जिसका डर था वही हुआ! अजित पवार के जाते ही NCP में हो गया खेला
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल तेज हो गई है... अजित पवार के अलग होने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः महाराष्ट्र की सियासत में बड़ी खलबली मचने वाली है.. अजित पवार के जाते ही उनकी एनसीपी में बिखराव हो गया है.. अजित पवार वाला गुट दो हिस्सों में बंट चुका है.. एक हिस्सा शरद पवार के साथ जाना चाहता है.. तो दूसरा गुट महायुति के साथ बने रहना चाहता है.. वहीं अब सवाल है कि आखिर इस सियासी भूचाल को अजित पवार के न रहने पर कौन संभालेगा.. आपको बता दें कि महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में जिसका डर था वही होता दिख रहा है.. अजित पवार के निधन का अब उनकी पार्टी में साइड इफेक्ट दिखने लगा है.. अजित पवार के जाते ही एनसीपी में दो फाड़ हो गया है.. सूत्रों का कहना है कि अजित पवार की एनसीपी अब दो गुटों में बंट गई है.. एक ग्रुप महायुति में साथ रहना चाहता है.. तो दूसरा शरद पवार के साथ जाना चाहते है.. एनसीपी में इस बिखराव से भाजपा की टेंशन बढ़ गई है.. अजित पवार गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हुए..
दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है.. 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित अनंतराव पवार की बारामती में हुए विमान हादसे में मौत ने राज्य की राजनीति को हिला कर रख दिया है.. अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे.. जहां वे जिला परिषद चुनाव के प्रचार के लिए जा रहे थे.. चार्टर विमान Bombardier Learjet 45XR (रजिस्ट्रेशन VT-SSK) सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ा था.. और लगभग 35 मिनट की उड़ान के बाद बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दूसरे प्रयास में क्रैश हो गया.. विमान रनवे थ्रेशोल्ड से थोड़ा पहले एयरस्ट्रिप के अंदर ही गिरा.. आग पकड़ ली और पूरी तरह जल गया.. हादसे में अजित पवार समेत पायलट कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट कैप्टन शांभवी पाठक, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली.. और सुरक्षा अधिकारी विदीप जाधव की मौत हो गई.. सभी की मौत घटनास्थल पर ही हो गई.. ब्लैक बॉक्स बरामद हो चुका है.. और AAIB की जांच जारी है.. बता दें कि अजित पवार का अंतिम संस्कार 29 जनवरी को बारामती में राजकीय सम्मान के साथ हुआ.. जिसमें हजारों समर्थक शामिल हुए..
जानकारी के मुताबिक अजित पवार की मौत के तुरंत बाद उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अजित गुट में गहरा बिखराव दिखाई देने लगा है.. सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुट अब दो हिस्सों में बंट चुका है.. एक हिस्सा महायुति (भाजपा-शिवसेना) गठबंधन के साथ बने रहना चाहता है.. जबकि दूसरा हिस्सा शरद पवार के मूल एनसीपी गुट के साथ वापस मर्ज होना चाहता है.. यह बिखराव महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर ला सकता है.. क्योंकि अजित पवार का गुट विधानसभा में 41 विधायकों.. और लोकसभा में कई सांसदों के साथ मजबूत था.. अजित पवार की मौत से पहले ही दोनों गुटों के बीच मर्जर की बातें चल रही थी.. सूत्रों का कहना है कि 8 फरवरी 2026 को एनसीपी का औपचारिक मर्जर होने वाला था.. पुणे और पिंपरी चिंचवड़ म्युनिसिपल चुनावों में दोनों गुटों ने साथ मिलकर लड़ा था.. जो मर्जर की तैयारी का संकेत था.. अजित पवार खुद इस मर्जर के पक्ष में थे.. और इसे अपनी आखिरी इच्छा मानते थे.. लेकिन हादसे के बाद सारी योजनाएं ठप हो गई हैं..
वहीं अब एनसीपी में लीडरशिप का संकट सबसे बड़ा है.. अजित पवार के जाने के बाद पार्टी में वैक्यूम पैदा हो गया है.. सबसे मजबूत दावेदार उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम चल रहा है.. सुनेत्रा राज्यसभा सांसद हैं.. और बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं.. कई वरिष्ठ नेता जैसे छगन भुजबल.. और प्रफुल पटेल सुनेत्रा को पार्टी की कमान सौंपने के पक्ष में हैं.. प्रफुल पटेल का नाम भी अध्यक्ष पद के लिए चल रहा है.. क्योंकि वे अजित गुट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं.. और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं.. जानकारी के अनुसार सुनील तटकरे का भी नाम चर्चा में है.. जो महाराष्ट्र में मजबूत नेता हैं.. लेकिन गुट के अंदर सहमति नहीं बन पा रही है.. एक धड़ा कहता है कि सुनेत्रा को लीडर बनाकर परिवार की विरासत बचाई जाए.. जबकि दूसरा धड़ा कहता है कि पार्टी को मजबूत करने के लिए अनुभवी नेता जैसे पटेल या तटकरे को कमान मिलनी चाहिए..
वहीं यह बिखराव भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है.. महायुति सरकार में अजित गुट के विधायक महत्वपूर्ण हैं.. अगर गुट शरद पवार के साथ चला गया तो महायुति की संख्या कम हो सकती है.. और एकनाथ शिंदे की शिवसेना का प्रभाव बढ़ सकता है.. भाजपा चाहती है कि अजित गुट महायुति में बना रहे.. क्योंकि बारामती और पश्चिम महाराष्ट्र में अजित गुट का मजबूत आधार है.. सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व अब सुनेत्रा पवार.. और अन्य नेताओं से बातचीत कर रहा है ताकि गुट टूटे नहीं.. लेकिन अगर मर्जर हुआ तो महाराष्ट्र में एनसीपी फिर से एकजुट हो सकती है.. जो विपक्ष के लिए फायदेमंद होगा..



