शबरीमाला मुद्दे पर पीएम क्यों चुप हैं : राहुल

- नेता प्रतिपक्ष बोले- भाजपा और एलडीएफ में मिलीभगत
- मेरे खिलाफ 36 मामले दर्ज, एलडीएफ नेताओं की अनदेखी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोच्चि। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व एलओपी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह केरल दौरे के दौरान शबरीमाला मुद्दे पर चुप रहे, जो साफ संकेत है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) साथ काम कर रहे हैं। अडूर में कांग्रेस की एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने दावा किया कि नौ अप्रैल के लिए निर्धारित विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भाजपा के गठजोड़ से मुकाबला करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, हम एलडीएफ के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, जिसे भाजपा का पूरा समर्थन प्राप्त है। एक तरफ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) है और दूसरी तरफ माकपा-भाजपा का गठजोड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में भाजपा (एलडीएफ को फायदा पहुंचाने के लिए)गुपचुप तरीके से काम कर रही है।’’ गांधी ने कहा, भाजपा यहां यूडीएफ को नहीं चाहती, क्योंकि वह जानती है कि राष्ट्रीय स्तर पर उसे चुनौती देने वाली एकमात्र ताकत कांग्रेस है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ हमारी वैचारिक लड़ाई है। पलक्कड़ में मोदी द्वारा दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर मंदिरों और धर्म की बात करते हैं, लेकिन शबरिमला मामले पर चुप रहे। उन्होंने कहा,वह शबरिमला के बारे में बोलना भूल गए। उन्होंने भगवान अयप्पा मंदिर से जुड़े मुद्दों का जिक्र नहीं किया। इससे साफ है कि भाजपा और एलडीएफ साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जहां विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं, वहीं केरल में एलडीएफ नेतृत्व पर ऐसा कोई दबाव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया,मेरे खिलाफ 36 मामले दर्ज किए गए हैं और मुझसे लगातार 55 घंटे तक पूछताछ की गई है। लेकिन केरल के मुख्यमंत्री या एलडीएफ नेताओं के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
पीएम चुनावी रूप से फायदा पहुंचाने वाले ही धार्मिक मुद्दों को उठाते हैं
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री धार्मिक मुद्दों को तभी उठाते हैं, जब यह चुनावी रूप से उनके लिए फायदा पहुंचाने वाला होता है। उन्होंने कहा, उनके लिए अगर इससे वोट मिलते हैं, तो वह मंदिरों की बात करेंगे, अन्यथा चुप रहेंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अगर यूडीएफ सत्ता में आती है तो मंदिर से संबंधित कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।



