विपक्ष का दबाव, कॉकरोचों का अल्टीमेटम, अब जाना होगा ज्ञानेश कुमार को

चीफ इलेक्शन कमिश्नर का मेरठ और वाराणसी दौरा रद्द

संयुक्त विपक्ष दोनों सदनों में चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ ला रहा है प्रस्ताव
कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर पर ज्ञानेश को हटाने के लिए लांच किया प्रदर्शन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जनता के दबाव और राहुल गांधी की हुंकार के बाद लगता है कि चीफ इलेक्शन कमिशनर ज्ञानेश कुमार के पांव पिच से उखडऩे लगे हैं । बड़ी खबर आ रही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का आज से शुरू होने वाला मेरठ और वाराणसी दौरा रद्द हो गया है।
ज्ञानेश कुमार पर लगे गंभीर आरोपों के बीच पहली बार चुनाव आयोग ने बैक गियर लगाया है और इस तरह की खबर सामने आयी है। अधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया गया है कि यह दौरा क्यों रदद हुआ है। इसे पूर्व में ज्ञानेश कुमार जिलों के दौरे कर रहे हैं जिसमें उनका लखनउ का दौरा सम्पन्न हो चुका है।
चुनाव आयोग के भीतर उठे सवालों की गूंज अब सडक़ से संसद तक पहुंच चुकी है। विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी तेज कर दी है। संयुक्त विपक्ष दोनों सदनों में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। यानी लड़ाई अब सिर्फ बयानबाजी की नहीं रही बल्कि ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर संवैधानिक कार्रवाई की दस्तक सुनाई देने लगी है।

क्या पद पर बने रह पाएंगे ज्ञानेश कुमार

सडक़ पर विरोध संसद में प्रस्ताव और विपक्ष के नेताओं के लगातार हमले कहानी तेजी से उस मोड़ पर पहुंच रही है जहां सवाल यह नहीं रह गया कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांग रहा है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या ज्ञानेश कुमार इस बढ़ते राजनीतिक और संवैधानिक दबाव के बीच अपने पद पर बने रह पाएंगे? राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठा रहे हैं। प्रियंका गांधी ने भी कार्रवाई की मांग की है। ममता बनर्जी से लेकर तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव तक विपक्षी खेमे के अलग अलग नेता चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों ने लोकतांत्रिक भरोसे को चोट पहुंचाई है।

तार तार होती व्यवस्था

इस बार कतई ऐसा नहीं लग रहा कि ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए सिर्फ विपक्ष लामबंद है। बल्कि जमीनी हकीकत इस ओर इशारा कर रही है कि जनता भी यही चाहती है कि जिस व्यक्ति की व्यवस्था ने लाखों लोगों को वोट देने के अधिकार से ?वचिंत किये जाने की व्यवस्था बनाई उसे अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि पिछले दस महीनों में चुनाव आयोग के भीतर ही एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक कुछ फैसलों पर नए मतदाताओं को जोडऩे और मतदाता नाम हटाने जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठे। यही वह बिंदु है जहां से विपक्ष का हमला और तेज हुआ है। अब संसद का दरवाजा खटखटाने की तैयारी है।

इस्तीफा नहीं ज्ञानेश को पद से हटाया जाए

एसआईआर को लेकर वाम दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की है। सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पूरे देश में नाराजगी है। तीनों वामपंथी कम्युनिस्ट पार्टियों ने संयुक्त रूप से 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि बिहार में एसआईआर की शुरुआत के समय से ही वाम दल जिन मुद्दों को उठाते रहे हैं वही मुद्दे अब चुनाव आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाना और एसआईआर की प्रक्रिया को तुरंत रोकना शामिल है। सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन करना अच्छी बात है और कई लोगों ने इसके लिए आगे आने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को केवल इस्तीफा नहीं देना चाहिए बल्कि उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।

एसआईआर पर राहुल गांधी की चेतावनी सही निकली : अशोक गहलोत

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एसआईआर को लेकर राहुल गांधी की ओर से पहले उठाए गए सवालों का जिक्र करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अशोक गहलोत ने कहा है कि राहुल गांधी करीब एक साल पहले से चुनाव में गड़बडिय़ों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने एसआईआर को लेकर राहुल गांधी की ओर से किए गए प्रस्तुतियों और उनकी आलोचना का भी जिक्र किया। पूर्व सीएम ने दावा किया कि अब चुनाव आयोग के दो सदस्यों की ओर से भी कई बार आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। आयोग के इन सदस्यों ने 14 बार गलत काम होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी इसके बावजूद प्रक्रिया जारी रही। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। गहलोत ने ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं उससे लोकतंत्र और देश की जम्हूरियत के सामने बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

सीईसी आपराधिक कार्रवाई का सामना करें: प्रियंका गांधी वाड्रा

एसआईआर विवाद को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि चुनावों में धांधली और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से जुड़े आरोप सही साबित होते हैं और इसकी जानकारी होने के बावजूद अधिकारी इसमें शामिल रहे तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और आपराधिक कार्रवाई का सामना करना चाहिए। वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि सामने आईं सभी बातें सही हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनावों में कथित धांधली की जानकारी थी इसके बावजूद उन्होंने इसमें भागीदारी की तो उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए। यदि अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने भी स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही थी और इसके बावजूद धांधली जारी रही तो मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। प्रियंका गांधी ने कहा कि मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। यह लोकतंत्र और देश के लिए गंभीर खतरा है। जिस तरह से चुनाव आयोग काम कर रहा है वह देश के लिए सही नहीं है यह बात अब सबके सामने भी आ गई है।

सीईसी के खिलाफ देशभर में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, सडक़ों पर उतरे कार्यकर्ता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन किया। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लखनऊ, कोलकाता और देहरादून समेत कई जगहों पर कांग्रेस कार्यकर्ता सडक़ों पर उतरे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली में भी चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी कांग्रेस विधायकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट, इरफान हाफिज लोन और इफ्तिखार अहमद ने प्रदर्शन किया। उन्होंने वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ और निष्पक्ष चुनाव के बिना लोकतंत्र नहीं जैसे नारे लिखे बैनर दिखाए। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। असम में गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।

क्या पद पर बने रह पाएंगे ज्ञानेश कुमार

सडक़ पर विरोध संसद में प्रस्ताव और विपक्ष के नेताओं के लगातार हमले कहानी तेजी से उस मोड़ पर पहुंच रही है जहां सवाल यह नहीं रह गया कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांग रहा है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या ज्ञानेश कुमार इस बढ़ते राजनीतिक और संवैधानिक दबाव के बीच अपने पद पर बने रह पाएंगे? राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठा रहे हैं। प्रियंका गांधी ने भी कार्रवाई की मांग की है। ममता बनर्जी से लेकर तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव तक विपक्षी खेमे के अलग अलग नेता चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों ने लोकतांत्रिक भरोसे को चोट पहुंचाई है।

दीपके ने लोकतंत्र बचाने की अपील की

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार शनिवार तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सीजेपी 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से मुंबई में देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगी। इसके बाद आंदोलन को देश के अलग-अलग शहरों तक ले जाने की बात कही गई है।
दीपके ने गांधी जयंती पर लोकतंत्र बचाने का संकल्प लेने की अपील भी की है। सीजेपी ने यह घोषणा चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रही बहस के बीच की है। पार्टी ने ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। सीजेपी का दावा है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर किए गए हैं। पार्टी का आरोप है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ा है। ये आंकड़े और आरोप सीजेपी की ओर से लगाए गए दावे हैं। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। इससे पहले पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था। अब इसे घटाकर 24 घंटे कर दिया गया है। दीपके ने कहा कि अगर इस्तीफा नहीं हुआ तो 2 अक्तूबर को मुंबई से आंदोलन शुरू होगा और इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड प्रस्ताव पर हंगामा

भाजपा-नेकां आमने सामने मेज पर चढ़े विधायक कार्यवाही बाधित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को उस समय हंगामा हो गया, जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ को लेकर भाजपा सदस्यों ने विरोध जताया। हंगामे के बीच विधानसभा की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।
भाजपा के सदस्य सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने जहां हुआ बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है और जो कश्मीर हमारा है, वो सारा का सारा है जैसे नारे लगाए। हंगामा जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने प्रस्ताव में स्वायत्तता के संदर्भ का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पार्टी जम्मू-कश्मीर के अधिकारों के लिए अपनी मांग उठाती रहेगी। ऑटोनॉमी के मुद्दे पर भाजपा ने उठाए सवाल
स्टेटहुड के प्रस्ताव के साथ ही सदन में पुराने ऑटोनॉमी प्रस्ताव का मुद्दा भी उठ गया। भाजपा विधायकों ने सवाल किया कि साल 2000 के पुराने प्रस्ताव को आज के प्रस्ताव के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है। पवन गुप्ता ने सवाल उठाया कि जब उस समय जम्मू-कश्मीर एक राज्य था और अब केंद्र शासित प्रदेश है, तो करीब 26 साल पुराने प्रस्ताव को मौजूदा प्रस्ताव के साथ जोडक़र सदन में कैसे चर्चा की जा सकती है। भाजपा विधायक जस्रोटिया ने सवाल किया कि क्या सरकार सदन में ऑटोनॉमी के मुद्दे पर भी चर्चा करना चाहती है। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तेज हो गई। इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने छीन के लेंगे अपना हक के नारे लगाए। जवाब में भाजपा विधायकों की ओर से भी लगातार नारेबाजी की गई।

वेल में पहुंचे भाजपा विधायक

हंगामा बढऩे पर भाजपा के कुछ विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। इसी दौरान भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने मेज पर चढक़र कागज फेंके। इससे सदन में स्थिति और गरमा गई। भाजपा की ओर से सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के खिलाफ कई नारे लगाए गए। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक भी लगातार स्टेटहुड बहाल करने की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे।

कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित

हंगामा बढऩे पर दोनों पक्षों के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।

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