यूसुफ पठान का बड़ा यू-टर्न, प्लॉट विवाद में हाईकोर्ट से जताया खेद, वापस ली अपील

प्लॉट विवाद में सांसद यूसुफ पठान ने हाईकोर्ट में खेद जताते हुए अपनी अपील वापस ले ली... आखिर क्या है पूरा मामला... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान से जुड़े जमीन आवंटन विवाद में गुजरात हाईकोर्ट में बड़ा मोड़ आया है.. वडोदरा नगर निगम से जुड़े 978 वर्गमीटर के प्लॉट के मामले में यूसुफ पठान ने हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी.. हालांकि अब उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली है.. यूसुफ पठान की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वह इस मामले में दाखिल अपील वापस लेना चाहते हैं.. सुनवाई के दौरान उनकी ओर से खेद भी प्रकट किया गया.. इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने यूसुफ पठान की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया.. इस घटनाक्रम के बाद जमीन विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है..

यूसुफ पठान की याचिका पर सुनवाई गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल.. और जस्टिस डी.एन. रे की डिवीजन बेंच में होनी थी.. सुनवाई के दौरान पठान की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा कि वे अपनी अपील वापस लेना चाहते हैं.. वकील ने कोर्ट के सामने खेद भी व्यक्त किया.. इसके बाद अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए उसे खारिज कर दिया.. यानी अब यूसुफ पठान की ओर से सिंगल जज के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती देने वाली यह अपील आगे नहीं चलेगी.. वहीं इस फैसले के बाद जमीन को लेकर पठान के सामने स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है.. मामले की अगली दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह संबंधित प्लॉट को लेकर आगे क्या कानूनी या व्यावहारिक कदम उठाते हैं..

इस पूरे विवाद का केंद्र वडोदरा के तांदलजा इलाके में स्थित करीब 978 वर्गमीटर का एक प्लॉट है.. यूसुफ पठान का घर भी इसी इलाके में बताया जाता है.. इस जमीन को लेकर उन्होंने साल 2012 में वडोदरा नगर निगम के सामने आवेदन किया था.. बताया जाता है कि यह प्लॉट शुभम पार्टी प्लॉट के पास स्थित है.. यूसुफ पठान की ओर से इस जमीन का मालिकाना हक हासिल करने के लिए आवेदन किया गया था.. उस समय वडोदरा नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी ने मार्केट रेट पर जमीन देने का प्रस्ताव रखा था.. इसके बाद यह प्रस्ताव नगर निगम की आम सभा यानी जनरल बॉडी के सामने गया.. आम सभा से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया था..

हालांकि, जमीन के इस प्रस्ताव को राज्य सरकार की ओर से अंतिम मंजूरी नहीं मिली.. साल 2024 में राज्य सरकार ने यूसुफ पठान से संबंधित जमीन के आवेदन को खारिज कर दिया.. इसके बाद मामला कानूनी विवाद में बदल गया.. यूसुफ पठान ने जमीन को लेकर अपने दावे के पक्ष में अदालत का रुख किया.. वहीं, वडोदरा नगर निगम ने उनके दावे का विरोध किया.. नगर निगम की ओर से अदालत में कहा गया कि किसी व्यक्ति का अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी होना अपने आप में उसे सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति हासिल करने का अधिकार नहीं देता.. नगर निगम ने यह भी दलील दी कि जमीन के आवंटन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है.. और केवल किसी प्रस्ताव के आधार पर जमीन पर अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता..

वडोदरा नगर निगम ने अदालत के सामने यह भी कहा था कि यूसुफ पठान ने इस जमीन के लिए एक रुपया भी भुगतान नहीं किया है.. इसके साथ ही नगर निगम का आरोप था कि जमीन का कब्जा भी खाली नहीं किया गया.. यानी विवाद केवल जमीन के आवंटन तक सीमित नहीं रहा.. बल्कि प्लॉट पर कब्जे को लेकर भी सवाल उठे.. इसी मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने यूसुफ पठान के कब्जे को लेकर सख्त टिप्पणी की थी.. अदालत ने सवाल उठाया था कि जब जमीन का विधिवत आवंटन ही नहीं हुआ.. तो फिर उस पर कब्जा किस आधार पर किया गया.. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जमीन देने का प्रस्ताव केवल नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी की ओर से रखा गया था.. और यह अपने आप में जमीन का वैध आवंटन नहीं माना जा सकता..

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