Supreme Court ने लगाई फटकार, बैकफुट पर आई सरकार, शंकराचार्य से माफी मांगने की आई नौबत !
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े अपमान के मामले में योगी सरकार अब साफ तौर पर बैकफुट पर नजर आ रही है... जिस सरकार और प्रशासन ने कुछ दिन पहले तक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से उनके शंकराचार्य होने के प्रमाण नोटिस भेजकर मांगे थे...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े अपमान के मामले में योगी सरकार अब साफ तौर पर बैकफुट पर नजर आ रही है… जिस सरकार और प्रशासन ने कुछ दिन पहले तक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से उनके शंकराचार्य होने के प्रमाण नोटिस भेजकर मांगे थे…
वही सरकार अब उनसे माफी मांगने की तैयारी में है…जी हां, प्रयागराज प्रशासन ने बनारस जाकर शंकराचार्य से क्षमा याचना करने का मन बना लिया है…शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने खुद इसकी पुष्टि की है…दरअसल, प्रशासन को ये उम्मीद ही नहीं थी कि शंकराचार्य इतने नाराज हो जाएंगे कि माघ मेला छोड़कर काशी चले जाएंगे…अफसरों को लग रहा था कि माघ पूर्णिमा यानी 1 फरवरी तक उन्हें मना लिया जाएगा…लेकिन जैसे ही शंकराचार्य ने बिना स्नान किए माघ मेले से प्रस्थान किया…
जिसके बाद सरकार और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और अब योजना ये है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी काशी जाएंगे… शंकराचार्य से माफी मांगेंगे… उन्हें सम्मान के साथ वापस प्रयागराज लाएंगे… और माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान कराएंगे…ये सब साफ दिखाता है कि किस तरह सरकार ने पहले कठोर रुख अपनाया…और अब जनभावना के दबाव में उसे झुकना पड़ रहा है…इसी बीच इस पूरे विवाद को एक बड़ा कानूनी और संवैधानिक संदर्भ भी मिल गया है…बता दें कि…UGC के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और कोर्ट ने UGC के नए नियम को अस्पष्ट और दुरुपयोग का खतरा बताया……..
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में UGC एक्ट से जुड़े एक अहम मामले में सरकार को कड़ी फटकार लगाई है…जिसके जरिए अदालत ने साफ संदेश दे दिया है कि…सरकार मनमाने तरीके से नियम नहीं बना सकती…और न ही संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नजरअंदाज कर सकती है…साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी संदेश दिया कि…किसी भी कानून या नियम को लागू करने से पहले सभी पक्षों की बात सुनना जरूरी है…कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर किस आधार पर ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं… जिनसे देशभर में असंतोष फैल रहा है…
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच में मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि यूजीसी के नए नियम अस्पष्ट हैं और इसके दुरुपयोग का खतरा है…इसके बाद कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर स्टे लगा दिया है…कोर्ट ने नए नियमों पर केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है…इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी……अदालत की इस टिप्पणी के बाद केंद्र और राज्य सरकारें दोनों ही बैकफुट पर दिखाई देने लगी हैं…UGC एक्ट को लेकर पहले ही देशभर में विरोध हो रहा है…शिक्षक संगठन…छात्र संगठन…और यहां तक कि सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेता भी सवाल उठा रहे हैं…ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की फटकार ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं…
वहीं अगर शंकराचार्य मामले को इसी नजरिए से देखा जाए तो तस्वीर और भी ज्यादा साफ हो जाती है…एक तरफ सरकार धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के सम्मान की बात करती है… और दूसरी तरफ उसी सरकार के अफसर शंकराचार्य जैसे पद पर बैठे संत से सबूत मांगते हैं…सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि पद… परंपरा… और संस्थाओं की गरिमा को कागजी प्रमाणों से नहीं तौला जा सकता……और अगर बात शंकराचार्य की कि जाए तो… शंकराचार्य कोई सरकारी नियुक्ति नहीं है कि फाइलों में उसका सत्यापन हो…ये सदियों पुरानी सनातन परंपरा है…जिसे समाज की स्वीकृति मिलती है…इसी भावना के चलते सरकार को अब शंकराचार्य को लेकर अपना रुख बदलना पड़ रहा है…शंकराचार्य के अपमान से नाराज संत समाज और आम श्रद्धालुओं का गुस्सा सरकार के लिए खतरे की घंटी बन गया है…
एक ओर शंकराचार्य के मामले पर मोदी सरकार बुरी तरह से घिरती नजर आ रही है…तो वहीं दूसरी तरफ UGC एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भी सरकार को यही संदेश दिया है… कोर्ट ने साफ किया कि शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में बिना संवाद के बदलाव करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है… अदालत ने ये भी कहा कि सरकार अगर ये सोचती है कि बहुमत के दम पर हर फैसला सही हो जाएगा… तो ये सोच खतरनाक है… यही बात अप्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य विवाद पर भी लागू होती है… जब सत्ता खुद को सर्वशक्तिमान मानने लगती है… तब टकराव तय होता है… और आखिर में सरकार को ही पीछे हटना पड़ता है…आज हालात ये हैं कि वही प्रशासन जो कल तक सवाल पूछ रहा था… आज माफी की बात कर रहा है…
इसी बीच अब योगी आदित्यनाथ अपने हिन्दु होने का सबूत दें…ये मांग भी उठी है….जी हां, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से योगी सरकार ने… शंकराचार्य होने का सबूत मांगा था…जिसके बाद अब अपना प्रमाणपत्र सौंपते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है कि हमने तो प्रमाणपत्र दे दिया है…लेकिन अब समय प्रमाण लेने का नहीं…. बल्कि प्रमाण देने का है….उन्होंने पूरे सनातनी समाज की तरफ से…मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हिन्दू होने का सबूत मांगा है और कहा है कि गौमाता को राज्यमाता का दर्जा देकर वो अपने हिंदू होने का प्रमाण दें…. नहीं तो 40 दिन बाद हम धर्म सभा करके उन्हें नकली हिन्दू घोषित करेंगे…
पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को माघ मेले मे स्नान न करने देना और फिर उनका माघ मेला छोड़ना सिर्फ एक धार्मिक घटना नहीं थी… ये एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी था… उन्होंने यह दिखा दिया कि सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता… बिना स्नान किए लौट आना प्रशासन के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ… यही वजह है कि अब अफसरों की टीम काशी जाने की तैयारी कर रही है… ताकि मामला और न बिगड़े… सरकार जानती है कि अगर ये नाराजगी लंबे समय तक चली… तो उसका असर चुनावी राजनीति तक दिख सकता है…ठीक वैसे ही जैसे UGC एक्ट के विरोध का असर अब सरकार की छवि पर पड़ता दिखाई दे रहा है…
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और शंकराचार्य विवाद…दोनों मामलों में एक चीज सेम है…जहां सरकार ने पहले सख्ती दिखाई… विरोध को नजरअंदाज किया… और फिर हालात बिगड़ते देख खुद बैकफुट पर आ गई……जैसा कि कोर्ट ने UGC एक्ट पर कहा कि सुधार जरूरी हैं…और शंकराचार्य मामले में भी यही बात सामने आई है…क्योंकि, सम्मान बात-चीत से मिलता है… आदेश से नहीं… आज सरकार माफी की बात कर रही है… क्योंकि उसे समझ आ गया है कि आस्था और संविधान दोनों के सामने झुकना ही समझदारी है…
आखिर में सवाल यही है कि क्या सरकार इससे कोई सबक लेगी…क्या आगे किसी कानून या प्रशासनिक फैसले से पहले समाज की भावना को समझा जाएगा….क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने तो अपना संदेश साफ दे दिया है कि सरकार अपनी मर्जी से कुछ भी अपने मन मुताबिक, नहीं कर सकती है…ऐसे में अब देखना ये है कि योगी सरकार और केंद्र सरकार इस संदेश को कितनी गंभीरता से लेती हैं……लेकिन, इतना तो तय है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अपमान का मामला हो या UGC एक्ट का विवाद… दोनों ने सरकार को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है… और ये बैकफुट सिर्फ एक कदम नहीं… बल्कि एक चेतावनी है.



