‘अजित दादा अमर रहे’ के नारों से गूंजा बारामती, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
बीते रोज महाराष्ट्र के बारामती में एक चार्टर प्लेन हादसे में राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार की जान चली गई. इस दुर्घटना में उनके साथ यात्रा कर रहे अन्य लोग भी हादसे का शिकार हो गए. इस घटना के बाद से महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शोक और स्तब्धता का माहौल है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीते रोज महाराष्ट्र के बारामती में एक चार्टर प्लेन हादसे में राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार की जान चली गई. इस दुर्घटना में उनके साथ यात्रा कर रहे अन्य लोग भी हादसे का शिकार हो गए. इस घटना के बाद से महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शोक और स्तब्धता का माहौल है.
इस हादसे को लेकर तरह-तरह की बातें उठ रही हैं। इस विमान हादसे के बाद से इसे लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं. कई नेता और दल इसे केवल एक तकनीकी या मानवीय चूक से जुड़ा हादसा मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं. वहीं एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष और अजित पवार के चाचा शरद पवार ने साफ कहा है कि यह घटना पूरी तरह एक दुर्घटना है. उनके मुताबिक, फिलहाल किसी भी तरह के राजनीतिक एंगल या साजिश की बात करना सही नहीं है. वहीं इसे लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है।
वहीं इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस हादसे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि देश में अब तक कई चार्टर प्लेन हादसे हो चुके हैं, जिनमें अहमदाबाद जैसी बड़ी दुर्घटनाएं भी शामिल हैं. गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के निधन का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि जांच के बाद आखिर सच्चाई सामने क्यों नहीं आती. राउत ने कहा कि डीजीसीए द्वारा बनाई गई जांच टीमें क्या निष्कर्ष तक पहुंचीं, यह जनता को जानना चाहिए.
अजित पवार के निधन पर दिए गए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है. जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस दुखद घटना को राजनीतिक रंग देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला व्यक्तिगत शोक का है और इसे राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए. राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि ममता बनर्जी का अजित पवार से व्यक्तिगत या राजनीतिक संबंध रहा होगा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में शरद पवार की भूमिका और भावनाएं सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि शरद पवार केवल अजित पवार के चाचा नहीं थे, बल्कि उनके लिए पिता और मार्गदर्शक के समान थे. ऐसे संवेदनशील समय में बयानबाजी से परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है.
अजित दादा अमर रहे के नारों से पूरा बारामती गूंज उठा। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार का आज बारामती में अंतिम संस्कार हुआ। यह दिन पूरे इलाके के लिए बहुत दुखद था। लोग आंसुओं के साथ अपने नेता को अलविदा कह रहे थे। अजित पवार को ‘दादा’ कहकर पुकारा जाता था। अजित पवार मुंबई से बारामती एक रैली के लिए जा रहे थे। विमान में वे और चार अन्य लोग सवार थे। दुर्भाग्य से सभी की मौत हो गई। इस खबर से पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। बारामती अजित पवार का गढ़ था। यहां से वे कई बार विधायक और मंत्री बने। लोग उन्हें जननेता मानते थे। जब शरीर को काटेवाड़ी गांव से मैदान की ओर लाया जा रहा था, तब रास्ते भर ‘अजित दादा अमर रहे’ और ‘अजित दादा परत या’ जैसे नारे गूंज रहे थे। लोग फूल बरसा रहे थे। कई लोग जमीन पर लोट-पोट होकर रो रहे थे। एनसीपी के कार्यकर्ताओं की आंखें लाल और नम थीं। पूरा माहौल गमगीन था, जैसे कोई अपना परिवार का सदस्य चला गया हो।
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बहुत बड़ा झटका है। अजित पवार जैसे मजबूत नेता कम होते हैं। वे जमीन से जुड़े थे। किसानों की बात रखते थे। युवाओं को नौकरी और विकास के मौके देते थे। उनकी मौत से एनसीपी में बड़ा संकट आ गया। लेकिन उनके समर्थक कहते हैं कि अजित दादा अमर रहेंगे। उनकी अच्छाइयां और काम हमेशा याद किए जाएंगे। बारामती आज भी उनके नाम से गूंज रहा है। लोग कहते हैं कि दादा भले चले गए, लेकिन उनका प्यार और काम यहां जिंदा है।अजित पवार की मौत ने दिखाया कि राजनीति में भी इंसानियत सबसे ऊपर है। दुश्मन भी सम्मान देते हैं। शरद पवार ने कहा कि यह हादसा था, इसमें राजनीति नहीं लानी चाहिए। पूरा देश इस दुख में शामिल है। वहीँ दूसरी तरफ सियासी गलियारों में इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। अब इस हादसे को लेकर खूब कयास भी लगाईं जा रही है और अटकलों का बाजार गर्म है।



