बंगाल में अब सड़कों पर नमाज नहीं, अजान की तेज आवाज बंद, CM शुभेंदु का बड़ा फैसला

देश के दूसरे राष्ट्रपति रहे प्रसिद्ध विद्वान सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा है कि शासन का उद्देश्य केवल सत्ता चलाना नहीं बल्कि समाज में नैतिकता और न्याय स्थापित करना है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अपने फैसलों से समाज में समानता और न्याय की स्थापना कर रहे हैं। सीएम ने आम नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए नया आदेश जारी किया है। आदेश में कहा है कि पुलिस धार्मिक स्थलों पर लाउडस्कर की आवास को नियंत्रित करें। यानी किसी भी धार्मिक स्थल पर तय लिमिट से ऊंची आवाज में लाउडस्कर नहीं बजाया जाए। यह फैसला धार्मिक स्थलों के आसपास रहने वाले सामान्य नागरिकों को रोजाना होने वाली शोरगुल की परेशानी से बचाएगा। दूसरा आदेश है सड़कों पर होने वाली धार्मिक गतिविधियों को रोकने का। इस परेशानी के भुक्त भोगी सिर्फ पश्चिम बंगाल के लोग नहीं है। सभी हैं। आए दिन धार्मिक कार्यक्रमों के नाम पर सड़कें घेर ली जाती हैं। ट्रैफिक रोक दिए जाते हैं। आम आदमी घंटों जाम में फंसा रहता है। सीएम ने अपने आदेश में किसी खास वर्ग या धर्म को रेखांकित नहीं किया है।
आदेश में सनातन की समानता पर भाव है। किसी धार्मिक वर्ग को टारगेट करने का भाव नहीं है। जो भी ऊंची आवाज में धर्म स्थलों पर लाउडस्कर बजाएगा। जो भी धार्मिक कार्यक्रम के नाम पर रास्ता रोकेगा उसके खिलाफ कारवाई होगी। यही सत्ता का सनातन मॉडल है जो सभी नागरिकों को समान दृष्टि से देखता है। बीआर अंबेडकर ने कहा है कि न्याय हमेशा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आधार पर ही कायम रह सकता है। शुभेंदु सरकार ने अपने फैसले में न्याय का पालन किया। शोर से आम आदमी को परेशान करने वाले हर लाउडस्कर पर एक्शन होगा। धार्मिक कार्यक्रम के नाम पर सड़क रोकने वालों पर कारवाई होगी। हालांकि दुर्गा पूजा, ईद या अन्य समुदाय के बड़े त्यौहारों के दौरान होने वाले आयोजनों के लिए अलग नियम बनाए जाएंगे। धार्मिक कार्यक्रम के नाम पर जाम लगाने वाले हमें कितनी आर्थिक चोट पहुंचाते हैं इसका एक छोटा सा आंकड़ा जानकर आप हैरान रह जाएंगे। पश्चिम बंगाल में एक साल में 150 घंटे 150 घंटे आदमी जाम में फंसता है। इसकी बड़ी वजह धार्मिक आयोजन और राजनीतिक रैलियां होती हैं। जाम से पश्चिम बंगाल के लोगों को सालाना करीब 50 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है। यह सिर्फ पश्चिम बंगाल की बात कर रहे हैं। धर्म स्थलों पर लाउडस्कर और सड़कों पर धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर तीखा मतभेद रहा है।
एक वर्ग विशेष आरोप लगाता है कि ऐसे आदेशों के जरिए खासतौर पर उन्हें टारगेट किया जाता है। पश्चिम बंगाल में तो तुष्टीरण नीति के तहत इन्हें सड़क जाम करने और ऊंची आवाज में लाउडस्कर बजाने की खुली आजादी थी। यह तथ्य है कि शुभेंदु सरकार ने अपने आदेश में किसी धर्म या वर्ग को रेखांकित नहीं किया। लेकिन तुष्टीकरण वाली पॉलिसी का सुविधा भोगी। यह वर्ग इस आदेश से आक्रोशित है। जहां तक सवाल है 10 से 15 मिनट यही ना वक्त लगता है। ये लोग तो अपना जुलूस लेके जाते हैं तो तीन-ती घंटा रास्ते में जाम रहता है। उसके लिए कोई मतलब ये नहीं है। सबका साथ सबका विकास। तो आप ऐसा अगर आप रवैया अपनाइएगा तो ये तो ठीक नहीं है।



