क्या Om Birla देंगे इस्तीफा? Rahul Gandhi के आक्रामक रुख से बदलेगा समीकरण?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इन दिनों एक बड़े राजनीतिक संकट में घिरे हुए हैं..

4पीएम न्यूज नेटवर्क: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इन दिनों एक बड़े राजनीतिक संकट में घिरे हुए हैं…

संसद के अंदर और बाहर, दोनों जगह उनके इस्तीफे को लेकर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं…विपक्ष ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर माहौल को और भी ज्यादा गर्म कर दिया है…भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक किसी भी लोकसभा अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया नहीं गया है…इसलिए ये मामला काफी ज्यादा गंभीर माना जा रहा है…ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि…क्या स्पीकर ओम बिरला इस्तीफा देंगे?…और क्या कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आक्रामक रुख से पूरा राजनीतिक समीकरण बदल सकता है?….

दरअसल, विपक्ष का कहना है कि ओम बिरला ने अध्यक्ष पद की निष्पक्षता को बनाए नहीं रखा…उनका आरोप है कि पिछले कुछ सत्रों में सदन की कार्यवाही पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाई गई…खासतौर पर विपक्षी सांसदों के बड़े पैमाने पर निलंबन को लेकर नाराजगी गहरी है…विपक्ष का मानना है कि सदन में सरकार की आलोचना करने पर सख्त कार्रवाई की गई…जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को राहत दी गई…यही कारण है कि विपक्ष ने इस बार सीधे अविश्वास प्रस्ताव का रास्ता चुना…

अविश्वास प्रस्ताव पर करीब 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं…नियमों के अनुसार, अगर प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है तो 14 दिनों के भीतर इस पर चर्चा और मतदान होना जरूरी है…ये स्थिति अपने आप में गंभीर है…क्योंकि अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़ी घटना माना जाता है…अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या ये प्रस्ताव वास्तव में चर्चा और वोटिंग तक पहुंचेगा या उससे पहले कोई राजनीतिक समाधान निकलेगा…

वहीं बजट सत्र के दौरान एक दिलचस्प बहस तब देखने को मिली…जब राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला…उस समय ओम बिरला अध्यक्ष की कुर्सी पर मौजूद नहीं थे…उनकी जगह जगदंबिका पाल सदन का संचालन कर रहे थे…राहुल गांधी ने इस पर टिप्पणी भी की…जिससे ये साफ संकेत मिला कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से पूरी तरह भुनाने के मूड में है…राहुल गांधी का बदला हुआ और ज्यादा आक्रामक अंदाज साफ दिख रहा है…

राहुल गांधी पिछले कुछ महीनों से संसद के अंदर काफी ज्यादा मुखर दिखाई दे रहे हैं…वो सरकार के खिलाफ सीधे सवाल उठा रहे हैं और विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं…ऐसे में ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है…और राहुल गांधी का ये रुख न केवल सरकार पर दबाव बना रहा है…बल्कि अध्यक्ष पद की गरिमा और निष्पक्षता पर भी बहस छेड़ रहा है…

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने शुरुआत में इस अविश्वास प्रस्ताव को रोकने की कोशिश की…कहा जा रहा है कि नोटिस को मंजूरी देने में देरी की गई…लेकिन जब विपक्षी सांसद अड़ गए और सदन की कार्यवाही नहीं चलने देने की चेतावनी दी…तब इसे स्वीकार करना पड़ा….जिससे ये संदेश गया कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है…

वहीं इस पूरे मामले ने बीजेपी के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है…पार्टी अपने अध्यक्ष का बचाव कर रही है और इसे विपक्ष की राजनीतिक चाल बता रही है…बीजेपी नेताओं का कहना है कि अध्यक्ष ने हमेशा नियमों के अनुसार ही सदन चलाया है…लेकिन विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है….ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी ओम बिरला को आखिर तक समर्थन देगी या फिर नुकसान से बचने के लिए कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा?….

हालांकि, इसके साथ ही एक और विवाद ने इस मामले को और भी ज्यादा संवेदनशील बना दिया है…लोकसभा अध्यक्ष के चेंबर से कथित तौर पर एक वीडियो लीक होने की खबर ने माहौल को और गरमा दिया है..हालांकि इस पर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है…लेकिन विपक्ष इसे भी मुद्दा बना रहा है…उनका कहना है कि ये पूरे पद की साख से जुड़ा मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए…

यानी अगर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होती है…तो नियमों के अनुसार ओम बिरला खुद अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठ पाएंगे…उस दौरान कोई अन्य सदस्य सदन का संचालन करेगा…उन्हें माइक बंद करने या व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य शक्तियां भी नहीं मिलेंगी…यानी चर्चा पूरी तरह खुली होगी और विपक्ष खुलकर अपने आरोप रख सकेगा…यही वजह है कि ये बहस राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है….

इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि तीखी बहस से बचने के लिए ओम बिरला खुद ही इस्तीफा दे सकते हैं…और अगर ऐसा होता है तो ये भारतीय संसदीय इतिहास में एक बड़ी घटना होगी…हालांकि अभी तक उनकी ओर से इस्तीफे का कोई संकेत नहीं मिला है…वो शांत नजर आ रहे हैं…लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चाएं जारी हैं….

बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होना है…माना जा रहा है कि उसी दौरान अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला हो सकता है…अगर प्रस्ताव पर वोटिंग होती है…तो सरकार की संख्याबल की स्थिति भी चर्चा में आएगी…हालांकि मौजूदा समीकरणों को देखते हुए सरकार के पास बहुमत है…लेकिन राजनीतिक संदेश का महत्व भी कम नहीं है…लेकिन, इस पूरे घटनाक्रम में राहुल गांधी की भूमिका खास तौर पर देखी जा रही है…उनका आक्रामक रुख विपक्ष को ऊर्जा दे रहा है…वो बार-बार ये मुद्दा उठा रहे हैं कि लोकतंत्र में अध्यक्ष की कुर्सी निष्पक्ष होनी चाहिए…अगर राहुल गांधी इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जाते हैं…तो ये सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है…

ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या ये केवल संसदीय प्रक्रिया का मामला है या फिर 2026-27 की राजनीति की बड़ी तस्वीर का हिस्सा?…एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को लोकतंत्र और निष्पक्षता की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है…तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी इसे राजनीतिक नाटक बता रही है……यानी दोनों ही पक्ष अपने-अपने तरीके से जनता को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं…

लेकिन, आखिरकार, सबकी नजर एक ही सवाल पर टिक गई है कि…क्या ओम बिरला इस्तीफा देंगे?…अगर वो पद पर बने रहते हैं और अविश्वास प्रस्ताव का सामना करते हैं…तो ये एक सख्त राजनीतिक लड़ाई होगी…अगर वो पहले ही इस्तीफा दे देते हैं…..तो इसे विपक्ष अपनी जीत बताएगा…..यानी दोनों ही स्थितियों में ये घटना देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है….

ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर की रणनीति और बाहर की बयानबाजी दोनों ही अहम होंगी…कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का आक्रामक तेवर और विपक्ष की एकजुटता क्या सच में समीकरण बदल देगी?….या फिर सरकार अपने संख्याबल के दम पर इस संकट को टाल देगी?

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