कानून व्यवस्था फेल? बदमाश बेखौफ, सरकार पर विपक्ष का हमला

राजधानी लखनऊ की सड़कों पर एक बार फिर खून बहा। एक बार फिर योगी सरकार पर सवाल उठा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में लोगों का घर से निकलना मुश्किल होता जा रहा है। एक तरफ सूबे की सरकार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर हकीकत क्या है ये आप सब बखूबी जानते हैं।

यहां जरा-जरा सी बात पर गोलियां चलती हैं लेकिन मजाल है कि सरकार और प्रसाशन चूं करें। राजधानी लखनऊ की सड़कों पर एक बार फिर खून बहा। एक बार फिर योगी सरकार पर सवाल उठा है।

दरअसल भाजपा युवा मोर्चा के नेता श्याम चेतन तिवारी पर उनके ही इलाके मेहंदीगंज में सरेआम गोली चलाई गई। हमलावर पैदल आया और ताबड़तोड़ फायरिंग की। चेतन गंभीर रूप से घायल हैं और उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। साफ़ तौर पर कहीं तो यह घटना योगी आदित्यनाथ की सरकार में कानून व्यवस्था की बदहाली को साफ दिखाती है।

बीते 9 मई की रात की यह वारदात लखनऊ के बाजार खाला इलाके में हुई। चेतन तिवारी अपने घर के बाहर बैठे थे। अचानक एक व्यक्ति आया और उनके ऊपर गोलियां चलानी शुरू कर दी।

दो गोलियां चेतन को लगीं और वे घायल होकर गिर पड़े। लोग इकट्ठा हुए तो हमलावर भाग निकला। यह सब CCTV में कैद हो गया, जो अब वायरल हो रहा है। पुलिस ने बाद में वैभव बाजपेयी नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो खुद भाजयुमो से जुड़ा बताया जा रहा है।

हालांकि जब घायल चेतन को KGMU के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया तो उनके समर्थकों की भीड़ इकठ्ठा हो गई और जमकर बवाल हुआ। यहां तक कि अस्पताल में हंगामा मच गया। लोग नारेबाजी करने लगे। वे पूछ रहे थे कि इतनी बड़ी घटना राजधानी में कैसे हो सकती है? क्या होगी सर्कार सोइ हुई है ? जहां हर तरफ पुलिस और सुरक्षा के दावे किए जाते हैं, वहां भाजपा का अपना नेता सुरक्षित नहीं है।

यह सवाल योगी सरकार के पूरे दावों पर सवाल उठाता है। यह घटना कोई पहली नहीं है। योगी सरकार के कई साल बीत गए, लेकिन अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा। लखनऊ जैसी राजधानी में दिन-रात गोलीबारी, हत्याएं और दबंगई आम हो गई है। भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को भी सुरक्षा नहीं दे पा रही। जब सत्ताधारी पार्टी के अपने लोग असुरक्षित हैं, तो आम आदमी का क्या हाल होगा?

योगी आदित्यनाथ लगातार कहते हैं कि यूपी में कानून का राज है। लेकिन हकीकत कुछ और है। लखनऊ में भाजपा नेता पर हमला होनासाफ़ तौर पर दिखाता है कि अपराधी कितने बेलगाम हो गए हैं। हमलावर पैदल आया, फायरिंग की और भाग गया। पुलिस को CCTV देखकर आरोपी पकड़ना पड़ा। अगर CCTV न होता तो क्या होता?

क्या अपराधी बच जाता? सरकार को पहले से ही ऐसी रंजिशों पर नजर रखनी चाहिए थी। भाजपा सरकार में युवा मोर्चा के कार्यकर्ता खुद एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। पार्टी के अंदर गुटबाजी और पुरानी दुश्मनी इतनी बढ़ गई है कि गोली चलने लगी। कहीं न कहीं यह भाजपा की आंतरिक कमजोरी को दिखाता है। जब पार्टी अपने लोगों को संभाल नहीं सकती, तो पूरे प्रदेश को कैसे संभालेगी?

ऐसी घटनाओं से आम लोगों में डर बढ़ता है। अगर राजधानी में भाजपा नेता सुरक्षित नहीं, तो छोटे दुकानदार, छात्र या महिलाएं कैसे सुरक्षित महसूस करें? योगी सरकार विकास और कानून व्यवस्था का ढोल पीटती है, लेकिन हकीकत में अपराध बढ़ रहे हैं।

पुलिस व्यस्त रहती है VIP सुरक्षा में, आम आदमी की सुरक्षा भूल जाती है। समर्थकों का अस्पताल में हंगामा भी सरकार की नाकामी का नतीजा है। लोग भरोसा खो चुके हैं। वे जानते हैं कि बिना दबाव के पुलिस कार्रवाई नहीं करती।

चेतन तिवारी की हालत गंभीर है। अगर कुछ गलत हुआ तो सरकार जिम्मेदार होगी। दोस्तों भाजपा और योगी सरकार पर सवाल उठना लाजमी है। भाजपाई कहते हैं कि उत्तर प्रदेश बदला है, लेकिन बदला सिर्फ नाम का है। अपराधी आज भी घूम रहे हैं।

भाजयुमो नेता पर हमला सरकार की छवि को धूमिल करता है। यह दिखाता है कि व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। योगी को चाहिए कि वो अपनी गिरहबान में झांक कर देखें और खुद इस मामले की निगरानी करें। सिर्फ बयानबाजी नहीं, असली कार्रवाई हो। लेकिन अक्सर देखा गया है कि ऐसे मामलों में बात दबा दी जाती है।

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