मदरसों पर योगी सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, 24 घंटे में खोलने का अल्टीमेटम
अदालत ने न सिर्फ योगी सरकार को आड़े हाथ लिया है बल्कि योगी सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि हर हाल में 24 घंटे के अंदर मदरसे को खोला जाएगा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मदरसों को अवैध घोषित कर सील किए जाने की कार्रवाई पर हाईकोर्ट का हंटर योगी सरकार पर चला है। अदालत ने न सिर्फ योगी सरकार को आड़े हाथ लिया है बल्कि योगी सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि हर हाल में 24 घंटे के अंदर मदरसे को खोला जाएगा।
बड़ी खबर यह है कि हाईकोर्ट ने सिर्फ यहीं नहीं रुका बल्कि उसनेे ये बात पूरी तरह से साफ कर दी कि पूरे प्रदेश में बिना किसी रोक टोक के मदरसे चलाए जा सकते हैं और जैसे ही हाईकोर्ट का ये आदेश सामने आया है हडकंप मच गया है। एक ओर जहां मुस्लिम समुदाय उत्साहित है तो वहीं दूसरी ओर योगी सरकार सुप्रीम अदालत में जाने की तैयारी में जुट गई है।
पिछले दिनों देश के हिस्सों, खासकर यूपी में अवैध मदरसों को लेकर योगी सरकार ने एक बड़ा अभियान चलाया। मई 2025 तक की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सीमा से सटे जिलों जैसे श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर में अवैध रूप से संचालित और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए गए लगभग 82 मदरसों को सील या बंद कर दिया गया था। अकेले श्रावस्ती जिले में अप्रैल 2025 में 10 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे बंद किए गए।
इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम ने मार्च 2024 में राज्य के लगभग 13 हजार अवैध मदरसों को बंद करने की सिफारिश की थी, क्योंकि वे अपनी फंडिंग के स्रोतों का खुलासा करने में विफल रहे थे। सितंबर 2024 तक मानकों का पालन न करने के कारण लगभग 513 मदरसों की मान्यता समाप्त कर दी गई थी। जनवरी 2026 में विदेशी फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में आजमगढ़ और संत कबीर नगर के दो और मदरसों की मान्यता रद्द की गई।
नेपाल सीमा का हवाला देकर श्रावस्ती के जिन मदरसों को हवाला देकर बंद किया गया था इसमें एक मदरसा अहले सुन्नत ईमाम अहमद रजा को भी बंद कर दिया गया था ये मदरसा भी राज्य मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं हो सका था और इस मदरसे को अवैध बताते हुए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मदरसे को सीज करते हुए बंद करा दिया था और मदरसे के लोगों ने जिला के अफसर के आदेशों के खिलाफ अदालत का रुख किया था।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा पिछले साल मई में पारित आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा को राज्य मदरसा बोर्ड द्वारा मान्यता न मिलने के आधार पर बंद करने का निर्देश दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के गैर मान्यता प्राप्त यानी प्राइवेट मदरसे को 24 घंटे में खोलने का आदेश दिया है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक गैर-मान्यता प्राप्त मदरसा मान्यता मिलने तक किसी सरकारी अनुदान का दावा नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि कानून में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है जो अधिकारियों को मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता न मिलने के कारण उसके संचालन और उसे बंद करने या रोकने की अनुमति देता हो। हाईकोर्ट के इस फैसले का एक अर्थ यह भी है कि यूपी में प्राइवेट मदरसे बेरोकटोक चलाए जा सकते हैं। पिछले दिनों ऐसी ही कमियों के आधार पर यूपी की योगी सरकार ने कई मदरसों पर बुलडोज़र चला दिए थे। अदालत ने आदेश दिया कि मदरसे के प्रवेश द्वार पर लगाई गई सील मुहर आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने के 24 घंटों के भीतर खोली जाए।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियम, 2016 के नियम 13 में प्रावधान है कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसा को कोई राज्य अनुदान नहीं मिलेगा, लेकिन इसमें यह नहीं कहा गया है कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे सरकार से कोई अनुदान नहीं मांग रहे थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में अंजुम कादरी बनाम भारत संघ मामले में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया था। पहली श्रेणी, जो संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत संरक्षित है, उन मदरसों से संबंधित है जो राज्य से कोई सहायता या मान्यता नहीं मांगते, जबकि दूसरी श्रेणी उन मदरसों की है जो सहायता चाहते हैं। तीसरी श्रेणी उन मदरसों की है जो केवल मान्यता चाहते हैं लेकिन सहायता नहीं। अनुच्छेद 30(1), जो सहायता या मान्यता की आवश्यकता न रखने वाले मदरसों की रक्षा करता है, सभी अल्पसंख्यकों चाहे धार्मिक हों या भाषाई को अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थान स्थापित करने और प्रशासित करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है, ताकि वे अपनी अलग संस्कृति, लिपि और भाषा को संरक्षित रख सकें। याचिकाकर्ता मदरसे ने तर्क दिया कि वह पहली श्रेणी में आता है क्योंकि वह न मान्यता मांग रहा था और न ही सहायता, और संविधान के तहत संरक्षित है।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसा अनावश्यक जटिलताएं पैदा कर सकता है क्योंकि छात्रों को उससे प्राप्त योग्यता के आधार पर कोई लाभ दावा करने का हक नहीं होगा। इन तर्कों को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि गैर-मान्यता के आधार पर मदरसे के संचालन पर रोक लगाने वाला कोई नियम नहीं है। ऐसे में प्राईवेट मदरसों पर रोक का कोई भी प्राविधान नहीं लागू होता है और हाईकोर्ट ने यह बात पूरी तरह से साफ भी कर दी है कि कोई भी मदरसा इस वजह से नहीं बंद कराया जा सकता है कि उसके पास मान्यता नहीं है। फैसला आने से एक ओर जहां योगी सरकार बुरा फंस गई है तो दूसरी ओर मुस्लिमों में मदरसों के हक में फैसला आने का उत्साह देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर दिए गए ऐतिहासिक फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने इसे भारत के संविधान की सर्वाेच्चता और उसके मूल सिद्धांतों की स्पष्ट पुष्टि बताया। मौलाना मदनी ने कहा कि यह फैसला उन सरकारों और अधिकारियों के लिए कड़ी फटकार है जो गैर मान्यता प्राप्त मदरसों और मक्तबों को बंद करने को उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां न केवल असंवैधानिक थीं बल्कि अंततः उनके लिए शर्मिंदगी का कारण बनीं। उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद श्रावस्ती जिले के तीस मदरसों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कानूनी कार्यवाही कर रही है, और संगठन उत्तराखंड सरकार की कार्रवाइयों के खिलाफ भी लोकतांत्रिक उपाय तलाश रहा है।
मौलाना मदनी ने कहा कि यह फैसला हमारी चल रही कोशिशों को काफी मजबूती प्रदान करता है। साथ ही, उन्होंने मदरसा चलाने वालों को सलाह दी कि वे अपने मैनेजमेंट और शैक्षिक मानकों को लगातार बेहतर बनाते रहें ताकि किसी भी हस्तक्षेप के लिए कोई बहाना न बचे। मौलाना मदनी ने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल मान्यता न होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद करना, सील करना या उसके संचालन में बाधा डालना आधार नहीं बन सकता। अदालत ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा विनियम प्रशासन को गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे को बंद करने का कोई अधिकार नहीं देते।
योगी सरकार का दावा है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 8,449 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे चिह्नित हैं, जबकि कुल मदरसों की संख्या लगभग 25,000 है। सरकार गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को अवैध मानकर चलती है और आए दिन मदरसों पर शिकंजा कसने की तैयारी करती है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक मदरसे की जीत नहीं है, बल्कि यह उस हर नागरिक की जीत है जो कानून में विश्वास रखता है। योगी सरकार को इस झटके से सबक लेना चाहिए। सत्ता अहंकार के लिए नहीं, सेवा के लिए होती है। डराने-धमकाने और ताले लटकाने से प्रदेश का विकास नहीं होगा।



