अजित पवार जल्द उठाने वाले थे बड़ा कदम, करीबी ने किया खुलासा!

अजित दादा का यूँ जाना न सिर्फ महाराष्ट्र के लिए बल्कि पूरे देश के लिए शोक का विषय बना हुआ है। देश भर ने उन्हें नम आँखों के आखिरी सलामी और विदाई दी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अजित दादा का यूँ जाना न सिर्फ महाराष्ट्र के लिए बल्कि पूरे देश के लिए शोक का विषय बना हुआ है। देश भर ने उन्हें नम आँखों के आखिरी सलामी और विदाई दी।एक तरफ जहाँ उनके जाने से देशभर में शोक की लहर है तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें लेकर अब कई तरह की खबरें सामने आ रही है।

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन ने हर किसी को सदमे में डाल दिया। पवार परिवार के इस दुख की घड़ी में परिवार की एकता सामने आई है। चुनावी मैदान में अजित पवार और सुप्रिया सुले एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी के तौर पर रहे। लेकिन भाई अजित पवार के निधन ने एनसीपी के दोनों गुटों को साथ खड़ा कर दिया।  अजित पवार के निधन की खबर आने के बाद से सुप्रिया सुले ने सुनेत्रा पवार का साथ नहीं छोड़ा है। जब सुनेत्रा अपने पति का शव लेने बारामती पहुंचीं, तो वह अकेली नहीं थीं, सुप्रिया भी उनके साथ थीं। सुप्रिया ने भीड़ और कैमरों के बीच उनका हाथ मजबूती से पकड़े हुए था। सुप्रिया सुले ने इस दुख की घड़ी में लोगों से अनुशासन बनाए रखने की अपील की। सुप्रिया ने परिवार की तरफ से राजनीतिक जगत से जुड़े सभी लोगों से मुलाकात की।

लोकसभा के चुनावी मैदान में अजित पवार और शरद पवार की एनसीपी एक-दूसरे के खिलाफ उतरी थीं, वहीं इस दुख की घड़ी में वो लड़ाई खत्म होती नजर आई। पंडितों ने जब अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा को धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए बुलाया, तब भी सुप्रिया ने उन्हें कसकर पकड़ लिया। सुप्रिया ने सुनेत्रा का हर कदम पर साथ दिया। वहीं इन सबके बीच अजित पवार से जुडी बड़ी खबरे सामने आई। अजित पवार के निधन के बाद से ही उनके राजनीतिक विरासत को लेकर अलग-अलग तरह से कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच अब उनके एक करीबी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वो जल्द एनसीपी के दोनों गुटों का विलय करने जा रहे थे।

विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य और पवार परिवार के करीबी किरण गुजर ने कहा, “आज यहां अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन किया गया। ‘दादा’ की आखिरी इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय हो। सभी को एकजुट होना चाहिए। इस बारे में पूरे परिवार में बात हो रही थी। उनसे मेरी आखिरी फोन कॉल में उन्होंने मुझसे चुनाव से जुड़े कुछ कागजात मांगे थे।’ दिवंगत अजित पवार के करीबी किरण गुजर ने दावा किया कि वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय के लिए उत्सुक थे, और यह जल्द ही होने वाला था। दिग्गज नेता के निधन के दो दिन बाद उनके किरण गुजर ने बताया कि उनसे यह बात खुद अजित पवार ने साझा की थी।

1980 के दशक के मध्य में राजनीति में आने से पहले से ही किरण गुजर अजित पवार से जुड़े हुए थे। वो दिवंगत नेता के करीबी सहयोगी और विश्वसनीय सहयोगी थे। अब किरण गुजर ने कहा कि अजित पवार ने बुधवार को विमान दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बताया था। गुजर ने आगे कहा कि वह दोनों गुटों को मिलाने के लिए सौ प्रतिशत उत्सुक थे। उन्होंने मुझे पांच दिन पहले बताया था कि पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है। हाल के नगर निगम चुनावों के दौरान जिसमें दोनों गुटों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। अजित पवार ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों से यह भी कहा था कि वह अपनी पार्टी का NCP (SP) में विलय करना चाहते हैं।

पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ने के बाद दोनों गुटों ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए भी गठबंधन जारी रखने का फैसला किया था। इतना ही नहीं गुजर ने दाने के साथ कहा कि अजित पवार के पास विलय और एकजुट एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार था। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इस मुद्दे पर शरद पवार से बात की थी, जिस पर गुजर ने कहा, ‘पवार साहब, सुप्रिया ताई और अन्य नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही थी और संकेत थे कि वरिष्ठ पवार इस कदम का समर्थन करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘कई सकारात्मक चीजें होने वाली थीं, लेकिन यह त्रासदी हुई और अजीत ‘दादा’ को हमसे छीन लिया। अब उनकी मृत्यु के बाद यह और भी जरूरी हो गया है कि दोनों गुट एक साथ आएं और बारामती और राज्य की बेहतरी के लिए काम करें।’ गुजर, जो 40 से अधिक वर्षों से पवार परिवार से जुड़े हुए हैं, अजित पवार के विभिन्न राजनीतिक चरणों में उनके साथ रहे और उन्हें उनका करीबी विश्वासपात्र माना जाता था।

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए गुजर ने कहा कि 1981 में छत्रपति सहकारी चीनी मिल का चुनाव जीतने के बाद अजित पवार को राजनीति में आने के लिए राजी किया गया था। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में वह हिचकिचा रहे थे और परिवार और खेती पर ध्यान देना चाहते थे। हालांकि, 1980 के दशक के आखिर में जब पवार साहब मुख्यमंत्री बने, तो बारामती में युवा नेतृत्व की जरूरत थी, और दादा ने वह भूमिका निभाई।’ वहीं अजित पवार के अस्थि विसर्जन में शामिल होने पहुंचे एनसीपी नेता उमेश पाटिल ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि दोनों गुट एकजुट हों। ‘सुनेत्रा पवार राजनीति से जुड़ी रही हैं और वर्षों से जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें जिम्मेदारी संभालने में कोई परेशानी होगी। उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।’

अजित दादा की मौत के बाद लगातार सवालों की झड़ी लगी हुई है। सवाल यह भी बना हुआ है कि क्या परिवार की आपसी कलह अब खत्म हो जाएगी और उपमुख्यमंत्री किसको चुना जाएगा खैर सवाल बहुत है और इन सभी सवालों के जवाब आने वाला समय ही तय करेगा।

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