पेट्रोल पंपों पर किसका दबाव? 25 लीटर से ज्यादा डीजल देने पर रोक, शक्ति सिंह का बड़ा आरोप

कांग्रेस नेता शक्ति सिंह ने पेट्रोल-डीजल को लेकर बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि... गुजरात में पेट्रोल पंप संचालकों पर ऊपर से... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने पेट्रोल.. और डीजल की सप्लाई को लेकर एक गंभीर बयान दिया है.. और उन्होंने कहा कि वे सौराष्ट्र क्षेत्र के दौरे पर थे.. वहां ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के लोगों ने उनसे मुलाकात की.. और बताया कि जब वे ट्रकों में डीजल डलवाने जाते हैं.. तो उन्हें सिर्फ 25 लीटर ही डीजल मिलता है.. लंबे सफर करने वाले ट्रकों के लिए इतना तेल बहुत कम पड़ता है..

वहीं जब उन्होंने पेट्रोल पंप मालिकों से बात की.. तो उन्होंने बताया कि ऊपर से दबाव है.. डीजल की बिक्री कम करो.. किसानों को ट्रैक्टर में तो तेल दिया जाए.. लेकिन गैलन या डिब्बे में न दिया जाए.. अगर देना भी पड़े, तो बहुत कम मात्रा में दिया जाए.. इससे ट्रांसपोर्टर और किसान दोनों परेशान हैं..

शक्ति सिंह गोहिल गुजरात कांग्रेस के सक्रिय नेता हैं.. वे अक्सर जमीनी स्तर पर दौरा करते रहते हैं.. और लोगों की समस्याएं सुनते हैं.. हाल ही में सौराष्ट्र के दौरे के दौरान उन्होंने ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों.. और किसानों से बात की। उनके अनुसार, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने शिकायत की कि पेट्रोल पंपों पर डीजल भरवाने जाते हैं.. तो सिर्फ 25 लीटर तक की सीमा रखी जाती है..

एक ट्रक को सैकड़ों किलोमीटर सफर करना पड़ता है.. 25 लीटर डीजल में तो कुछ ही दूरी तय हो पाती है.. बार-बार पंप पर रुकना पड़ता है.. जिससे समय और पैसे दोनों का नुकसान होता है.. शक्ति सिंह ने कहा कि यह स्थिति सामान्य नहीं लगती.. और उन्होंने पंप मालिकों से पूछताछ की.. पंप मालिकों ने बताया कि उन्हें ऊपरी स्तर से निर्देश हैं कि.. डीजल की खुली बिक्री सीमित रखें..

सौराष्ट्र गुजरात का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है.. यहां से ट्रक पूरे देश में माल ले जाते हैं.. कपास, मूंगफली, समुद्री उत्पाद, औद्योगिक सामान आदि.. ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि एक ट्रक को लंबे सफर के लिए 300 से 500 लीटर डीजल की जरूरत पड़ती है.. अगर हर बार सिर्फ 25 लीटर मिले, तो कई बार पेट्रोल पंप पर जाना पड़ता है.. इससे समय बर्बाद होता है.. ड्राइवर थक जाते हैं और परिवहन लागत बढ़ जाती है..

परिवहन महंगा होने से माल की कीमत भी बढ़ती है.. जिसका असर आखिरकार आम उपभोक्ता पर महंगाई के रूप में पड़ता है.. ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के लोगों का कहना है कि यह दबाव हाल के महीनों में बढ़ा है.. वैश्विक स्तर पर तेल संकट और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण पैनिक बाइंग हुई.. सरकार ने होर्डिंग रोकने के लिए पंपों पर निर्देश दिए.. लेकिन इसका असर सामान्य व्यापार पर पड़ रहा है..

किसान गुजरात की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.. सौराष्ट्र में कपास, मूंगफली, जीरा आदि फसलें उगाई जाती हैं.. खेती में डीजल का बहुत उपयोग होता है.. ट्रैक्टर चलाने, पानी पंप करने, हार्वेस्टर और थ्रेशर चलाने में.. शक्ति सिंह गोहिल के अनुसार.. पंप मालिकों पर दबाव है कि किसानों को वाहन के टैंक में तो डीजल दें.. लेकिन डिब्बे या गैलन में कम दें या बिल्कुल न दें..

इससे किसानों को स्टोरेज की समस्या हो रही है.. दूर-दराज के गांवों में बार-बार पेट्रोल पंप जाना मुश्किल होता है.. फसल कटाई के मौसम में डीजल की लगातार जरूरत रहती है.. अगर सप्लाई सीमित रही.. तो खेती का काम रुक सकता है.. मजदूरों को इंतजार करना पड़ सकता है.. और फसल खराब होने का खतरा बढ़ सकता है.. कई किसानों का कहना है कि उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ता है.. पेट्रोल पंप मालिक अक्सर बीच में फंस जाते हैं.. एक तरफ सरकार या ऑयल कंपनियों के निर्देश होते हैं.. दूसरी तरफ ग्राहकों की शिकायतें.. और उन्होंने शक्ति सिंह को बताया कि ऊपर से दबाव है.. बिक्री सीमित रखो, होर्डिंग न होने दो..

2026 में पश्चिम एशिया संकट और ईरान से जुड़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई.. भारत में पैनिक बाइंग शुरू हुई और कई जगह लंबी कतारें लग गईं.. गुजरात सरकार ने होर्डिंग रोकने के लिए 23 मार्च 2026 के आसपास सर्कुलर जारी किया कि.. वाहन के टैंक में ही तेल दिया जाए, डिब्बों में नहीं.. बाद में किसानों के लिए 200 लीटर तक छूट दी गई.. लेकिन व्यवहार में कई जगहों पर अब भी सख्ती बरती जा रही है.. पंप मालिकों का कहना है कि.. अगर वे नियम तोड़ेंगे, तो उनके लाइसेंस पर असर पड़ सकता है..

गुजरात सरकार ने बार-बार कहा है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है.. पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.. पैनिक बाइंग और अफवाहों के कारण कुछ पंपों पर सीमाएं लगाई गईं.. ताकि ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सके.. सरकार का कहना है कि किसानों के लिए छूट है.. वे सत्यापन के साथ 200 लीटर तक डिब्बे में डीजल ले सकते हैं.. ट्रांसपोर्ट के लिए भी पर्याप्त सप्लाई होने का दावा किया गया है..

केंद्र सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी घटाकर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की.. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर शिकायतें सामने आ रही हैं.. विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है.. 2026 में ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित हुआ.. भारत अपने तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से लाता है.. कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन प्रभावित हुई.. देशभर में पैनिक बाइंग शुरू हुई.. गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में लंबी लाइनें देखने को मिलीं..

वहीं इस स्थिति में कई राज्य सरकारों ने होर्डिंग रोकने के लिए कदम उठाए.. गुजरात में भी यही किया गया.. लेकिन इसका असर सामान्य उपयोगकर्ताओं, खासकर ट्रांसपोर्टरों.. और किसानों पर पड़ा.. पेट्रोल और डीजल महंगा होने या सीमित मिलने से हर चीज महंगी हो जाती है.. गुजरात जैसे औद्योगिक राज्य में यह और बड़ा मुद्दा बन जाता है.. ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि लागत बढ़ने से उनका मुनाफा घट रहा है.. किसानों का कहना है कि खेती का खर्च बढ़ रहा है.. आम आदमी बाजार में महंगाई महसूस कर रहा है..

 

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