कुंडली बेमेल बताकर शादी से पीछे हटा युवक, दिल्ली HC की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए भरोसे के बावजूद, कुंडली न मिलने के आधार पर शादी करने से इनकार करना अपराध है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दिल्ली हाईकोर्ट ने IPC की धारा 376 और BNS की धारा 69 के तहत दर्ज रेप केस में आरोपी एक युवक को जमानत देने से इनकार कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए भरोसे के बावजूद, कुंडली न मिलने के आधार पर शादी करने से इनकार करना अपराध है.
शादी का झांसा देकर फिजिकल रिलेशन बनाने के बाद कुंडली बेमेल बताकर दूरी बनाने वाले युवक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्शन लिया है. हाई कोर्ट ने कहा कि शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाना अपराध माना जा सकता है. ऐसा आचरण बीएनएस की धारा 69 के तहत अपराध है. इसके बाद कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी.
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने यह बात 17 फरवरी को IPC की धारा 376 और BNS की धारा 69 के तहत दर्ज रेप केस में आरोपी एक युवक को जमानत देने से इनकार करते हुए कही. शिकायत करने वाली महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी उसके साथ लंबे समय से रिलेशनशिप में था और शादी का बार-बार भरोसा दिलाकर उसने फिजिकल रिलेशन बनाए. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 लागू हो सकती है, जो छलपूर्वक यौन संबंध को दंडनीय बनाती है. यह टिप्पणी न्यायमूर्ति स्वर्णा कांत शर्मा ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए की.
धोखा या शादी का झूठा भरोसा अपराध
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि इस तरह का व्यवहार आदमी के किए गए वादों के नेचर और असलियत पर शक पैदा करता है. कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए भरोसे के बावजूद, कुंडली न मिलने के आधार पर शादी करने से इनकार करना, पहली नजर में आरोप के किए गए वादे के नेचर और असलियत पर सवाल उठाता है. इस स्टेज पर ऐसा व्यवहार BNS के सेक्शन 69 के तहत अपराध माना जाएगा, जो खास तौर पर धोखे या शादी का झूठा भरोसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंधों के मामलों से संबंधित है.
WhatsApp चैट समेत अन्य रिकॉर्ड से अपराध साबित
जस्टिस शर्मा ने कहा कि WhatsApp चैट समेत रिकॉर्ड में मौजूद चीजों से पता चलता है कि आरोपी ने महिला को भरोसा दिलाया था कि उनकी कुंडली मैच कर गई है और उनकी शादी में कोई रुकावट नहीं है. एक मैसेज में, उसने कथित तौर पर कहा, कल ही शादी कर रहे हैं हम, और शादी को जल्द होने वाला बताया. पीड़िता ने यह भी दावा किया कि आरोपी और उसके परिवार की तरफ से शादी का दोबारा भरोसा मिलने के बाद उसने पहले शिकायत वापस ले ली थी. हालांकि, बाद में आरोपी ने कुंडली मैच न होने का हवाला देते हुए उससे शादी करने से मना कर दिया.
सहमति झूठे भरोसे से ली गई
जस्टिस शर्मा ने आरोपी की इस बात को उसकी पिछली बातों से अलग पाया और कि अगर कुंडली मिलाना जरूरी था, तो फिजिकल रिलेशन बनाने से पहले ही इस मामले को सुलझा लेना चाहिए था. कोर्ट ने आगे कहा कि बाद में इस आधार पर शादी से इनकार करना कि पहले इसे सुलझा लिया गया था, यह दिखाता है कि सहमति झूठे भरोसे से ली गई होगी. इसलिए, कोर्ट ने बेल की अर्जी खारिज कर दी.



