है.. ताकि विदेशी निवेश आकर्षित हो.. इसी तरह, रण उत्सव, सूरत डायमंड बोर्स और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में भी छूट की योजना है.. यह दिखाता है कि आर्थिक विकास के लिए सरकार कानून में लचीलापन ला रही है.. लेकिन आम लोगों के लिए पाबंदी बनी हुई है..

भारत में गुजरात के अलावा बिहार, नागालैंड, मिजोरम और लक्षद्वीप में पूर्ण प्रतिबंध है.. लेकिन इन राज्यों में भी अवैध शराब का बाजार बड़ा है.. गुजरात में प्रतिबंध गांधीजी की वजह से मजबूत है.. लेकिन अमल में कमजोर.. अध्ययन बताते हैं कि प्रतिबंध से शराब की खपत कम हुई है.. (2019 में गुजरात में 3.9% लोग शराब पीते हैं).. लेकिन पूरी तरह रुक नहीं पाई..

गुजरात में प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब का कारोबार करोड़ों का है.. 2024 में गुजरात पुलिस ने 82 लाख बोतलें भारतीय बनी विदेशी शराब जब्त की.. जिनकी कीमत 144 करोड़ रुपये है.. यानी हर चार सेकंड में एक बोतल पकड़ी गई.. अहमदाबाद शहर में अकेले 3.06 लाख बोतलें जब्त हुईं.. और 2,139 केस दर्ज हुए.. वडोदरा रूरल में 9.8 करोड़ की शराब पकड़ी गई, जो ट्रकों और गोदामों में छिपी थी..

2025 में भी यह सिलसिला जारी है.. जनवरी से जुलाई तक 1.19 करोड़ की विदेशी शराब जब्त हुई.. स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने 2024 में 455 केस दर्ज किए.. जिसमें 22.51 करोड़ की शराब और कुल 52 करोड़ का सामान जब्त हुआ.. 2025 के पहले छह महीनों में SMC ने 224 रेड्स की.. जिसमें 11.5 करोड़ की शराब पकड़ी..

पिछले तीन सालों में 48,000 से ज्यादा शिकायतें अवैध शराब की आईं.. लेकिन कार्रवाई पर सवाल हैं.. 2020-21 में 14,214, 2021-22 में 17,857 और 2023-24 में 16,316 शिकायतें दर्ज हुईं.. ये आंकड़े बताते हैं कि प्रतिबंध के बावजूद तस्करी जारी है.. शराब पड़ोसी राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश या महाराष्ट्र से आती है.. और ट्रकों, सब्जियों के नीचे या पानी की टंकियों में छिपाई जाती है..

अवैध शराब क्यों फल-फूल रही है.. मुख्य कारण पुलिस और तस्करों का गठजोड़ है.. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि बूटलेगर्स पुलिस की मिलीभगत से काम करते हैं.. गरीब और आदिवासी इलाकों में यह ज्यादा है.. जहां सस्ती नकली शराब बिकती है.. 2022 में गुजरात में मेथनॉल जहर से 42 लोग मारे गए.. और 97 अस्पताल में भर्ती हुए.. पुलिस ने 475 लीटर केमिकल जब्त किया और 15 गिरफ्तारियां की.. ऐसे हादसे बताते हैं कि नकली शराब जानलेवा है..

 

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