सरकारी सेवा के दौरान बेटे की मौत, हाई कोर्ट ने मां को पेंशन देने का दिया आदेश
कोर्ट ने लैंगिक भेदभाव को अस्वीकार्य मानते हुए कहा कि माता-पिता को पेंशन का अधिकार है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: हाई कोर्ट आदेश दिया कि सरकारी सेवा में कार्यरत मृतक बेटे की मां को पेंशन मिलेगी, भले ही उसकी बेटियां विवाहित हों. कोर्ट ने लैंगिक भेदभाव को अस्वीकार्य मानते हुए कहा कि माता-पिता को पेंशन का अधिकार है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकारी सेवा में कार्यरत बेटे की मौत के बाद उसकी मां को पेंशन देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं. बताया जा रहा है कि पेंशन के लिए मां ने आवेदन किया था, लेकिन अधिकारियों ने उसे खारिज कर दिया था.
जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2020 में बेटे की मौत हो गई थी. इसके बाद उसकी मां पेंशन के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही थी. मां ने प्रशासन के समक्ष पेंशन लाभ के लिए आवेदन किया था. हालांकि, अधिकारियों ने यह कहते हुए उनका दावा खारिज कर दिया कि उनकी तीन बेटियां हैं और तीनों की शादी हो चुकी है.
मां ने हाई कोर्ट में दू चुनौती
इसके बाद मां ने हाई कोर्ट का रुख किया और फैसले को चुनौती. मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि किसी मां के पेंशन के अधिकार का फैसला इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि उसकी बेटियां विवाहित हैं या अविवाहित.
लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता’
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेटे और बेटी के बीच किसी भी तरह का लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसे माता-पिता को पेंशन देने का प्रावधान है, जो अपने दिवंगत बेटे या बेटी पर आर्थिक रूप से निर्भर थे. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बेटे की मौत के बाद मां को मिलने वाली पेंशन का लाभ दिया जाए.
समानता के मौलिक अधिकार का जिक्र
संविधान में दिए गए समानता के मौलिक अधिकार का उल्लेख करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में फैसला लैंगिक भेदभाव के बिना किया जाना चाहिए.
हाई कोर्ट ने ने यह भी कहा कि माता-पिता को सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए और प्रशासनिक निर्णय भी इसी संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप होने चाहिए. कोर्ट के इस फैसले के बाद मां को पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है.



