AAP की ‘परिवर्तन सभा’ में जनसैलाब | चैतर वसावा का बड़ा दावा | 30 साल के शासन पर जनता नाराज

छोटाउदयपुर में आम आदमी पार्टी की ‘परिवर्तन सभा’ में भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी देखी गई... सभा के दौरान सड़क, बस और पानी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के छोटा उदयपुर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.. आम आदमी पार्टी ने कदवाल-वडोद गांव में ‘परिवर्तन सभा’ का आयोजन किया.. इस सभा में AAP विधायक चैतर वसावा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला.. और उन्होंने कहा कि पिछले 30 सालों में भाजपा ने आदिवासी इलाकों में कोई विकास नहीं किया.. सभा में युवराजसिंह जाडेजा, जिला प्रमुख राधिका राठवा सहित कई कार्यकर्ता.. और स्थानीय लोग शामिल हुए.. सभा का मुख्य मुद्दा बस सुविधा की कमी, सड़कों का अभाव, मनरेगा में रोजगार न मिलना.. और नल से जल योजना का फेल होना था.. वसावा ने चेतावनी दी कि अगर समस्याएं हल नहीं हुईं तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा.. यह सभा AAP की गुजरात में बढ़ती सक्रियता का हिस्सा है.. जो नगर निगम चुनावों से पहले संगठन मजबूत करने में लगी है.. BJP को यह चुनौती पसंद नहीं आ रही है..

आपको बता दें कि 22 जनवरी को छोटा उदयपुर जिले के कदवाल-वडोद में AAP की ‘परिवर्तन सभा’ हुई.. यह सभा गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले हुई.. जो प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है.. सभा में AAP के देदियापाड़ा विधायक चैतर वसावा मुख्य प्रवक्ता थे.. उनके साथ युवराजसिंह जाडेजा और जिला प्रमुख राधिका राठवा भी मौजूद रहीं.. सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए.. जो आदिवासी बहुल इलाके से आए थे.. सभा का मकसद था स्थानीय समस्याओं को उजागर करना.. और लोगों को AAP के साथ जोड़ना था..

जानकारी के अनुसार कदवाल-वडोद छोटा उदयपुर का एक ग्रामीण इलाका है.. जहां आदिवासी समुदाय की बहुलता है.. यहां की आबादी मुख्य रूप से भिल, राठवा और अन्य जनजातियों से है.. सभा में लोग अपने दैनिक जीवन की परेशानियों को लेकर आए थे.. युवराजसिंह जाडेजा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं में बदलाव की चाहत है.. राधिका राठवा ने महिलाओं की समस्याओं पर बात की.. वहीं यह AAP की ‘गुजरात जोड़ो’ अभियान का हिस्सा है.. जो राज्य में संगठन विस्तार के लिए चल रहा है..

आपको बता दें कि चैतर वसावा ने सभा में भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला.. और उन्होंने कहा कि छोटा उदयपुर में भिकापुर से ऊपर के 35 से 40 गांवों में बस सुविधा नहीं है.. कई गांवों में सड़कें तक नहीं बनीं.. जिससे लोगों को आने-जाने में मुश्किल होती है.. एक तरफ सरकार आजादी का अमृत महोत्सव, गौरव यात्रा और विकास सप्ताह मना रही है.. लेकिन दूसरी तरफ आदिवासी इलाकों में 30 सालों से कोई विकास नहीं हुआ.. उन्होंने मनरेगा योजना का जिक्र किया, जिसमें रोजगार नहीं मिल रहा.. नल से जल योजना में पानी नहीं आता.. जिससे ग्रामीणों को दूर से पानी लाना पड़ता है..

वसावा ने लोगों के आक्रोश को उजागर किया.. उन्होंने कहा कि जनता भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है.. अगर समस्याएं हल नहीं हुईं तो AAP विधानसभा का घेराव करेगी.. यह चेतावनी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है.. क्योंकि गुजरात में AAP विपक्षी भूमिका निभा रही है.. वसावा का भाषण आदिवासी मुद्दों पर केंद्रित था.. जो गुजरात में AAP की मुख्य रणनीति है.. उन्होंने कहा कि भाजपा ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक बनाया है.. लेकिन अधिकार नहीं दिए..

छोटा उदयपुर गुजरात का एक आदिवासी बहुल जिला है.. जो 2013 में वडोदरा से अलग होकर बना.. यहां की आबादी लगभग 11 लाख है.. जिसमें 90% से ज्यादा आदिवासी हैं.. जिले में 6 तालुका हैं.. छोटा उदयपुर, कवांत, जेतपुर पावी, संखेड़ा, नासवाड़ी और पावी जेतपुर.. कदवाल-वडोद जैसे गांव ग्रामीण और पिछड़े हैं.. यहां मुख्य समस्या परिवहन की कमी है.. RTI से पता चला कि जिले में 200 से ज्यादा गांवों में बस सेवा नहीं है.. सड़कें खराब हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं..

जानकारी के अनुसार मनरेगा में भी समस्या है.. 2025-26 में गुजरात में मनरेगा के तहत सिर्फ 50% लक्ष्य हासिल हुआ.. और छोटा उदयपुर में यह और कम है.. लोग काम मांगते हैं, लेकिन मिलता नहीं है.. नल से जल योजना में 70% घरों में पानी पहुंचा.. लेकिन आदिवासी इलाकों में सिर्फ 40% ही काम हुआ.. वहीं भाजपा सरकार का दावा है कि विकास हो रहा है.. लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि हाइड्रो प्रोजेक्ट्स.. और रेयर अर्थ माइनिंग से जमीन छिन रही है.. विकास नहीं हो रहा है.. जनवरी 2026 में ही छोटा उदयपुर में हाइड्रो प्रोजेक्ट पर विरोध प्रदर्शन हुए.. जिसमें AAP शामिल थी..

भाजपा के 30 सालों के शासन में गुजरात विकास मॉडल के नाम से जाना जाता है.. लेकिन आदिवासी जिलों में असमानता है.. छोटा उदयपुर में साक्षरता दर 50% से कम है.. स्वास्थ्य सुविधाएं कमजोर हैं.. सरकारी रिपोर्ट्स कहती हैं कि 2020-25 में जिले में 500 किमी सड़कें बनीं.. लेकिन ग्रामीण इलाकों में नहीं बनीं.. बस सेवा पर भी बजट कम है.. यह मुद्दे सभा में उठाए गए.. जो स्थानीय लोगों की वास्तविकता हैं..

 

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