बांदा: एक्सप्रेस-वे पुल के नीचे बालू माफियाओं का खेल? ग्रामीणों के आरोपों से मचा हड़कंप

बांदा में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के पुल के पास कथित अवैध बालू खनन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन से पुल की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे को प्रदेश की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में गिना जाता है, लेकिन अब इसी एक्सप्रेस-वे के एक पुल के नीचे कथित अवैध खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बांदा जिले में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुल के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में बालू का अवैध खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी नियमों की अनदेखी हो रही है बल्कि पुल की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कृषि विश्वविद्यालय चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके में दिन-रात ट्रैक्टरों और मशीनों की मदद से बालू निकाली जा रही है। आरोप है कि यह गतिविधियां पुल से बेहद कम दूरी पर संचालित हो रही हैं, जबकि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में खनन को लेकर स्पष्ट नियम निर्धारित हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्रवाई की उठाई मांग

ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार शिकायतों के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया है। लोगों का आरोप है कि नदी क्षेत्र में लगातार हो रही बालू निकासी से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही पुल के आसपास की जमीन और संरचना पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय निवासियों ने जिलाधिकारी, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन से तत्काल जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पुल की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

जानकारों का मानना है कि पुलों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं के आसपास अनियंत्रित खनन लंबे समय में जोखिम पैदा कर सकता है। यदि नदी के प्रवाह और तल की प्राकृतिक स्थिति में बड़े स्तर पर बदलाव होता है तो इसका प्रभाव पुल के आधार क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। हालांकि इस मामले में तकनीकी स्थिति और वास्तविक खतरे का आकलन संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल स्थानीय लोगों की ओर से उठाए गए सवालों ने प्रशासनिक एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में कथित रूप से चल रही इस गतिविधि की जानकारी संबंधित विभागों को होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। यही कारण है कि अब प्रशासनिक निगरानी और खनन नियंत्रण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में किसी बड़ी समस्या या दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अवैध खनन में शामिल लोगों की पहचान की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायतों के बाद संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

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