गोरखपुर में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट, तीन अस्पतालों में 58 बेड तैयार; जानें पूरी तैयारी

गोरखपुर में स्वाइन फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए तीन अस्पतालों में 58 बेड तैयार किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में अभी कोई मरीज नहीं है।

गोरखपुर में स्वाइन फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती तैयारियां तेज कर दी हैं। शासन के निर्देश के बाद जिला अस्पताल, एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अलग वार्ड तैयार किए गए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी जिले में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज नहीं है। इसके बावजूद संदिग्ध मामलों की निगरानी और इलाज के लिए व्यवस्था मजबूत की गई है।

जिला अस्पताल, एम्स और बीआरडी में अलग वार्ड

तीनों प्रमुख अस्पतालों में कुल 58 बेड आरक्षित किए गए हैं। जिला अस्पताल में 14, एम्स में 24 और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 20 बेड का वार्ड तैयार किया गया है। एम्स और मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा भी उपलब्ध है।

सीएमओ राजेश झा के मुताबिक, पोर्टल पर गोरखपुर से जुड़े दो मरीज दर्ज हैं, लेकिन दोनों लखनऊ के निवासी हैं और उनकी हालत सामान्य है। जिले में अभी तक स्वाइन फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है।

वेंटिलेटर से दवाओं तक पूरी तैयारी

जिला अस्पताल के वार्ड में दवाओं, मास्क, सैनिटाइजर और सुरक्षा किट की व्यवस्था की गई है। गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर और पर्याप्त ऑक्सीजन सिलेंडर भी उपलब्ध कराए गए हैं। लाइफ सेविंग दवाओं का स्टॉक रखा गया है और चिकित्सकीय व नर्सिंग स्टाफ को संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षा किट इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

एसआईसी डॉ. आरडी रमन ने लोगों से बिना चिकित्सकीय सलाह दवा या एंटीबायोटिक न लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बुखार दो-तीन दिन में ठीक न हो या सांस लेने में परेशानी हो तो डॉक्टर से संपर्क कर जांच करानी चाहिए।

भीड़ से बचें, लक्षण दिखें तो कराएं जांच

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी है। खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकने और हाथों को साबुन-पानी से साफ रखने पर भी जोर दिया गया है।

सीएचसी और पीएचसी स्तर तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैयार रखी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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