रिक्शा चालक को न्याय दिलाने पहुंचे मंत्री, 2 घंटे में खत्म हुआ अनशन
पीड़ित को न्याय दिलाने और कार्रवाई की मांग को लेकर जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद खुद शहर कोतवाली के बाहर अनशन पर बैठ गए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा में रिक्शा चालक के साथ कथित मारपीट का मामला अब सियासी और प्रशासनिक सवालों के घेरे में है। पीड़ित को न्याय दिलाने और कार्रवाई की मांग को लेकर जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद खुद शहर कोतवाली के बाहर अनशन पर बैठ गए।
लेकिन करीब दो घंटे बाद ऐसा क्या हुआ कि मंत्री अचानक अनशन से उठकर चले गए? बताया जा रहा है कि इसी दौरान उनके पास एक फोन आया था। हालांकि, फोन पर किससे बात हुई और अनशन खत्म करने की वजह क्या रही, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
तस्वीरें बांदा की शहर कोतवाली के बाहर की हैं, जहां शनिवार को जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद अपने समर्थकों के साथ अनशन पर बैठ गए। मामला एक रिक्शा चालक के साथ कथित मारपीट से जुड़ा बताया जा रहा है। मंत्री की मौजूदगी से पीड़ित को न्याय मिलने और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीदें बढ़ीं।
लेकिन करीब दो घंटे बाद घटनाक्रम ने अचानक करवट ले ली। बताया जा रहा है कि फोन आने के बाद मंत्री अपने समर्थकों के साथ अनशन स्थल से उठकर चले गए। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि न्याय और कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू हुआ अनशन अचानक समाप्त हो गया? क्या पीड़ित को न्याय दिलाने के संबंध में कोई आश्वासन मिला, या अनशन खत्म करने की कोई दूसरी वजह रही? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।
मंत्री के जाने के दौरान उनके मीडिया से बातचीत नहीं करने की बात भी सामने आई है। अब सवाल पुलिस की कार्रवाई और पीड़ित रिक्शा चालक को न्याय मिलने का है। क्षेत्राधिकारी सौरभ सिंह, पीड़ित लाला भइया और अनशनकारी शैलेन्द्र का पक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण है। पुलिस की कार्रवाई और मंत्री के अनशन समाप्त करने की वजह स्पष्ट होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है, रिक्शा चालक को न्याय दिलाने के लिए शुरू हुआ अनशन महज दो घंटे में क्यों खत्म हो गया? फोन आने के बाद मंत्री के अचानक उठने की वजह क्या थी? इन सवालों के जवाब का इंतजार है।
रिपोर्ट -इकबाल खान, बांदा



