अनिद्रा और घबराहट दूर भगाने के लिए करें ये योगासन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
माग जब डर और बेचैनी की जकड़ा रहे, सांसें तेज चलने लगें और नींद आना बंद होने लगे तो समझ लीजिए, एंग्ज़ाइटी ने मन पर कब्ज़ा कर लिया है। इस समस्या में दवाइयां सहारा देती हैं, लेकिन गहराई तक राहत पहुंचाने का काम योग करता है। योग प्राचीन, पर हमेशा नया और असरदार रहने वाला उपाय है। योग सिर्फ शरीर की मुद्राएं बदलने तक सीमित नहीं है। यह मन को शांत करने, सांसों को संभालने और विचारों को स्थिर करने की विधा है। इसके अलावा कई बार व्यक्ति बहुत ज्यादा थकान महसूस करता है लेकिन बिस्तर पर लेटने पर भी नींद आने का नाम नहीं लेती। अगर आप भी इसी समस्या से गुजर रहे हैं तो हो सकता है कि आप भी उन चीजों का सेवन कर रहे हों जो नींद भगाने का काम करती हों। असल में नींद को प्रभावित करने वाले बहुत से फूड हैं जिनका जाने अनजाने या फिर अत्याधिक सेवन भी अनिद्रा और बेचैनी का कारण बनता है। कुछ ऐसे योगासन हैं जो एंग्ज़ाइटी को जड़ से खत्म कर मन में शांति और विश्वास बढ़ाता है। योग धीरे-धीरे, मगर अद्भुत रूप से असर करते हैं।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

एंग्ज़ाइटी में सांसें ही सबसे पहले बिखरती हैं। उन्हें दोबारा पकड़ो। यानी अनुलोम-विलोम दिमाग की दो विपरीत दिशाओं को संतुलित कर तनाव को कम कर देता है। इसके अभ्यास के लिए सांसों पर नियंत्रण रखा जाता हैं। अनुलोम विलोम एक विशिष्ट प्रकार का योग है, जिसमें श्वास को नियंत्रित करके अभ्यास किया जाता है। इसे प्राणायाम भी कह सकते हैं। इस श्वास अभ्यास को रोजाना करने से तनाव कम होता है और बेहतर श्वास व रक्त परिसंचरण को बनाए रखने में मदद मिलती है। अनुलोम विलोम का अभ्यास करने के कई फायदे हैं। कई शोध से पता चला है कि अनुलोम विलोम का अभ्यास करने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, गठिया, माइग्रेन का दर्द, गंभीर अवसाद आदि से राहत मिलती है। अगर सही तरीके से रोजाना अनुलोम विलोम का अभ्यास किया जाए तो शरीर और मस्तिष्क दोनों स्वस्थ बना रहता है। शारीरिक समस्याओं से बचाव के अलावा मानसिक स्थिति भी मजबूत होती है। अनुलोम विलोम करने से अवसाद, तनाव और चिंता दूर होती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे श्वसन समस्याओं वाली बीमारी ठीक करने में अनुलोम विलोम फायदेमंद है।

बालासन

तनाव या अवसाद महसूस हो तो बालासन का अभ्यास करें। इस आसान में घुटनों पर बैठकर थोड़ा झुकना होता है, जिससे मन को कुछ विश्राम मिलता है। बालासन नर्वस सिस्टम को शांत करता है और चिंता को कम करता है। इसके अलावा बालासन कूल्हों, जांघों, और टखनों में मामूली सा खिचाव लाता है। बालासन से शरीर की खोई हुई ऊर्जा वापस आती है दिमाग़ को शांत करता है। जब बालासन को सिर और धड़ को सपोर्ट करके किया जाता है, तब यह पीठ और गर्दन में दर्द से छुटकारा दिलाता है। बालासन संपूर्ण शरीर को आराम देता है। इस आसन के अभ्यास से शरीर को आराम और ताजगी महसूस होती है।

शवासन

ये आसन शांत लेटने की कला है। इसमें शरीर को छोड़ देना होता है और दिमाग को खाली करना होता है। शवासन में शरीर-मन पूरी तरह रिलैक्स होते हैं और नर्वस सिस्टम रीस्टार्ट होता है। इसलिए किसी भी तरह का योग करने के बाद शवासन करना आपके ओवरऑल बॉडी के लिए जरूरी है। योग करने के बाद शवासन, शरीर की रिकवरी प्रक्रिया है, जो आपके द्वारा योग के दौरान शरीर पर डाले गए सभी दबाव के बाद की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान आपका शरीर संतुलन में वापस आता है। जब आप किसी भी तरह की कसरत करते हैं तो आपके बॉडी पार्ट ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, और शवासन करने से वो वापस नॉर्मल हो जाते हैं। यह तक की आपके हार्मोन भी नॉर्मल हो जाते हैं। इसके अलावा, यह आरामदायक मुद्रा शरीर को अच्छा महसूस कराने वाले न्यूरोकेमिकल्स को भी बढ़ावा देती है, जो पूरे दिन आपके मूड को अच्छा रखने में मदद करती है। शवासन के दौरान, आपके शरीर को अन्य योग के फायदों को पाने में मदद मिलती है। आप अपने शरीर के हर हिस्से को जागरूक करते हैं ताकि आपको आराम मिल सके। आपके शरीर को अभ्यास के दौरान होने वाले तनाव से उबरने का समय मिलता है। शवासन आपके शरीर और मन को स्थिर करने और शांति से आराम करने में भी सक्षम बनाता है।

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