गृहिणियों के सम्मान में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बात, कहा- ये असली राष्ट्र निर्माता हैं

घर में काम करने वाली महिलाओं को हीन नजरिए से देखना और उनकी भागीदारी को न मानने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: घर में काम करने वाली महिलाओं को हीन नजरिए से देखना और उनकी भागीदारी को न मानने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्नी के लिए होममेकर के बजाय राष्ट्र निर्माता शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि घर के लिए उनके काम बहुत ही मूल्यवान हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने घर में काम करने वाली महिलाओं के प्रति सम्मानित नजरिए को बढ़ावा देने के लिए कहा कि अब उनके लिए होममेकर के बजाय राष्ट्र निर्माता शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.कोर्ट ने कहा कि परिवार में उनके बहुत बड़े योगदान के कारण पत्नियों के लिए यही शब्द इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में घरेलू आय के नुकसान को लेकर कुछ अहम निर्देश जारी किए हैं. जस्टिस संजय करोल ने कहा कि हमारा भी यही मानना ​​है कि घर संभालने वाली हाउस वाइफ इंसान और देश के विकास में योगदान देती है.

कोर्ट ने कहा कि आप उस योगदान को पैसे के रूप में कैसे आंकेंगे? हमने कुछ सिद्धांत तय किए हैं और एक ‘राष्ट्र-निर्माता’ के तौर पर है. कोर्ट ने कहा कि इसके साथ ही घरेलू देखभाल से जुड़ी मासिक आय के नुकसान की रकम ₹30 हजार प्रति माह तय की है. यानि कोर्ट का कहना है कि घरेलू महिला जो घर संभालती है, उसका काम (खाना बनाना, बच्चों की देखभाल, परिवार की जिम्मेदारी आदि) बहुत मूल्यवान है. भले ही वह बाहर से पैसा न कमाती हो, उसका योगदान ₹30,000 प्रति महीने के बराबर माना जाएगा.

भरोसा है, सभी उन्हें राष्ट्र निर्माता कहेंगे’

कोर्ट ने कहा कि हमने ‘प्रणय सेठी’ मामले के बाद एक नया सिद्धांत भी बनाया है और यह उस मामले में तय की गई बातों के अलावा है. हमने कुछ निर्देश जारी किए हैं और हमें उम्मीद और भरोसा है कि सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस इन सभी मामलों पर नज़र रखेंगे और एक्ट की धारा 169 के तहत तय की गई प्रक्रिया, यानी एक ‘समरी प्रोसीजर’ (संक्षिप्त प्रक्रिया) का पूरी तरह से और सही भावना के साथ पालन किया जाएगा.

जस्टिस संजय करोल ने आगे कहा कि ‘प्रणय सेठी’ मामले में तय की गई बातों के अलावा घरेलू देखभाल का नुकसान एक अतिरिक्त आधार होगा. कोर्ट ने कहा कि हम बस यही उम्मीद और भरोसा करते हैं कि घर संभालने वाली महिला को अब ‘राष्ट्र-निर्माता’ कहा जाएगा.

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