उत्पीड़न के विरोध में 4पीएम के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने दिल्ली पुलिस से जांच करवाने और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की

सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर खुलकर समर्थन
दिल्ली पुलिस की कायरता की कहानी से पटे एक्स और फेसबुक के पेज
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। 4पीएम की पत्रकार शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान पर हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ पूरे देश में जोरदार आवाज उठने लगी है। क्या आम आदमी क्या खास सब दिल्ली पुलिस की तीखी आलोचना कर रहे हैं। सोशल मीडिया के सारे प्लेटफार्म, मीडिया हाउस इन बहादुर महिला पत्रकारों केसमर्थन में उतर आए हैं।
एक्स हो, फेसबुक हो, इंस्टाग्राम या कोई और सोर्स सब जगह भाजपा सरकार की आलोचना हो रही है। इन सबके बीच सियासी दलों ने भी पुलिस की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस, आप, सपा, राजद, भीम आर्मी से लेकर सभी ने इसकी आलोचना करते हुए जांच की मांग की है। वही प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने दिल्ली पुलिस से जाँच करवाने और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की माँग की है।

मोदी जी के अमृतकाल में अब मुसलमान होना, महिला होना और निष्पक्ष पत्रकार होना, सबसे बड़ा गुनाह है : तेजस्वी यादव
ये मुसलमान है। ये महिला है। ये पत्रकार है। ये जेन-जी है। जुर्म इतना है कि देशभक्त महिला पत्रकार ने दिल्ली की मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से सवाल पूछ लिया। फिर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से इस बहन की पिटाई कर दी। मोदी जी के अमृतकाल वाले कथित न्यू इंडिया में अब मुसलमान होना, महिला होना और निष्पक्ष पत्रकार होना, सबसे बड़ा गुनाह है। भाजपा ने पूरे देश में सत्ताई निरंकुशता की हर सीमा को लाँघ दिया है। निरंकुश भाजपा सरकारों से अब सवाल पूछना उनकी आलोचना करना ही सबसे बड़ा अपराध है। दिल्ली हो या बिहार, हर जगह कायर भाजपाई अब पुलिस से पत्रकारों को पिटवा रहे हैं, डरा रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में संवैधानिक संस्थाएं और पुलिस लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक बन गई है।
पत्रकार की पहचान देखकर उसके साथ भेदभाव करना लोकतंत्र के खिलाफ : चंद्रशेखर
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश करने पर पत्रकारों शाहीन और नफीसा को पुलिस द्वारा कथित रूप से मारते-पीटते थाने ले जाने, गाली-गलौज करने, धमकाने और उनके साथ दुव्र्यवहार किए जाने का आरोप यह बताता है कि वल्र्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 18० देशों में 157वें स्थान पर क्यों है। सबसे चिंताजनक यह है कि उनका कहना है कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ दुव्र्यवहार और बढ़ गया यह भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल पूछना अपराध नहीं है। पत्रकार की पहचान देखकर उसके साथ भेदभाव करना लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है। यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है! सवाल पूछना अपराध नहीं है। पत्रकार की पहचान देखकर उसके साथ भेदभाव करना लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है। यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है!
दिल्ली पुलिस में बैठे कुछ अधिकारियों की कथित हरकतें संविधान विरोधी : इकरा हसन
दिल्ली पुलिस में बैठे कुछ अधिकारियों की कथित हरकतें संविधान और क़ानून के मूल्यों के बिल्कुल विपरीत हैं। 4पीएम की महिला पत्रकार के साथ मारपीट और नाम पूछकर कथित तौर पर धर्म के आधार पर उग्रता दिखाना बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। गृहमंत्री अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस की ऐसी कार्यशैली लोकतंत्र और क़ानून के राज पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
पहले पुलिस का दावा फिर पोस्ट गायब
शाहीन को थाने ले जाने की वजह बताने वाला दिल्ली पुलिस का एक्स पोस्ट डिलीट
नई दिल्ली। घटना के कुछ ही देर बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक सफाई सामने आई। पुलिस ने बताया कि 4पीएम की पत्रकार शाहीन और उनकी साथी ने अपनी स्कूटी वीवीआईपी रूट पर खड़ी कर दी थी और उसे हटाने से इनकार कर रही थीं।
पुलिस के मुताबिक इसी वजह से दोनों को थाने लाया गया। यानी पुलिस की पहली कहानी बिल्कुल साफ थी मामला रिपोर्टिंग का नहीं वीवीआईपी रूट पर खड़ी स्कूटी और पुलिस के निर्देश न मानने का था। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। मामला जैसे जैसे गरमाया पत्रकारों और सामाजिक संगठनों की तरफ से थाने के भीतर हुई कथित ज्यादती की जांच सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और सामने लाने की मांग तेज हुई वैसे वैसे पुलिस की शुरुआती सफाई खुद सवालों के घेरे में आने लगी। और इसी बीच वह एक्स पोस्ट जिसमें पुलिस ने शाहीन और उनकी साथी को थाने लाने की वजह बताई थी डिलीट कर दिया गया।
अगर दिल्ली पुलिस का शुरुआती बयान पूरी तरह सही था अगर स्कूटी वीवीआईपी रूट पर खड़ी थी अगर पत्रकारों को पुलिस के निर्देश न मानने के कारण थाने लाया गया था तो फिर उस स्पष्टीकरण को सार्वजनिक मंच से हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या पुलिस ने अपनी सफाई बदल दी? क्या शुरुआती पोस्ट में कोई तथ्य ऐसा था जिसे बाद में पुलिस सही नहीं मान रही थी? या फिर पोस्ट हटाने का कोई दूसरा प्रशासनिक कारण था? इन सवालों का जवाब दिल्ली पुलिस को देना चाहिए। क्योंकि मामला अब सिर्फ एक डिलीटेड सोशल मीडिया पोस्ट का नहीं है। मामला उस पूरे घटनाक्रम का है जिसमें एक तरफ पत्रकार शाहीन पुलिस पर मारपीट और उत्पीडऩ के गंभीर आरोप लगा रही हैं दूसरी तरफ पुलिस इसे वीवीआईपी रूट और स्कूटी से जुड़ा मामला बता रही है।
आज काफी देर हो गई। पुलिस के संदर्भ में घटनाएं बदलती चली गईं। दिल्ली में दो महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें पीटा है, कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर में गुंडे घुस आए, सत्येंद्र जैन को ज़मानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोई ठोस सबूत नहीं, आधार नहीं, फिर भी डाल दिया जेल में, नोएडा में आकृति चौधरी पर फर्र्जी तरीके से लगा दिया एनएसए। पुणे में सामाजिक कार्यकर्ता संतोष पंडित गिरफ़्तार। क्या देश पुलिस तंत्र बनता जा रहा है? मर्जी किसी को फंसा दो, किसी को पीट दो, गुंडे आ जाएं तो चुपचाप खड़े रहो। -रवीश कुमार ऑफिसियल
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता से सवाल पूछना अपराध है क्या? 4 पीएम की महिला पत्रकारों के साथ जो हुआ, वो अक्षम्य अपराध है। उनको आई चोटें, उनकी चीखें, इस बात का गवाह हैं कि पुलिस की वर्दी ने मर्यादा तार तार कर दी। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक वही दास्तां हर बार है! सवालों की आंच से डरती हुई सरकार है! -अभिषेक उपाध्याय
घंटों के संघर्ष और लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार शिकायत दर्ज कर ली गई। राष्ट्रीय चेयरमैन, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी जी के निर्देशानुसार विभाग के साथी लगातार साकेत थाने में डटे रहे और बहन शाहीन को न्याय दिलाने के लिए आवाज़ बुलंद करते रहे। आखिरकार संघर्ष की जीत हुई और बहन शाहीन की शिकायत दर्ज की गई। यह जीत न्याय की लड़ाई की जीत है। – कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ
जुल्मी जब जब जुल्म करेगा सत्ता के गलियारों से चप्पा चप्पा गूंज उठेगा इंक़लाब के नारों से। दिल्ली कांग्रेस अपलसंख्यक विभाग के सभी साथियों के जज़्बे को सलाम। -सैयद जीशान
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? पत्रकार शाहीन की यह आपबीती रूह कंपा देने वाली है! दिल्ली पुलिस की अमानवीयता और तानाशाही का काला सच सामने आया है। पत्रकार शाहीन और उनकी बहन नफीसा पर थाने के भीतर कथित बर्बरता, मारपीट और उसके बाद रात के 3 बजे तक एफआईआर शो मोर। – सत्ता 36०
शाहीन और नफीसा के लगाए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर धर्म के आधार पर दुव्र्यवहार हुआ है तो यह सिर्फ पत्रकारिता पर नहीं, संविधान की मूल भावना पर हमला है। – राजन गौतम
पत्रकार का धर्म सवाल पूछना है, सत्ता का धर्म जवाब देना। धर्म, लिंग या पहचान के आधार पर पत्रकार को निशाना बनाना लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर संकेत है। अनुच्छेद 19(1)(ड्ड) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है। सत्ता से सवाल पूछना अपराध नहीं—लोकतंत्र की आत्मा है। – एक यूजर
एडवोकेट महमूद प्राचा ने महिला पत्रकारों की पिटाई मामले में दिया बड़ा बयान अगर इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों और उनका साथ देने वाले सब लोगों को जेल नहीं कराई तो हमारी वकालत बेकार है। – तनवीर रंगरेज
छोडऩा मत संजय भाई, दूसरे पत्रकार हो या ना हो जनता आपके साथ है। – अवि डांडिया
देश में अत्याचार असीमित बढ़ गया है। तानाशाही का अंत निश्चित है। – उमेश शर्मा
जब पत्रकार को सवाल पूछने पर इतना बेरहमी से पीटा जा रहा है तो एक आम इंसान जब सवाल पूछेगा तो उसे क्या होगा आप समझ सकते हैं.। – प्रिंस
कुछ लोग अपना जुर्म खुलेआम कबूल कर रहे है और आजाद घूम रहे है। और जो सच्चाई के साथ काम कर रहे है उनके साथ मारपीट की जा रही है। – हिफजान
पुलिस वाले खा जनता के पैसों से रहे है संविधान की शपथ ली है लेकिन दलाली और गुलामी संघ व भाजपा की कर रहे है। -गुरुघण्टाल
कुछ लोग शाहीन खान को ‘महिला’ के रूप में, ‘पत्रकार’ के रूप में कम और मुस्लिमान के रूप में देख कर इस मामले को इग्नोर कर रहें होंगे। पर शाहीन खान के साथ ये घटना मुस्लिम होने के कारण नहीं स्वतंत्र, निष्पक्ष, साहसी, जिम्मेदार और निडर पत्रकार होने के कारण घटी है जो शर्मनाक। – हमजा
महमूद साब सही कह रहे हैं। कल का ये कृत्य सरकार की पोल खोल रहा है। – राजा शेख



