UGC विवाद के बीच परमहंस आचार्य का बेबुनियादी बयान, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल!
आचार्य जी बेबाक होकर कह रहे हैं कि, "हमने ध्यान लगाया तो पता चला कि ट्रंपवा ने तंत्र–मंत्र कराकर मोदी जी का वशीकरण किया था। आज हमने वैदिक पाठ किया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीजेपी नेताओं और पीएम मोदी की शान और जी हुजूरी कुछ इस तरह गुम हो चुके हैं कि उन्हें इसके आगे कुछ दिखाई ही नहीं देता है। ऐसी ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जिसका हकीकत से कोई लेना देना ही नहीं है।
इसी बीच एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसे लेकर खूब चर्चा हो रही है और मजाक बनाया जा रहा है। दरअसल हम बात कर रहे हैं, अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य की जिन्होंने हाल ही में एक अजीबोगरीब दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तंत्र-मंत्र के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वशीकरण किया था। इतना ही नहीं उन्होंने दावा किया कि “हमने ध्यान लगाया तो पता चला कि ट्रंपवा ने तंत्र-मंत्र कराकर मोदी जी का वशीकरण किया था”। उन्होंने यह भी दावा किया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कुछ ऐसा संकेत दिया था। ऐसे में अब यह विवादास्पद बयान सुर्ख़ियों में बना हुआ है। और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग उनका जमकर मजाक बना रहे हैं।
आचार्य जी बेबाक होकर कह रहे हैं कि, “हमने ध्यान लगाया तो पता चला कि ट्रंपवा ने तंत्र–मंत्र कराकर मोदी जी का वशीकरण किया था। आज हमने वैदिक पाठ किया है। उससे मोदी जी के ऊपर कोई वशीकरण असर नहीं करेगा।” यह बयान उन्होंने कैमरे के सामने दिया। यह बयान UGC विवाद से भी जुड़ा बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रंप ने मोदी को प्रभावित कर UGC के नए नियम लागू करवाने की कोशिश की, लेकिन आचार्य के हवन-यज्ञ से नियमों पर रोक लग गई। परमहंस आचार्य अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, चाहे वह राजनीतिक टिप्पणियां हों या धार्मिक मुद्दे। उनका यह दावा अजीबो-गरीब है और सोशल मीडिया पर मीम्स, वीडियो और बहस का विषय बन गया है।
वहीं सोशल मीडिया पर लोग इसे शेयर करते हुए खूब मजे ले रहे हैं। यूजर्स ने इसे ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का ज्ञान बताया, जहां फेक न्यूज तेजी से फैलती है। कई ने हंसी उड़ाई, तो कुछ ने इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा माना। कुल मिलाकर आचार्य का यह वीडियो एक बार फिर सुर्खियों में बना हुआ है, परमहंस आचार्य का बयान मनोरंजन और आलोचना दोनों का स्रोत बन गया है, लेकिन इसमें कोई वैज्ञानिक या तथ्यात्मक आधार नहीं दिखता।



