यूपी की कमान तावड़े के हाथ, महाराष्ट्र में लग चुका है नोट बांटने का आरोप

विरार के होटल में घेराव, चुनाव अधिकारियों ने बरामद की थी लाखों की नकदी

पुलिस ने दर्ज की थी एफआईआर तावड़े ने आरोपों से किया था इनकार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर बड़ा दांव खेलते हुए विनोद तावड़े को प्रदेश का प्रभारी बनाया है। संगठन और चुनावी रणनीति के लंबे अनुभव वाले तावड़े अब देश के सबसे बड़े चुनावी राज्य में बीजेपी की रणनीति संभालेंगे।
लेकिन यूपी की इस नई जिम्मेदारी के साथ उनके राजनीतिक सफर का एक ऐसा विवाद भी फिर चर्चा में है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता मामला महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 का है। 19 नवंबर 2024 को मतदान से ठीक एक दिन पहले तावड़े उस समय विवादों में घिर गए थे जब बहुजन विकास आघाड़ी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें विरार के एक होटल में घेर लिया। आरोप लगाया गया कि होटल में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए नकदी बांटी जा रही थी। तावड़े ने आरोपों को खारिज किया और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

चुनाव अधिकारियों ने बरामद किये थे 10 लाख रुपये

मामला सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। होटल के कमरों से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। अलग अलग रिपोर्टों में जब्त रकम की राशि 9.53 लाख से 9.93 लाख के बीच बताई गई है। साथ ही प्रचार सामग्री और अन्य सामान भी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की थी। यानी आरोप महज राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहे। चुनाव अधिकारियों की कार्रवाई नकदी की बरामदगी और एफआईआर तीनों इस विवाद का हिस्सा बने।

राजनीतिक सवाल बड़ा है

जिस नेता को अब उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में बीजेपी की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों की जिम्मेदारी मिली है उसके अतीत का यह विवाद स्वाभाविक रूप से विपक्ष के निशाने पर है। खासकर तब जब उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है और चुनावी राजनीति में पैसा संगठन और बूथ मैनेजमेंट जैसे मुद्दे हमेशा संवेदनशील रहे हैं। यानी बीजेनी ने जिस नेता को यूपी भेजा है उसके पास लंबा संगठनात्मक अनुभव है लेकिन उसके साथ 2024 का महाराष्ट्र का कैश विवाद भी राजनीतिक फाइल में दर्ज है। अब सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में तावड़े की नई पारी किस तरह आगे बढ़ती है। महाराष्ट्र में नोटों के आरोप से घिरे तावड़े अब उस उत्तर प्रदेश की चुनावी चौकी पर खड़े हैं जहां 2027 की लड़ाई में हर कदम पर विपक्ष की नजर होगी।

करोड़ों पानी में बहे, सफाई व्यवस्था फिर भी बदहाल

लखनऊ स्वच्छता अभियान कंपनी पर गंभीर सवाल
सेकेंड्री कूड़े को प्राइमरी बताकर अधिक भुगतान कराने के आरोप

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क/मो. शारिक
लखनऊ। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम और निजी कंपनी लखनऊ स्वच्छता अभियान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कंपनी द्वारा सेकेंड्री कूड़े के उठान से लेकर प्राइमरी कूड़े के नाम पर किए जा रहे कार्यों में ऐसी व्यवस्था अपनाई जा रही है, जिससे नगर निगम से करोड़ों रुपये का भुगतान कराया जा रहा है, जबकि कई इलाकों में जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि सेकेंड्री कूड़ा उठाने के लिए करीब 500 रुपये प्रति टन, जबकि प्राइमरी कूड़े से संबंधित कार्य के लिए करीब 3000 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान का प्रावधान है। ऐसे में कूड़े की वास्तविक मात्रा, उसके स्रोत और उसे किस श्रेणी में दर्ज किया गया, इसका सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। खरगापुर-सरसवां वार्ड में करीब 18 से 20 हजार हाउसहोल्ड बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इस पूरे क्षेत्र में महज 15 वाहनों से कूड़ा उठान किया जा रहा है। एक वाहन से करीब 250 से 300 घरों से कूड़ा उठाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल है कि इतने बड़े क्षेत्र के सभी घरों से नियमित कूड़ा उठाने का काम महज 15 वाहनों से किस प्रकार पूरा किया जा रहा है। नगर निगम यदि कंपनी को भुगतान कर रहा है तो प्रत्येक वाहन के जीपीएस रिकॉर्ड, प्रतिदिन के चक्कर, कूड़़ेे की वास्तविक मात्रा और हाउसहोल्ड कवरेज का मिलान कराया जाना चाहिए। मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि सेकेंड्री कूड़़ेे को प्राइमरी कूड़े में बदलकर अधिक दर पर भुगतान कराने का खेल चल रहा है। आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जांच का विषय होगा कि एक ही कूड़़ेे को अलग-अलग श्रेणियों में दिखाकर नगर निगम से अधिक भुगतान तो नहीं कराया जा रहा। प्राइमरी और सेकेंड्री कूड़़ेे की भुगतान दरों में अंतर होने के कारण कूड़े की श्रेणी, वजन पर्ची, वाहन रिकॉर्ड और बिलों का आपस में मिलान बेहद जरूरी है।

रोड स्वीपिंग में भी खेल के आरोप

सफाई व्यवस्था के तहत मुख्य मार्गों की रोड स्वीपिंग के लिए भी वाहन और मशीनरी लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन मुख्य मार्गों की वास्तविक स्थिति देखकर व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रोड स्वीपिंग का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है तो मुख्य मार्गों पर गंदगी और धूल की स्थिति क्यों बनी हुई है। आखिर जिन सडक़ों की सफाई के लिए भुगतान किया जा रहा है, वहां जमीनी स्तर पर उसका असर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है?

काम कम, भुगतान ज्यादा होने का आरोप

कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि कई स्थानों पर काम अपेक्षित स्तर पर नहीं होने के बावजूद भुगतान किया जा रहा है। वहीं नगर निगम द्वारा कंपनी पर जुर्माना लगाए जाने की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि एक तरफ कंपनी को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, दूसरी तरफ जुर्माना लगाकर कार्रवाई की औपचारिकता पूरी की जा रही है। ऐसे में सवाल है कि यदि कंपनी के काम में लगातार कमियां मिल रही हैं तो भुगतान की प्रक्रिया पर प्रभावी रोक या कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

नगर निगम के खजाने पर असर

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम के खजाने से होने वाले भुगतान को लेकर है। कंपनी द्वारा निर्धारित कार्य और वास्तविक कार्य में अंतर है, या कूड़े की श्रेणी बदलकर भुगतान का दावा किया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। 15 वाहनों से वास्तव में कितना कूड़ा उठाया गया, कितने टन कूड़़ेे का वजन हुआ, कितना कूड़ा सेकेंड्री था और कितना प्राइमरी के रूप में दर्ज किया गया—इन सभी आंकड़ों का मिलान होने पर ही भुगतान की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

भरवारा वार्ड में भी उठे ऐसे ही सवाल

बताया जा रहा है कि भरवारा वार्ड में भी इसी तरह कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वहां भी सेकेंड्री कूड़े को प्राइमरी कूड़े में परिवर्तित कर नगर निगम से भुगतान कराया जा रहा है। खरगापुर-सरसवां और भरवारा दोनों क्षेत्रों में ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं तो नगर निगम को कंपनी के पिछले भुगतान की विस्तृत जांच करानी चाहिए।

नगर आयुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग

मामले में मांग उठ रही है कि खरगापुर-सरसवां और भरवारा वार्ड में कंपनी द्वारा किए जा रहे कार्यों तथा पिछले भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही कंपनी के वाहनों के जीपीएस रिकॉर्ड, हाउसहोल्ड कवरेज, वजन पर्चियां, कूड़े की श्रेणी, रोड स्वीपिंग का रिकॉर्ड, बिल और अधिकारियों की सत्यापन रिपोर्ट की जांच की जाए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित कंपनी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

पॉश हास्पिटल हेल्थ सिटी का काला कारनामा

परेशानी थी बाएं पैर में सर्जरी कर दी दाएं पैर की
70,400 रुपये रु पये हास्पिटल ने वसूले गलती समाने आने के बाद महिला का किया गया उत्पीडऩ
कर डाला महिला के गलत पैर का आपरेशन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिस पैर का दर्द था उसका इलाज करने गए थे लेकिन डॉक्टरों ने दूसरा पैर ही काट छांट डाला। लखनऊ के हेल्थ सिटी अस्पताल पर महिला का गंभीर आरोप 70,400 रुपये वसूले, ऑपरेशन से पहले बताने के बावजूद गलत पैर में कर दी सर्जरी।
अस्पताल मरीज के लिए वह जगह होती है जहां वह अपना शरीर अपना भरोसा और कई बार अपनी पूरी जिंदगी डॉक्टरों के हाथ में सौंप देता है। लेकिन अगर उसी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में मरीज जिस पैर का इलाज कराने पहुंचा हो उसके बजाय दूसरे पैर का ऑपरेशन कर दिया जाए तो सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं रह जाता सवाल उस भरोसे का हो जाता है जिसके सहारे मरीज अस्पताल की चौखट पार करता है। लखनऊ के हेल्थ सिटी अस्पताल को लेकर सामने आयी एक महिला की शिकायत ने इसी भरोसे को झकझोर दिया है। महिला का आरोप है कि वह बाएं पैर का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थी लेकिन ऑपरेशन के दौरान उसके दाहिने पैर की सर्जरी कर दी गई। महिला के मुताबिक अस्पताल में इलाज के नाम पर उससे 70 हजार 400 रुपये वसूले गए। सबसे चौंकाने वाली बात महिला के बयान का वह हिस्सा है जिसमें उसका कहना है कि ऑपरेशन थिएटर ले जाने से पहले ही उसने डॉक्टर को बता दिया था कि समस्या बाएं पैर में है। इसके बावजूद वही पैर ऑपरेशन के लिए चुना गया जिसमें उसे समस्या ही नहीं थी। उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। ऑपरेशन शुरू हुआ। लेकिन जब वह होश में आई तो उसे पता चला कि जिस पैर में समस्या नहीं थी उसी पैर में ऑपरेशन कर दिया गया है। महिला ने इसके बाद अस्पताल में हंगामा किया। उसका आरोप है कि जब उसने डॉक्टर से सवाल किया तो डॉक्टर ने उसके साथ बदसलूकी की। मामला सिर्फ अस्पताल की चारदीवारी के भीतर का नहीं है। पूरा मामला एक महिला के शरीर का है। एक ऐसा पैर है जिसका इलाज होना था एक दूसरा पैर है जिस पर अनावश्यक सर्जरी कर दी गयी और एक परिवार है जो इलाज के लिए अस्पताल गया था। महिला के मुताबिक उसने इलाज के लिए 70,400 रुपये दिए। यानी मरीज ने सिर्फ दर्द और बीमारी नहीं सौंपी थी उसने अपने पैसे और भरोसे के साथ खुद को डॉक्टरों के हवाले किया था। अब सबसे बड़ा सवाल है कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

मोहाली में ईडी की रेड पर आग बबूला हुई आप

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मोहाली। मोहाली में गमाडा कार्यालय में लगातार तीसरे दिन चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वीरवार को जमकर हंगामा किया। बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ता गमाडा कार्यालय के बाहर पहुंचे और ईडी की कार्रवाई के विरोध में रोष प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और गमाडा परिसर में दाखिल हो गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की भी हुई।आप कार्यकर्ताओं ने गमाडा कार्यालय के अंदर पहुंचकर ईडी टीम तक जाने की कोशिश की, लेकिन वहां तैनात सीआरपीएफ जवानों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी और आक्रामक हो गए। आरोप है कि कुछ कार्यकर्ताओं ने गमाडा कार्यालय की खिड़कियों पर पत्थर मारे, जिससे कई शीशे टूट गए।

राहुल गांधी ने साहिल वाकोडे के माता-पिता से की बात

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आईआईटी बॉम्बे के दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता से बात की और उन्हें अपने बेटे के लिए न्याय की लड़ाई में हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने रवींद्र और सोनाली वाकोडे से तब वीडियो कॉल पर बात की जब वे वाशिम जिले से मुंबई जा रहे थे। लगभग 17 मिनट की इस बातचीत के दौरान राहुल ने दंपति से कहा कि वह उनके साथ हैं और उन्हें हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया। कॉल के दौरान साहिल के माता-पिता के साथ इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब और महाराष्ट्र यूनिट के प्रमुख शिवराज मोरे भी मौजूद थे। यह बातचीत साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच की बढ़ती मांगों और विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है। उनके माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को आईआईटी बॉम्बे में जाति-आधारित भेदभाव और मानसिक उत्पीडऩ का सामना करना पड़ा था और उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आईआईटी बॉम्बे में बीटेक के छात्र साहिल का शव 18 सितंबर की शाम को उसके हॉस्टल के कमरे में लटका हुआ मिला। उस पर मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने का आरोप है। परीक्षा के दौरान हुई यह घटना मामले का मुख्य केंद्र बन गई, क्योंकि एक प्रोफेसर ने साहिल को कथित तौर पर रोका और परीक्षा हॉल से बाहर ले गए। बुधवार को कुछ टीवी चैनलों पर दिखाए गए हॉल के सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर प्रोफेसर के पास आने और उन्हें बाहर ले जाने से पहले साहिल की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मौत की जांच कर रही है।

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