अंबानी परिवार की आस्था: कष्टभंजन हनुमान मंदिर पहुंचे मुकेश–अनंत अंबानी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने गुजरात के सोमनाथ महादेव के दर्शन करने के बाद अपने बेटे अनंत अंबानी के साथ बोटाद जिले के सारंगपुर स्थित श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर में दर्शन-पूजन किया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने गुजरात के सोमनाथ महादेव के दर्शन करने के बाद अपने बेटे अनंत अंबानी के साथ बोटाद जिले के सारंगपुर स्थित श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर शीश नवाया और मंदिर के विकास कार्यों के लिए उदार दान भी दिया।
अंबानी परिवार की इस यात्रा को आस्था और श्रद्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर विशेष रूप से अपने चमत्कारी प्रभाव और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है।
उद्योगपति मुकेश अंबानी हाल ही में अपने बेटे अनंत अंबानी के साथ गुजरात के बोटाद जिले में स्थित श्री
देव हनुमानजी मंदिर, सारंगपुर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की. इस दौरान मुकेश अंबानी और अनंत अंबानी ने विधि विधान से हनुमानजी की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि व देश की उन्नति की कामना की. दर्शन के बाद मुकेश अंबानी ने मंदिर ट्रस्ट के लिए 5 करोड़ रुपये के दान की घोषणा की. बताया जाता है कि यह धनराशि मंदिर के विकास कार्यों, भक्त सुविधाओं और सामाजिक कार्यों में उपयोग की जाएगी. ये पहली बार नहीं जब अंबानी परिवार इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचा, आइए हनुमान जी के इस पौराणिक मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तार से जान लेते हैं.
क्यों खास है सारंगपुर का कष्टभंजन मंदिर?
गुजरात के बोटाद जिले में स्थित श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर, सारंगपुर पूरे भारत में संकट निवारण के लिए प्रसिद्ध है, यह मंदिर विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र माना जाता है, जो जीवन में मानसिक,
शारीरिक या अदृश्य बाधाओं से परेशान होते हैं. इसलिए हनुमान मंदिर देशभर में अपनी मान्यताओं और चमत्कारों
के लिए प्रसिद्ध है. आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें.
कष्टों को हरने वाले कष्टभंजन देव
इस मंदिर को सालंगपुर हनुमान जी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि यहां हनुमान जी के दर्शन मात्र
से भक्तों के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं, इसलिए इन्हें कष्टभंजन देव कहा जाता है.
शनिदेव का अनूठा रूप
यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी के चरणों में शनिदेव स्त्री रूप में विराजमान हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शनिदेव के प्रकोप से भक्त परेशान थे, तो हनुमान जी ने उनकी रक्षा की थी. शनिदेव ने हनुमान जी से माफी मांगी और स्त्री रूप धारण कर उनके चरणों में स्थान पाया. इसलिए माना जाता है कि यहां दर्शन करने से शनि दोष और साढ़े साती का प्रभाव खत्म हो जाता है.
बुरी शक्तियों का नाश
लोक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों पर बुरी नजर, भूत-प्रेत या मानसिक अशांति का साया होता है, वे यहां आकर ठीक हो जाते हैं. यहां की आरती और हनुमान जी के दर्शन को बहुत शक्तिशाली माना जाता है.
सोने का सिंहासन और भव्य शृंगार
यहां हनुमानजी महराजाधिराज के रूप में विराजमान हैं. या उन्हें सोने के सिंहासन पर बैठाया गया है और हर दिन उनका भव्य और अलग-अलग तरह का विशेष शृंगार (काजू, बादाम, या हीरों से) किया जाता है, जो अपने आप में अद्भुत होता है.
मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठा की कथा
कहा जाता है कि इस मंदिर में मूर्ति की प्रतिष्ठा स्वामीनारायण भगवान के परम भक्त और संत श्री गोपालानंद स्वामी ने की थी. लोककथाओं के मुताबिक, जब गोपालानंद स्वामी ने मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए एक छड़ी का उपयोग किया, तो मूर्ति सचमुच में कंपित होने लगी थी, मानो उसमें साक्षात हनुमानजी विराज गए हों.



