Nitish के बेटे Nishant के लिए बिछने लगी सियासी बिसात! पोस्टरों और नारों से गूंजा बिहार, सियासी विरासत को लेकर उठे सवाल!
बिहार की राजनीति में एक बार फिर भारी बवाल मच गया है…और इस नए सियासी बवाल को जन्म दिया है बिहार में हुई भूख हड़ताल ने.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार की राजनीति में एक बार फिर भारी बवाल मच गया है…और इस नए सियासी बवाल को जन्म दिया है बिहार में हुई भूख हड़ताल ने….जोकी खुद JDU के कार्यकर्ताओं की ओर से की गई है.
जिसके बाद से बिहार के राजनीतिक गलियारों में सियासी पारा हाई हो गया है……..तो आखिर क्यों भूख हड़ताल पर बैठे JDU कार्यकर्ता और उनके भूख हड़ताल पर बैठने की पीछे की क्या है वजह..
बिहार की राजनीति में निशांत कुमार की संभावित एंट्री को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है…मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब तक राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं…लेकिन जेडीयू के भीतर और बाहर उनके राजनीति में आने की मांग लगातार तेज होती जा रही है…मांग के साथ-साथ हाल के दिनों में बैनर, पोस्टर, नारेबाजी और यहां तक कि भूख हड़ताल तक देखने को मिली है…
JDU समर्थकों का कहना है कि निशांत के आने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी…जबकि विरोधी इसे परिवारवाद से जोड़कर देख रहे हैं…ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नीतीश कुमार अपने लंबे समय से चले आ रहे फैसले को बदलेंगे?
सबसे पहले बात उस मुद्दे की करते हैं…जिसमें ये चर्चा फिर से जोर पकड़ रही है…तो नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में एक ऐसे नेता माने जाते हैं….जिन्होंने खुद को परिवारवाद से अलग रखने की कोशिश की…उन्होंने कई मौकों पर साफ कहा कि उनका बेटा राजनीति में नहीं आएगा…निशांत कुमार भी अब तक सार्वजनिक तौर पर राजनीति से दूरी बनाए हुए दिखे हैं…वो न तो चुनावी मंचों पर नजर आते हैं और न ही किसी सियासी बयानबाजी में शामिल होते हैं…बावजूद इसके, समय-समय पर जेडीयू के कुछ नेता और कार्यकर्ता निशांत की एंट्री की मांग उठाते रहे हैं…
हालही में हुई भूख हड़ताल ने इस मांग को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है…जब 28 दिसंबर को पटना के गर्दनीबाग में जेडीयू से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल की…ये भूख हड़ताल मुकुंद सेना नाम के संगठन के बैनर तले हुई…जिसमें 12 घंटे तक कार्यकर्ता बैठे रहे…उनका साफ कहना था कि पार्टी को आगे बढ़ाने और नीतीश कुमार की विरासत को संभालने के लिए निशांत कुमार को राजनीति में आना चाहिए…
इस प्रदर्शन के बाद पटना समेत कई जिलों में पोस्टर और बैनर लगाए गए…जिनमें निशांत को बिहार का भविष्य तक बताया गया…समर्थकों की दलीलें भी सुनना जरूरी है…JDU के कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की राह पर आगे बढ़ाया है और उनकी नीतियों को आगे ले जाने के लिए किसी भरोसेमंद चेहरे की जरूरत है…समर्थकों का कहना है कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे हैं…सादगी भरा जीवन जीते हैं और अपने पिता की तरह ही जमीन से जुड़े हुए हैं…उनका तर्क है कि अगर दूसरे दलों में नेताओं के बेटे-बेटियां राजनीति में सक्रिय हैं…तो जेडीयू में ऐसा होना गलत क्यों माना जाए?…
भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने साफ शब्दों में कहा था कि…डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता है…इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बन सकता है…जज का बेटा जज बन सकता है…तो पॉलिटिशियन का बेटा पोलिटिक्स में क्यों नहीं आ सकता……वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी कहा है कि….निशांत पार्टी में आएं, यह हर कार्यकर्ता-नेता की इच्छा है…अब निशांत को तय करना है कि वो कब इसके लिए तैयार होते हैं…
इन बयानों के बीच मुकुंद सेना के बैनर तले समर्थकों का धरना निशांत को राजनीति में लाने के प्रयासों की ताजा कड़ी है…हालांकि, इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर एक राय नहीं है…जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेता खुलकर निशांत की एंट्री का समर्थन नहीं करते…उनका कहना है कि पार्टी की पहचान विचारधारा और संगठन से है, न कि किसी परिवार से…वो मानते हैं कि नीतीश कुमार की सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि उन्होंने परिवारवाद से दूरी बनाई…अगर निशांत राजनीति में आते हैं…तो ये संदेश जाएगा कि जेडीयू भी उसी राह पर चल पड़ी है…जिससे नीतीश खुद को अलग बताते रहे हैं…
विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे पर हमला करने का मौका मिल गया है….आरजेडी और कांग्रेस जैसे दल निशांत की संभावित एंट्री को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं….आरजेडी नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार परिवारवाद पर दूसरों को ज्ञान देते रहे हैं…लेकिन अब खुद उसी रास्ते पर जाने की तैयारी कर रहे हैं…वहीं नीतीश कुमार की चुप्पी भी इस चर्चा को और हवा दे रही है…मुख्यमंत्री ने हाल के दिनों में निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर कोई साफ बयान नहीं दिया है…पहले वो कई बार कह चुके हैं कि उनका बेटा राजनीति में नहीं आएगा…लेकिन मौजूदा घटनाक्रम पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है…राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार बेहद सोच-समझकर फैसले लेने वाले नेता हैं और वो किसी भी दबाव में तुरंत फैसला नहीं करते हैं…
ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि निशांत कुमार खुद क्या चाहते हैं?…अब तक निशांत ने सार्वजनिक मंच से कभी ये नहीं कहा कि वो राजनीति में आना चाहते हैं…वो निजी जीवन में सादगी पसंद करते हैं और मीडिया से भी दूरी बनाए रखते हैं…कई बार कैमरों में उन्हें अपने पिता के साथ देखा गया है…लेकिन किसी राजनीतिक कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाते हुए नहीं…ऐसे में ये कहना मुश्किल है कि वो खुद राजनीति में आने के लिए कितने तैयार हैं……..क्योंकि, बिहार की राजनीति के लिहाज से ये मुद्दा इसलिए भी अहम है…क्योंकि जेडीयू इस समय एक नाजुक दौर से गुजर रही है…
पार्टी को लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है…कई पुराने नेता पार्टी छोड़ चुके हैं और नए वोटरों को जोड़ना जेडीयू के लिए आसान नहीं रहा है…ऐसे में कुछ कार्यकर्ताओं को लगता है कि निशांत कुमार का नाम पार्टी के लिए एक नया आकर्षण बन सकता है…जिससे युवाओं को जोड़ा जा सके….
लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं…अगर निशांत की एंट्री होती है…तो ये सवाल जरूर उठेगा कि क्या वो संगठन और जनता के बीच अपनी पहचान बना पाएंगे या सिर्फ मुख्यमंत्री के बेटे के रूप में देखे जाएंगे………देखिए, बिहार की राजनीति में जनता अक्सर जमीन से जुड़े नेताओं को पसंद करती है और केवल नाम के सहारे राजनीति करना यहां आसान नहीं रहा है…नीतीश कुमार खुद इसका उदाहरण हैं…जिन्होंने लंबे संघर्ष के बाद अपनी एक मजबूत जगह बनाई……इसके साथ ही एक और अहम पहलू है गठबंधन की राजनीति…जेडीयू जिस भी गठबंधन का हिस्सा होती है…
वहां इस फैसले का असर पड़ेगा…..सहयोगी दल ये सवाल उठा सकते हैं कि क्या पार्टी अब नेतृत्व परिवर्तन की ओर बढ़ रही है…..इससे सत्ता समीकरण और चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ सकता है…….और नीतीश कुमार इस बात को भली-भांति समझते हैं और शायद इसी वजह से वो कोई भी कदम फूंक-फूंक कर रखेंगे….
वहीं इस पूरे मामले पर राजनीतिक विश्लेषकों की राय भी बंटी हुई है….कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि निशांत की एंट्री से जेडीयू को अल्पकालिक फायदा मिल सकता है….लेकिन लंबे समय में पार्टी की वैचारिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है…वहीं कुछ का कहना है कि बदलते राजनीतिक दौर में परिवारवाद अब कोई नया मुद्दा नहीं रहा और अगर निशांत मेहनत और क्षमता के बल पर आगे आते हैं…तो जनता उन्हें स्वीकार कर सकती हैं…
इतिहास पर नजर डालें तो बिहार में कई नेताओं के बेटे-बेटियां राजनीति में आए हैं….लालू प्रसाद यादव के परिवार से तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव राजनीति में हैं….रामविलास पासवान के बाद उनके बेटे चिराग पासवान सक्रिय राजनीति में हैं….ऐसे में जेडीयू समर्थक सवाल करते हैं कि अगर दूसरे नेताओं के परिवारों को मौका मिलता है…तो निशांत को क्यों नहीं?….
फिलहाल स्थिति ये है कि जेडीयू समर्थक लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं…पोस्टर-बैनर, सोशल मीडिया अभियान और धरना-प्रदर्शन इसी रणनीति का हिस्सा हैं…वो चाहते हैं कि नीतीश कुमार इस मांग को गंभीरता से लें और पार्टी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए फैसला करें…वहीं दूसरी ओर, नीतीश कुमार की चुप्पी बताती है कि वो जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहते..
ऐसे में आखिर में यही कहा जा सकता है कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री फिलहाल एक संभावना है….न कि तय हकीकत….समर्थकों का जोश अपनी जगह है और विरोधियों की आलोचना अपनी जगह….लेकिन, आखिरी फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है और उनका राजनीतिक अनुभव बताता है कि वो वही करेंगे…जो उन्हें बिहार और अपनी पार्टी के लिए सही लगेगा….आने वाले दिनों में ये साफ हो जाएगा कि बैनर, पोस्टर और भूख हड़ताल का ये दबाव रंग लाएगा या फिर निशांत कुमार राजनीति से दूर ही रहेंगे……………..लेकिन, निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर आप क्या सोचते हैं?.



