बारामती एयरपोर्ट पर सवाल: DGCA ने क्यों कहा अनियंत्रित?

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया. पुणे के पास बारामती एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे में उनकी जान गई.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया. पुणे के पास बारामती एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे में उनकी जान गई.

इस घटना के बाद महाराष्ट्र का ये एयरपोर्ट सवालों के घेरे में है. वो एयरपोर्ट जहां VVIP लोगों के विमानों की लैंडिंग होती है आखिर क्यों उसपर किसी का ध्यान नहीं जाता. DGCA खुद भी कह रहा है कि ये अनियंत्रित हवाई अड्डा है. ये एयरपोर्ट ऑथरिटी के अंतर्गत भी नहीं आता है. तो महाराष्ट्र का ये एयरपोर्ट फिर किसके भरोसे चलता है.

बारामती एयरपोर्ट पुणे से 95 किमी की दूरी पर है. इसके परिसर में दो ट्रेनिंग एकेडमी हैं. रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी और एकेडमी ऑफ कार्वर एविएशन प्राइवेट लिमिटेड. इस फील्ड से उड़ान भरने वाले कई विमानों के साथ दुर्घटनाएं हुई हैं. हालांकि, रिपोर्ट की गई किसी भी घटना में कोई मौत नहीं हुई थी.

विमान हादसे के बाद महाराष्ट्र का बारामती एयरपोर्ट सवालों के घेरे में है. जिस एयरपोर्ट पर VVIP लोगों का विमान उतरता है वो आखिर किसके भरोसे चलता है. इस एयरपोर्ट की स्थिति का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ट्रेनिंग करने वाले छात्र यहां का ATC संभालते हैं. DGCA ने भी कहा है कि ये अनियंत्रित हवाई अड्डा है.

कौन करता है मैनेज?
महाराष्ट्र एयरपोर्ट्स डेवलेपमेंट कंपनी (MADC) की वेबसाइट के मुताबिक, बारामती महाराष्ट्र के 15 घरेलू बिना लाइसेंस वाले एयरपोर्ट में से एक है. ये महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) के हवाले है. इसको बारामती एयरपोर्ट लिमिटेड (BAL) मैनेज करती है.

इस एयरपोर्ट पर 7710 फीट लंबा रनवे है. बारामती एयरफील्ड के मैनेजर शिवाजी तवारे ने  कहा, हवाई पट्टी को सबसे पहले 90 के दशक में बनाया गया था. ये 450 एकड़ में फैला है. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर हर महीने 6 से 7 चार्टर फ्लाइट उतरती हैं, जिसमें से ज्यादतर नेताओं की होती हैं. एयरफील्ड को 2009 में डेवलपमेंट के लिए रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनियों को लीज पर दिया गया था, लेकिन डेवलपमेंट और फ्लाइट्स की कमी के कारण MIDC ने 2025 में इस पर फिर से कब्जा कर लिया.

एयरपोर्ट परिसर में दो केबिन और एक कमरा
बारामती एयरपोर्ट की बिल्डिंग में दो केबिन और एक कमरा है. हादसे वाले दिन यानी बुधवार को एयरपोर्ट पर अधिकारियों से ज्यादा मीडियाकर्मी मौजूद थे. एयरफील्ड पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात थी और पूरे दिन मंत्री दुर्घटनास्थल का दौरा करते रहे.

इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल मुख्य तौर पर ट्रेनिंग के लिए किया जाता है. इस फैसिलिटी में सिर्फ एक फ्लाइंग स्कूल द्वारा चलाया जाने वाला बेसिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सेटअप है. DGCA के अनुसार, फैसिलिटी में ATC सपोर्ट या तो वहां इस्तेमाल होने वाले फ्लाइंग स्कूलों के स्टूडेंट्स या इंस्ट्रक्टर देते हैं. बुधवार को VVIP लैंडिंग की वजह से ATC को कार्वर एविएशन के एक फ्लाइट इंस्ट्रक्टर द्वारा मैनेज किया जा रहा था. कार्वर एविएशन के एक अधिकारी ने कहा, ATC को मैनेज करने की बारी कार्वर एविएशन की ही थी.

एयरपोर्ट इंचार्ज शिवाजी तावरे ने कहा कि हमने VVIP लैंडिंग के लिए स्टैंडबाय के तौर पर बारामती नगर परिषद से एक फायर टेंडर बुलाया था. जब हमें पता चला कि प्लेन क्रैश हो गया है, तो हमने बारामती नगर परिषद और महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से और फायर टेंडर बुलाए और वे जल्द ही पहुंच गए. एक एम्बुलेंस को भी स्टैंडबाय पर रखा गया था.

अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम की कैटेगरी में है एयरपोर्ट
ATC के मुताबिक, क्रैश के समय विजिबिलिटी तीन किलोमीटर थी, जिसकी वजह से पायलट ने पहली लैंडिंग कैंसिल कर दी थी. एयरस्ट्रिप के लिए जरूरी विजिबिलिटी रेंज पांच किलोमीटर है. इस एयरपोर्ट को अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम की कैटेगरी में रखा गया है, क्योंकि इसमें आम एयरपोर्ट जैसा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है.

बारामती में ट्रेनिंग लेने वाले एक पायलट ने बताया कि चूंकि एयरपोर्ट एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ATC कवरेज एरिया से बाहर है, इसलिए ATC सपोर्ट भी एक फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल के स्टाफ द्वारा दिया जाता है, जिनके पास सिर्फ बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर है.

एयरपोर्ट्स की 4 कैटेगरी
भारतीय एयरपोर्ट्स को चार कैटेगरी में बांटा गया है. कैटेगरी A एयरपोर्ट अनकंट्रोल्ड होते हैं, जहां कोई एयर ट्रैफिक कंट्रोल सर्विस नहीं दी जाती है. बारामती इसी कैटेगरी में आता है. कैटेगरी B एयरपोर्ट आंशिक रूप से कंट्रोल्ड होते हैं, जहां लिमिटेड ATC या AFIS सर्विस होती है. कैटेगरी C एयरपोर्ट कंट्रोल्ड एयरपोर्ट होते हैं जो प्रोसीजरल ATC के साथ काम करते हैं, जहां एयरक्राफ्ट को रडार के बजाय प्रोसीजर का इस्तेमाल करके अलग किया जाता है. कैटेगरी D एयरपोर्ट पूरी तरह से कंटरोल्ड एयरपोर्ट होते हैं जिनमें रडार-बेस्ड ATC होता है, जिसमें मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े हब शामिल हैं.

हादसे के बाद आया होश
बुधवार को विमान हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने एयरपोर्ट पर एक समर्पित टीम तैनात की है, जो घटनास्थल पर सुरक्षित हवाई संचालन में सहायता के लिए आवश्यक हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) और मौसम संबंधी सेवाएं प्रदान कर रही है. वायुसेना के मुताबिक, उसने प्रशासनिक अधिकारियों के अनुरोध के जवाब में वायु योद्धाओं की एक समर्पित टीम तैनात की है.

वायुसेना ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, बारामती हवाई अड्डे पर हुए दुखद विमान हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के अनुरोध पर भारतीय वायुसेना ने तुरंत वायु योद्धाओं की एक समर्पित टीम तैनात की है. टीम घटनास्थल से सुरक्षित हवाई संचालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बुनियादी एटीसी और मौसम संबंधी सेवाएं प्रदान कर रही है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सेवानिवृत पायलट एहसान खालिद कहते हैं कि बारामती हवाई अड्डे पर एक छोटा सा रनवे है, लेकिन यह लियरजेट जैसे विमानों के उतरने के लिए काफी है. मुझे नहीं लगता कि रनवे का इस दुर्घटना में कोई योगदान है, क्योंकि यह दुर्घटना रनवे से पहले या बाहर हुई. उन्होंने कहा, तो यह रनवे की गलती नहीं है. लेकिन हां, अगर रनवे पर आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) या अन्य इंस्ट्रूमेंट सिस्टम लगे होते जो कम दृश्यता की स्थिति में वे पायलट को सही मार्गदर्शन प्रदान करते, तो इस (दुर्घटना) से बचा जा सकता था.

उन्होंने कहा कि दृश्यता मामूली थी, जिसका अर्थ है कि यह न तो बहुत अच्छी थी और न ही खराब लेकिन यह इतनी खराब भी नहीं थी कि मार्ग बदलने की आवश्यकता होती. खालिद ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि विमान ने उतरने का प्रयास किया और उसके बाद वह चक्कर लगाने लगा, जिसका अर्थ है कि उसने लैंडिंग को रद्द कर दिया और लैंडिंग के अपने पहले प्रयास में ही चक्कर लगा लिया.

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