मोदी के घर में 123 करोड़ का घोटाला, ‘हर घर नल से जल’ योजना पर भ्रष्टाचार का साया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य से जुड़ी ‘हर घर नल से जल’ योजना एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है... 123 करोड़ रुपये के घोटाले के...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में शुरू की गई जल जीवन मिशन (हर घर जल) योजना का मुख्य उद्देश्य.. 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर तक नल से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना था.. इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करती हैं.. जिसमें पाइपलाइन बिछाना, ट्यूबवेल खोदना, जल संग्रहण संरचनाएं बनाना.. और घर-घर कनेक्शन देना शामिल है.. बता दें गुजरात प्रधानमंत्री का गृह राज्य है.. वहां इस योजना को काफी सफल बताया जाता है.. राज्य सरकार के अनुसार अब तक 91 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को नल कनेक्शन मिल चुके हैं.. लेकिन हाल के खुलासों से पता चला है कि.. कुछ जिलों में योजना की हकीकत इससे बहुत अलग है.. विशेष रूप से महिसागर जिले में 123 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है.. जहां सैकड़ों गांवों में पाइपलाइन तो बिछ गई.. लेकिन पानी आज भी नहीं पहुंचा.. इससे ग्रामीणों की उम्मीदें टूट गई हैं.. और सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कैसे हुआ..

आपको बता दें कि महिसागर जिला गुजरात के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है.. जहां आदिवासी बहुल गांव हैं.. और पानी की कमी लंबे समय से समस्या रही है.. इस जिले में योजना के तहत 714 गांवों में से 620 गांवों को शामिल किया गया था.. कुल लगभग 238 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ.. जांच में पता चला कि 1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2023 तक के दौरान 123.22 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्टों में 123.44 करोड़) का गबन हुआ..

जानकारी के अनुसार घोटाले का तरीका काफी सुनियोजित था.. सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, ठेकेदारों.. और अधिकारियों ने मिलकर फर्जी बिल.. और दस्तावेज तैयार किए.. काम अधूरा रहने के बावजूद उसे पूरा दिखाया गया.. और 12 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का दावा किया गया.. लेकिन वास्तव में सिर्फ 5 किलोमीटर ही बिछी.. टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर.. अनधिकृत एजेंसियों या संबंधित कंपनियों को काम दिया गया.. पेमेंट ऐसे एजेंसियों को किया गया.. जो योजना के नियमों के अनुसार योग्य नहीं थे.. वाटर एंड सैनिटेशन मैनेजमेंट ऑर्गनाइजेशन की विजिलेंस टीम ने एक साल से अधिक समय तक जांच की.. जिसमें 27 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया.. और कई अधिकारियों को निलंबित किया गया..

जून 2025 में वडोदरा जोन की CID क्राइम ब्रांच ने FIR दर्ज की.. इसमें WASMO के पूर्व यूनिट मैनेजर एजी राजपारा सहित 12 लोग आरोपी बनाए गए.. जिनमें जिला कोऑर्डिनेटर, असिस्टेंट टेक्निकल मैनेजर आदि शामिल थे.. आरोपों में आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी.. और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम शामिल हैं..

वहीं सरकार ने घोटाले की जांच को गंभीरता से लिया.. सितंबर 2025 तक की जानकारी के अनुसार, 630 गांवों की जांच में गड़बड़ी पाई गई.. 112 एजेंसियों को डिबार किया गया.. और 122 एजेंसियों तथा 41 पानी समितियों से रिकवरी के आदेश जारी हुए.. अब तक 2.97 करोड़ रुपये वसूल हो चुके हैं.. और कुल पेनल्टी 120.65 करोड़ रुपये की लगाई गई है..

जानकारी के मुताबिक इस घोटाले में गिरफ्तारियां भी हुईं.. शुरुआत में 9 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया.. और जनवरी 2026 तक CID ने और 4 लोगों को पकड़ा.. जांच जारी है और केंद्र सरकार ने भी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है.. देशभर में JJM में अनियमितताओं पर 7 राज्यों में 129 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई.. जिसमें गुजरात सबसे आगे है..

 

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