राहुल गांधी पर FIR होते ही भड़क उठे संजय राउत, मोदी-भागवत को जमकर लताड़ा
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक पहुंच गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में विपक्ष को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है। भाजपाइयों को सच हजम नहीं हो रहा है। जनता की बातें जो करता है या देश में फैली कुरीतियों को जो उजागर करता है उन्हें ये भाजपाई चुप करवाने में लग जाते हैं।
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक पहुंच गया है। हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने धार्मिक अनुष्ठान को जातिवादी रंग देकर वाल्मीकि और अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई।
विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को हुई, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। इसके कुछ दिन बाद 11 अगस्त को इसी मैदान में कुछ लोगों ने कथित तौर पर हवन-यज्ञ और ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम किया।
कार्यक्रम में गंगाजल का छिड़काव भी किया गया। कांग्रेस ने इसे खड़गे की दलित पहचान से जोड़ते हुए बीजेपी और आरएसएस की कथित मानसिकता पर सवाल उठाए। वहीं बीजेपी की ओर से कहा गया कि रैली के बाद मैदान में गंदगी थी और धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे, इसलिए वहां धार्मिक अनुष्ठान किया गया। आपत्तिजनक नारों को समुदाय विशेष से जोड़ा गया।
खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बयान में समुदाय विशेष का जिक्र किया है। धामी का बयान राहुल गांधी की मांग के बाद आया था। राहुल गांधी ने शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। लेकिन धामी ने इसे दूसरा रूप दिया। धामी के बयान के बाद दलित संगठन और उसके वाल्मीकि नेता सामने आए और उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर कराई।
खैर इस FIR के होते ही देश में सियासी बवाल मच गया। नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया सामने आने लगी। ऐसे में इसी बीच शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने भी बड़ा बयान दिया। संजय राउत ने इस मामले में सीधे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व से सवाल किए हैं. संजय राउत ने राहुल गांधी के खिलाफ हुई FIR की आलोचना की है.
उन्होंने सवाल उठाया है कि राहुल गांधी ने आखिर ऐसा किया ही क्या है? इतना ही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद किए गए ‘शुद्धिकरण’ को उन्होंने ‘जातिवादी मानसिकता’ और ‘पाखंड’ बताया. इतना ही नहीं, संजय राउत ने RSS नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि मोहन भागवत विदेश में, खासकर अमेरिका में राष्ट्रीय एकता की बात करते हैं, जबकि उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनके स्थानीय समर्थक ‘शुद्धिकरण’ जैसे कृत्य कर रहे हैं. यह कैसा विरोधाभास है?
यूबीटी सांसद ने RSS प्रमुख मोहन भागवमत से मांग की कि वे इस तरह के ‘शुद्धिकरण’ के कृत्यों पर अपना स्पष्ट रुख बताएं. वहीं, राउत ने कहा कि धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाले सत्ता खोने की कगार पर हैं.राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत अमित कुमार ने दर्ज कराई। वह जवाहर नगर निवासी और श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े बताए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने कहा कि वह कथित ‘अनुष्ठान और सफाई अभियान’ के दौरान मौके पर मौजूद थे। अमित कुमार ने आरोप लगाया कि 29 अगस्त को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को ‘छुआछूत’ और ‘दलित विरोध’ से जोड़कर पेश किया, जिससे वाल्मीकि समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
FIR होने के बाद कांग्रेस नेता भी आगबबूला नजर आ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि “ये देश में नफरत फैला रहे हैं। मल्लिकार्जुन खरगे के कदम रखने से आपको वहां अशुद्धि दिख रही थी इसलिए आपने शुद्धिकरण किया। मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने साथ हुए व्यवहार के बारे में संसद में बताया। जे.पी. नड्डा ने माफी भी मांगी लेकिन FIR नहीं कराई…राहुल गांधी के खिलाफ किस बात पर FIR करा दी?
इस मामले के बाद से भाजपा-RSS सवालों के घेरे में है। भले ही आरएसएस की विचारधारा में हिंदू समाज की एकता की बात होती है। लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह एकता ऊपरी स्तर पर है। जाति व्यवस्था की जड़ें गहरी हैं और कई संगठनों में यह दिखती है। भागवत कई बार आरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर बयान देते हैं जो विवादित हो जाते हैं।
हल्द्वानी जैसी घटनाओं पर चुप्पी से लगता है कि संघ अपने सहयोगी संगठनों को नियंत्रण में नहीं रख पा रहा या रखना नहीं चाहता। बीजेपी सत्ता में है इसलिए उसे और जिम्मेदारी लेनी चाहिए। लेकिन पार्टी दूरी बनाकर बचने की कोशिश करती है।इस पूरे प्रकरण से साफ है कि राजनीतिक दल जाति और धर्म के मुद्दों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं। लेकिन आम आदमी के लिए यह सामाजिक सद्भाव का सवाल है। शुद्धिकरण अगर सफाई के लिए था तो क्यों जाति का रंग चढ़ा।
अगर जाति का नहीं था तो क्यों विवाद इतना बढ़ा। बीजेपी और आरएसएस को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। संजय राउत ने सही कहा कि विदेश में एकता की बात करना आसान है लेकिन अपने देश में भेदभाव रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। चुप्पी रखना या दूरी बनाना समस्या का समाधान नहीं। समाज को आगे बढ़ाने के लिए पुरानी मानसिकता छोड़नी होगी। हल्द्वानी विवाद इसी सोच को चुनौती दे रहा है और बीजेपी आरएसएस को कठघरे में खड़ा कर रहा है।



