राशन कार्ड के लिए मांगे पैसे? महिलाओं ने अधिकारी को कमरे से घसीटा बाहर, बांदा में बवाल
बांदा के नरैनी आपूर्ति कार्यालय में राशन कार्ड में नाम जोड़ने को लेकर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। रिश्वत मांगने के आरोपों के बीच महिलाओं ने आपूर्ति अधिकारी को कमरे से बाहर खींच लिया। मामला नए डीएम के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा जिले की नरैनी तहसील में शनिवार को आपूर्ति कार्यालय उस समय हंगामे का केंद्र बन गया, जब महीनों से राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए भटक रही महिलाओं का सब्र टूट गया। आरोप है कि गरीब परिवारों को बार-बार कार्यालय के चक्कर कटवाए गए, सुनवाई नहीं हुई और ऊपर से कथित अभद्र व्यवहार ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया।
गुस्साई महिलाओं ने आपूर्ति अधिकारी रामदत्त के कक्ष में घुसकर विरोध दर्ज कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मामला इतना बढ़ गया कि महिलाओं ने अधिकारी का कॉलर पकड़कर उन्हें कमरे से बाहर खींच लिया। कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते पूरा मामला चर्चा का विषय बन गया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
राशन कार्ड के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप
महिलाओं का आरोप है कि राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए उनसे पैसों की मांग की जाती है। उनका कहना है कि जो लोग पैसे नहीं देते, उनकी फाइल महीनों तक दबाकर रखी जाती है। स्थानीय महिलाओं के अनुसार-
- राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए बार-बार बुलाया जाता है
- बिना पैसे काम आगे नहीं बढ़ता
- गरीब परिवारों को लगातार परेशान किया जाता है
- कई लोग महीनों से सिर्फ दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं
यह भी चर्चा में है कि यह समस्या केवल नरैनी तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की अन्य तहसीलों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं।
जवाब की जगह नाराजगी
जब इस पूरे मामले पर जिला पूर्ति अधिकारी क्यामुद्दीन अंसारी से सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय नाराजगी जाहिर की। इससे प्रशासन की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें झूठी हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, और यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है।
शिकायत करने वाली महिलाएं ही बनेंगी आरोपी?
सूत्रों के मुताबिक विभाग अब हंगामा करने वाली महिलाओं पर ही मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है। इस संभावना ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है, क्या अपनी समस्या लेकर पहुंची महिलाएं ही अब आरोपी बना दी जाएंगी? यदि ऐसा होता है, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।
नए जिलाधिकारी के सामने पहली बड़ी परीक्षा
हाल ही में जनपद में आए नए जिलाधिकारी के लिए यह मामला पहली बड़ी प्रशासनिक परीक्षा बनकर सामने आया है। राशन व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप और जनता का आक्रोश—तीनों ने मिलकर इस प्रकरण को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं-
- क्या राशन व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाएगी?
- क्या भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
- क्या कार्रवाई केवल विरोध करने वाली महिलाओं तक सीमित रहेगी?
गरीबों का हक फाइलों में दब रहा है?
नरैनी की यह घटना सिर्फ एक कार्यालय का विवाद नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां गरीब अपने हक के लिए भी संघर्ष करता नजर आता है। राशन कार्ड जैसी बुनियादी सुविधा के लिए यदि लोगों को महीनों तक भटकना पड़े, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की गहरी कमजोरी को दिखाता है। सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है, क्या बिना पैसे गरीब का राशन कार्ड बनना मुश्किल हो गया है?
अंतिम सवाल प्रशासन से
नरैनी का यह बवाल केवल एक हंगामा नहीं, बल्कि सिस्टम पर जनता के भरोसे की परीक्षा है। यह नए डीएम के लिए एक तरह की अग्निपरीक्षा है, जहां तय होगा कि जनपद में हक की आवाज सुनी जाएगी या फिर फाइलों के नीचे दबा दी जाएगी। अब प्रशासन के फैसले पर ही निर्भर करेगा कि यह मामला न्याय की मिसाल बनेगा या फिर एक और दबा हुआ सच।
रिपोर्ट – इक़बाल खान
यह भी पढ़ें: “4 बच्चे पैदा करो…” धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर साक्षी महाराज का बड़ा समर्थन, बोले, एक बच्चा संघ को दो



