Maharashtra की सियासत में बड़ा धमाका! Shinde के साथ होने वाला है ‘खेला’? Sanjay Raut ने बढ़ाई हलचल!

संजय राउत ने साफ कहा है कि बीजेपी किसी भी हाल में एकनाथ शिंदे के गुट को मुंबई का मेयर नहीं बनने देगी

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीते कई दिनों से मुंबई की राजनीति में एक अलग ही हलचल देखी जा रही है….

जहां BMC मेयर चुनाव से पहले ऐसा उलटफेर हुआ है…जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को 360 Degree घुमा दिया है….नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद जहां महायुति खेमे में जीत का जश्न दिख रहा था…तो वहीं दूसरी ओर कथिततौर पर महायुति के अंदर बीजेपी…..डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना के खिलाफ ऐसी चाल चल रही है….जिससे माना जा रहा है कि मुंबई BMC चुनाव में बड़ा खेला हो सकता है…

जिससे मुंबई की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है और इसकी वजह बना है शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत का एक बयान…दरअसल, BMC चुनाव नतीजों के बाद जहां सभी की निगाहें मेयर की कुर्सी पर टिकी हुई हैं…तो वहीं दूसरी ओर संजय राउत के शब्दों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है…संजय राउत ने साफ कहा है कि बीजेपी किसी भी हाल में एकनाथ शिंदे के गुट को मुंबई का मेयर नहीं बनने देगी…उन्होंने ये भी दावा किया कि मुंबई का अगला मेयर वही होगा जिसे उद्धव ठाकरे चाहेंगे…भले ही वो किसी भी पार्टी का हो…..लेकिन मेयर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का नहीं होगा…….दोस्तों, संजय राउत का ये बयान सिर्फ एक बयान नहीं माना जा रहा….बल्कि इसके पीछे बड़ी सियासी रणनीति की बू साफ तौर पर महसूस की जा रही है…

इसे लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये बयान इस बात का संकेत है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है….खासतौर पर तब, जब संजय राउत ये भी कहते हैं कि पर्दे के पीछे की कहानी अभी बाकी है…यानी साफ है कि अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है और फिलहाल ठाकरे गुट वेट एंड वॉच की भूमिका में है…यहां तक कि उद्धव गुट ने फैसला लिया है कि अगर बीजेपी का उम्मीदवार मेयर बना…तो उनके सभी पार्षद वोटिंग से दूर रहेंगे….

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उद्धव ठाकरे एकनाथ शिंदे को रोकने के लिए बीजेपी के साथ कोई गुप्त समझौता कर सकते हैं….क्योंकि राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो शिंदे को बीएमसी से दूर रखना ठाकरे गुट की सबसे बड़ी प्राथमिकता है…..क्योंकि, BMC सिर्फ एक नगर निगम नहीं…बल्कि ठाकरे परिवार की सियासी ताकत का सबसे मजबूत गढ़ रहा है…पिछले 25 सालों तक शिवसेना ने मुंबई महानगरपालिका पर राज किया है…

2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया…उस बगावत के बाद उद्धव ठाकरे सत्ता से बाहर हो गए और बीजेपी के साथ एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बन गए…तभी से ठाकरे गुट और शिंदे गुट के बीच की दुश्मनी खुलकर सामने है…बीएमसी चुनाव को ठाकरे गुट शिंदे से बदले की लड़ाई के रूप में देख रहा है…बीएमसी चुनाव नतीजों में बीजेपी गठबंधन को बहुमत मिला है….लेकिन मेयर की कुर्सी अब भी फंसी हुई है…यहीं से सियासी जोड़-तोड़ का खेल शुरू हो गया है…बीजेपी के पास सबसे ज्यादा सीटें जरूर हैं…लेकिन उसे स्थायी सत्ता के लिए सहयोगियों की जरूरत है…

वहीं शिंदे गुट चाहता है कि बीजेपी उसे समर्थन देकर मेयर बनाए…लेकिन संजय राउत के बयान ने इस पूरे खेल को उलट कर रख दिया है…राउत ने सीधे तौर पर कह दिया कि बीजेपी शिंदे का मेयर नहीं बनाएगी….इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या बीजेपी और ठाकरे गुट के बीच कोई अंदरूनी समझ बनी है….क्या वही बीजेपी, जिसने उद्धव ठाकरे की सरकार गिराई थी…..अब शिंदे को धोखा देने जा रही है?…

देखिए, राजनीति में कोई किसी का न तो दोस्त होता है और न ही दुश्मन होते हैं…..ये हम सभी जानते हैं कि…राजनीतिक फायदे के लिए…कब, कौन, किस दल के साथ शामिल हो जाए…कुछ कहा नहीं जा सकता…और ये बात एक बार फिर मुंबई में साबित होती दिखाई दे रही है…अगर उद्धव ठाकरे और बीजेपी किसी साझा उम्मीदवार पर सहमत होते हैं….तो शिंदे पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकते हैं…यही वजह है कि इसे एकनाथ शिंदे के साथ धोखा कहा जा रहा है…क्योंकि सत्ता में रहकर भी शिंदे बीएमसी जैसे अहम मोर्चे पर मात खा सकते हैं…संजय राउत का आत्मविश्वास भी कई सवाल खड़े करता है…वो यह कैसे इतने यकीन के साथ कह सकते हैं कि अगला मेयर उद्धव ठाकरे की पसंद का होगा…

यही नहीं…संजय राउत ने ये भी कह कि….इतिहास में पहली बार हो रहा है कि मुंबई का मेयर दिल्ली से चुना जाएगा। भाजपा का हाई कमान इस पर फैसला लेगा…

संजय राउत ने कहा कि…मुंबई का मेयर दिल्ली से चुना जाएगा और भाजपा का हाई कमान इस पर फैसला लेगा…..और तो और ये कहना कि अगला मेयर उद्धव ठाकरे की पसंद का होगा…..इसका मतलब साफ है कि ठाकरे गुट के पास कोई मजबूत बैकडोर प्लान जरूर है…और यही प्लान शिंदे गुट के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है…….वहीं बीजेपी की मजबूरी भी समझी जा सकती है…अगर वो शिंदे को ज्यादा ताकत देती है….तो भविष्य में शिंदे बीजेपी के लिए ही चुनौती बन सकते हैं…..क्योंकि BMC पर कब्जा एकनाथ शिंदे को आर्थिक और संगठनात्मक रूप से बेहद मजबूत बना देगा…शायद यही वजह है कि बीजेपी शिंदे को पूरी छूट देने के मूड में नहीं है…

वहीं उद्धव ठाकरे के लिए ये सुनहरा मौका है…जिसमें बीजेपी से सीधे गठबंधन किए बिना….सिर्फ समर्थन देकर वो शिंदे को बड़ा झटका दे सकते हैं….इससे ठाकरे गुट को नैतिक जीत भी मिलेगी और बदले की राजनीति भी पूरी होगी……यही कारण है कि राउत वेट एंड वॉच की बात कर रहे हैं…

जबकि, सियासी हलकों में ये चर्चा तेज है कि ठाकरे गुट का लक्ष्य सिर्फ एक है…किसी भी कीमत पर शिंदे को बीएमसी से दूर रखना…चाहे इसके लिए बीजेपी को अप्रत्यक्ष समर्थन ही क्यों न देना पड़े…यही रणनीति आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय कर सकती है…अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि बीजेपी अगला कदम क्या उठाती है….क्या वो शिंदे के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी…या फिर उद्धव ठाकरे के इशारों पर चलकर नया सियासी खेल खेलेगी…

लेकिन, फिलहाल इतना तो तय है कि शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के बयान ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की नींद उड़ा दी है…BMC की सत्ता अब सिर्फ नगर निगम की लड़ाई नहीं रह गई है…..ये लड़ाई है भरोसे, धोखे और बदले की राजनीति की….और इस लड़ाई में सबसे बड़ा सवाल यही है कि….क्या एकनाथ शिंदे के साथ वाकई बहुत बड़ा धोखा होने वाला है?…….

Related Articles

Back to top button