योगी के लिए इस्तीफा देने वाले अधिकारी ने मारी पलटी, ड्यूटी पर वापस लौटा, सफाई में कह दी बड़ी बात!
यूपी में इन दिनों गजब का नाटक चल रहा है, जहां अधिकारी इस्तीफा देते हैं वो भी ये कहकर दी हम योगी जी का नमक खाते हैं और उनके खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकते।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: यूपी में इन दिनों गजब का नाटक चल रहा है, जहां अधिकारी इस्तीफा देते हैं वो भी ये कहकर दी हम योगी जी का नमक खाते हैं और उनके खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकते। लेकिन अब इस कहानी में नया ट्विस्ट आ गया है।
अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर (GST) प्रशांत कुमार सिंह का मामला अब एक हाई-वोल्टेज ड्रामे में बदल गया है. डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है. 27 जनवरी को प्रशांत सिंह ने शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ पर कथित टिप्पणियों से आहत होकर इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेजकर दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में वह यह कदम उठा रहे हैं. इस्तीफा देते समय प्रशांत सिंह इतने भावुक हो गए कि वह पत्नी से फोन पर बात करते-करते रो पड़े. इस दौरान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. लेकिन अब इसमें यू टर्न आ गया है . 31 जनवरी 2026 को उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया.वहीं फर्जी डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट को लेकर उन्होंने अपने भाई विश्वजीत सिंह पर आरोप लगाया है कि वह मुख्तार अंसारी गैंग के सदस्य हैं.
हालांकि अब प्रशांत सिंह ने अपना इस्तीफा वापस लेकर दफ्तर पहुंच चुके हैं. इस बात की जानकरी खुद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दी है. वहीं जब प्रशांत सिंह से विश्वजीत के सिंह के द्वारा लगाए गए फर्जी डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने अपने भाई विश्वजीत सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रशांत सिंह का दावा है कि उनके भाई विश्वजीत सिंह माफिया मुख्तार अंसारी के मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य हैं.इसके साथ ही वह गैंग का फाइनेंशियल एडवाइजर रह चुके हैं.
प्रशांत सिंह पर आरोप लगे थे कि उन्होंने फर्जी डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी पाई है. इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके भाई की एक साजिश थी. भाई ने सीएमओ मऊ को पत्र लिखकर प्रमाणपत्र को फर्जी बताया था. प्रशांत सिंह के अनुसार जब सीएमओ अयोध्या ने सीएमओ मऊ से सत्यापन मांगा तो मऊ कार्यालय ने लिखित में पुष्टि की कि प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध और सही है.अधिकारी का सवाल है कि जब दस्तावेज सही पाए गए तो बार-बार उन्हें संदिग्ध क्यों बनाया जा रहा है. खैर इस मामले में कितनी सच्चाई है ये तो आने वाले समय में जांच पड़ताल के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इस इस्तीफे के खेल से प्रदेश भर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।



