BMC नतीजों के बाद Maharashtra में सियासत तेज, Shiv Sena Uddhav गुट ने कहा- असली खेल शुरू

मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद भले ही महायुति खुद को विजेता बता रही हो...लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा असहज और बेचैन करने वाली है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी दिख रही है….जहां हर जीत संदिग्ध है और हर मुस्कान के पीछे डर छिपा है…

मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद भले ही महायुति खुद को विजेता बता रही हो…लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा असहज और बेचैन करने वाली है…….एक ओर जहां BJP ने अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है….लेकिन सत्ता की ये सफलता भरोसे से नहीं…बल्कि डर से घिरी नजर आ रही है…..वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को अपने सबसे मजबूत किले मुंबई में झटका जरूर लगा है…लेकिन राजनीतिक रूप से वो पूरी तरह हारी नहीं दिखती….बल्कि नतीजों के बाद जो हलचल शुरू हुई है…उसने साफ कर दिया है कि असली लड़ाई अब शुरू हुई है…नतीजों के तुरंत बाद मुंबई में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की वापसी ने कई पुराने जख्म हरे कर दिए हैं….

डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में ठहराने का फैसला लिया….ऐसे में सवाल ये है कि अगर सब कुछ इतना मजबूत है….बहुमत इतना साफ है…तो फिर इतनी सुरक्षा और घेराबंदी की जरूरत क्यों पड़ रही है?…लोकतंत्र में चुने गए प्रतिनिधियों को जनता के बीच होना चाहिए…न कि फाइव स्टार होटलों में बंद होना चाहिए………

ये वही राजनीति है…जिसने 2022 में महाराष्ट्र की चुनी हुई सरकार गिराई थी…एकनाथ शिंदे वही नेता हैं…जिन्होंने सत्ता के लिए बगावत का रास्ता चुना था…जून 2022 में उन्होंने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में तोड़ा….पहले सूरत, फिर गुवाहाटी और उसके बाद गोवा के रिजॉर्ट….पूरी पटकथा देश ने देखी…अब उसी बगावत ने महाविकास अघाड़ी सरकार को गिराया और BJP की बैसाखी पर शिंदे मुख्यमंत्री बने….आज हालात फिर उसी दिशा में जाते दिख रहे हैं…….यहां फर्क बस इतना है कि इस बार डर सत्ता पक्ष में है…

जहां करीब साढ़े तीन साल बाद महाराष्ट्र में फिर वही सवाल उठ खड़े हुए हैं कि…क्या विधायक और पार्षद सुरक्षित हैं या सत्ता असुरक्षित है?…अगर महायुति को अपनी जीत पर भरोसा होता…तो पार्षदों को होटल में छिपाने की नौबत नहीं आती…..ये कदम साफ इशारा करता है कि अंदरखाने कुछ ठीक नहीं चल रहा है….राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सत्ता की इमारत बाहर से मजबूत दिख सकती है…लेकिन अंदर से उसमें दरारें पड़ चुकी हैं…..जहां संख्या बल की बात करें तो तस्वीर उतनी साफ नहीं….जितनी दिखाई जा रही है…

BMC की 227 सीटों वाली परिषद में बहुमत का आंकड़ा 114 है….जहां BJP को 89 सीटें मिली हैं और शिंदे गुट को 29 सीटें मिली हैं…..यानी दोनों मिलाकर 118 सीटें होती हैं….यानी बहुमत से सिर्फ 4 सीटें ज्यादा……वहीं अजित पवार गुट की NCP को 3 सीटें मिली हैं….जिनके समर्थन को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है….ऐसे में ये बेहद नाजुक स्थिति है….जहां महज 8 पार्षद इधर-उधर होते ही पूरा खेल पलट सकता है और यही मामूली अंतर महायुति की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आया है….दूसरी ओर विपक्षी खेमे ने कुल 106 सीटें जीती हैं…..जिसमें शिवसेना (UBT) को 65, कांग्रेस को 24, AIMIM को 8, मनसे को 6, समाजवादी पार्टी को 2 और शरद पवार गुट की NCP को 1 सीट मिली है…अगर ये दल एकजुट होते हैं…..तो विपक्षी महाविकास अघाडी बहुमत से सिर्फ 8 सीट दूर हैं…..यही गणित महायुति की नींद उड़ाने के लिए काफी है……

कथिततौर पर इसी डर की वजह से एकनाथ शिंदे ने अपने पार्षदों को होटल में शिफ्ट किया है….राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ये कदम सिर्फ विपक्ष के डर से नहीं……बल्कि अंदरूनी टूट की आशंका से उठाया गया है……अब सवाल ये भी है कि जिन नेताओं ने खुद टूट-फूट की राजनीति की……क्या अब वही अपने साथियों पर भरोसा खो चुके हैं?……..खैर, महायुति के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है……इसकी झलक मेयर पद को लेकर चल रही खींचतान में भी साफ दिखती है….जहां BJP चाहती है कि मुंबई का मेयर उसका हो….ताकि देशभर में ये संदेश जाए कि पार्टी ने शिवसेना के सबसे बड़े गढ़ को भी पूरी तरह फतह कर लिया है…..तो वहीं एकनाथ शिंदे के लिए ये पद सिर्फ एक कुर्सी नहीं….बल्कि राजनीतिक अस्तित्व का सवाल है….दशकों तक मुंबई में शिवसेना का मेयर रहा है और अगर इस बार ये पद BJP के पास चला गया…..तो शिंदे का बाल ठाकरे की विरासत वाला दावा और कमजोर पड़ जाएगा…..

यही वजह है कि महायुति के भीतर तनाव बढ़ता जा रहा है…..इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच टकराव की अटकलें तेज हैं…..सामना के संपादकीय में भी इस ओर इशारा किया गया है कि सत्ता साझेदारों के बीच भरोसे की कमी साफ दिख रही है…..ऐसे में उद्धव ठाकरे इस पूरे घटनाक्रम के बीच पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं……उन्होंने शिंदे पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग एक बार पार्टी छोड़ सकते हैं, वे दोबारा भी ऐसा कर सकते हैं…..ये बयान सिर्फ तंज नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक संदेश है…….जिसके जरिए उद्धव ठाकरे जानती-समझती रणनीति के तहत ये संकेत दे रहे हैं कि महायुति की एकता सिर्फ दिखावा है…….

यही नहीं शिवसेना (UBT) के मुखपत्र सामना ने भी महायुति पर तीखा हमला बोला है…..संपादकीय में कहा गया है कि सामना में कहा गया कि BJP की चुनाव में जीत विकास की वजह से नहीं, बल्कि पैसे, मशीनरी और दबाव की राजनीति की वजह से हुई है…. लेख में साफ लिखा गया है कि….चुनाव खत्म हो गए हैं…लेकिन असली राजनीति अभी बाकी है….शिवसेना (UBT) का दावा है कि मुंबई की पहचान और मराठी अस्मिता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है….इसका अगला अध्याय जल्द लिखा जाएगा……..सामना ने यह भी याद दिलाया कि….शिवसेना ने मुंबई को 23 मराठी मेयर दिए हैं…..इस आर्टिकल में सवाल किया गया है कि क्या ये परंपरा आगे भी जारी रहेगी…..

वहीं इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच टकराव होने का दावा भी किया गया है….शिवसेना (UBT) का दावा है कि मुंबई की पहचान और मराठी अस्मिता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है…पार्टी का कहना है कि BMC सिर्फ एक नगर निगम नहीं, बल्कि मुंबई की आत्मा है, और इस आत्मा को सत्ता के खेल में कुचला नहीं जा सकता….

वहीं सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मेयर के सवाल पर कहा कि…महायुति के सभी नेता मिलकर फैसला लेंगे….लेकिन ये बयान भी कई सवाल खड़े करता है….क्योंकि अगर सब कुछ तय है….तो फैसला लेने में देरी क्यों?….क्या अंदरखाने सहमति नहीं बन पा रही?………उधर उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से साफ कहा है कि उनका सपना अब भी मुंबई में शिवसेना (UBT) का मेयर बनाना है….इस बयान से साफ है कि विपक्ष हार मानने को तैयार नहीं है……सीएम फडणवीस ने भले ही हल्के अंदाज में कहा हो कि…..ऊपर वाला तय कर चुका है….लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में ऊपर वाले से ज्यादा नीचे का गणित मायने रखता है….

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि….क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर सरकार बदलने की पटकथा लिखी जा रही है?…..क्योंकि, इतिहास गवाह है कि महाराष्ट्र में जब भी रिजॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू हुई है….सत्ता की कुर्सी डगमगाई है और आज फिर वही हालात बनते दिख रहे हैं….जहां फर्क बस इतना है कि इस बार सत्ता में बैठे लोग खुद असुरक्षित नजर आ रहे हैं…..जहां नतीजों के बाद जो बेचैनी, जो डर और जो घबराहट दिख रही है…वो महायुति की जीत पर बड़ा सवाल खड़ा करती है कि अगर बहुमत इतना मजबूत होता, तो न होटल की जरूरत पड़ती, न टूट-फूट का डर सताता…..

इन सब के बीच शिवसेना (UBT) का दावा है कि असली खेल अब शुरू हुआ है और इस खेल में आखिरी चाल चलनी अभी बाकी है…..फिलहार दोस्तों, मुंबई की राजनीति से उठने वाली ये लहर अब पूरे महाराष्ट्र की सत्ता को हिला सकती है….ऐसे में सवाल सिर्फ BMC का नहीं….बल्कि राज्य की सरकार का है……..इस डर के बीच सवाल अब ये उठता है कि क्या महायुति अपने ही डर में बिखर जाएगी?…..क्या उद्धव ठाकरे एक बार फिर सत्ता के खेल को पलटने में कामयाब होंगे?……..इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे…….लेकिन इतना तो तय है कि महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान अभी थमा नहीं है….देखने वाली बात होगी कि क्या सच में इस खेल में आखिरी चाल चलनी अभी बाकी है.

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