पूरे देश में पान-मसाला से जुड़े लोग काट रहे भ्रष्टाचार की मलाई !

- सरकार को 250 करोड़ से ज्यादा की चपत लगाई
- डीजीजीआई मेरठ जोनल यूनिट ने पकड़ा घोटाला
- 5,000 करोड़ रुपये के सुपारी जीएसटी चोरी गिरोह का भंडाफोड़
- उद्योगपति, अधिकारी से लकर बड़े-बड़े रसूखदार जुड़े
- डीजीजीआई की जांज जारी, तीन हिरासत में
- उचित दस्तावेजीकरण के बिना, माल को गुपचुप तरीके भेजा गया
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। देश में एक तरफ पान-मसालों पर टैक्स पर टैक्स बढ़ाए जा रहें हैं। वहीं पान मसाला से जुड़े लोग इसकी काट भी निकाल ले रहे हैं। अभी ऐसा ही एक मामला मेरठ में आया है जिसमें पान मसाला उद्योग से जुड़े भ्रष्टाचार का पूरा तंत्र पकड़ा गया है। जिसमें हजारों करोड़ का घोटाला भी उजागर हुआ है। इसमें बड़े-बड़े लोगों केजुड़े होने की संभावना है। फिलहाल 5 हजार करोड़ के इस घोटाले में चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। और जीएसटी खुफिया निदेशालय (डीजीजीआई) इसकी जांच कर रही है। इन सबकेबीच पान मसाला उद्योग में लागू किए गए नए नियमों से इस बात की भी आशंका है कि जीएसटी और जांच विभाग को मिले अधिकारों से भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हो सकती हैं। दावा किया जा रहा है कि नए नियमों से जांच असली मालिक तक पहुंचेगी।
पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों से लाकर दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में खपाई
डीजीजीआई के अनुसार, पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों से भारी मात्रा में सुपारी मंगाई गई और दिल्ली/एनसीआर क्षेत्र में लाई गई। वहां से, उचित दस्तावेज़ीकरण के बिना, माल को गुपचुप तरीके से निर्माताओं को आपूर्ति की गई, जिससे जीएसटी ढांचे को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। जांचकर्ताओं ने पाया कि दिल्ली/एनसीआर में सक्रिय संस्थाओं ने एक बेहद परिष्कृत कार्यप्रणाली अपनाई थी। सुपारी की थोक व्यापार-से-व्यापार (बी2बी) आपूर्ति – जो लगभग पूरी तरह से औद्योगिक कच्चे माल के रूप में उपयोग की जाती है-को जीएसटी रिटर्न में खुदरा व्यापार-से-उपभोक्ता (बी2सी) बिक्री के रूप में गलत तरीके से दर्ज किया गया था। वास्तव में, ऐसी कोई खुदरा बिक्री हुई ही नहीं थी। शामिल फर्मों के पास कोई खुदरा आउटलेट या ग्राहक संपर्क नहीं था और वे केवल गोदामों के माध्यम से ही काम करती थीं।
तंबाकू निर्माताओं की सुपारी की अवैध खरीद, परिवहन और आपूर्ति में मिलीभगत
डीजीजीआई मेरठ जोनल यूनिट ने 5,000 करोड़ रुपये के सुपारी जीएसटी चोरी गिरोह का भंडाफोड़ किया। 250 करोड़ रुपये का कर नुकसान पकड़ा गया। पूरे भारत में अधिकार क्षेत्र रखने वाली जीएसटी खुफिया निदेशालय (डीजीजीआई) की मेरठ जोनल यूनिट (मेज़ू) ने लगभग 5,000 करोड़ रुपये के सुपारी के गुप्त व्यापार से जुड़े एक बड़े, सुनियोजित जीएसटी चोरी रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में एक राष्ट्रव्यापी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जो मुख्य रूप से पान मसाला और चबाने वाले तंबाकू निर्माताओं को सुपारी की अवैध खरीद, परिवहन और आपूर्ति में लगा हुआ था।
तीन प्रमुख आरोपियों को हिरासत में भेजा
भारत सरकार की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक द्वारा प्रस्तुत दलीलों के बाद, अदालत ने तीन प्रमुख आरोपियों – शिवम द्विवेदी, दिलीप कुमार झा और संजीत कुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है जांच के प्रारंभिक चरण में सरकार के पास 7 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं। डीजीजीआई ने बताया है कि जांच अभी भी महत्वपूर्ण चरण में है और अब इसका ध्यान लाभार्थियों की पहचान करने, उत्पादन स्तर पर कर चोरी की मात्रा निर्धारित करने और गिरोह के पूर्ण संलिप्तता का पता लगाने पर केंद्रित है। जांच आगे बढऩे के साथ-साथ और अधिक बरामदगी और संपत्तियों की कुर्की की उम्मीद है।
माल की वास्तविक आवाजाही को छिपाने के लिए, फर्जी बी2सी चालान किए गए
माल की वास्तविक आवाजाही को छिपाने के लिए, फर्जी बी2सी चालान, जो ज्यादातर ई-वे बिल की सीमा से कम थे, माल की गुप्त रूप से निकासी के बाद स्टॉक रिकॉर्ड को समायोजित करने के लिए बनाए गए थे। इस विधि ने गिरोह को ई-वे बिल बनाने से बचने और असली खरीदारों की पहचान छिपाने में सक्षम बनाया। डीजीजीआई की जांच से पता चला कि सुपारी बिना चालान या परिवहन दस्तावेजों के सीधे प्रमुख पान मसाला निर्माण इकाइयों को पहुंचाई गई थी। इन आपूर्तियों के लिए भुगतान पूरी तरह से नकद में अंगडिय़ाओं और अन्य अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से प्राप्त किया गया था।
कच्चे सुपारी पर अनुमानित 250 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा
इससे अकेले कच्चे सुपारी पर अनुमानित 250 करोड़ की जीएसटी चोरी हुई। अधिकारियों ने बताया कि वास्तविक राजस्व हानि इससे कहीं अधिक, कई हजार करोड़ तक हो सकती है, क्योंकि अवैध रूप से आपूर्ति किए गए कच्चे माल का उपयोग पान मसाला उत्पादों के निर्माण में किया गया था, जिन पर बहुत अधिक जीएसटी दरें और क्षतिपूर्ति उपकर लागू होते हैं। दिल्ली भर में कई स्थानों पर – जिनमें व्यावसायिक परिसर, गोदाम, आवास और ट्रांसपोर्टर कार्यालय शामिल हैं तलाशी अभियान चलाने से बड़ी मात्रा में बेहिसाब सुपारी, आपत्तिजनक दस्तावेज, हस्तलिखित रजिस्टर, डिजिटल उपकरण और ट्रांसपोर्टर रिकॉर्ड जब्त किए गए। भौतिक स्टॉक सत्यापन से भारी कमी का पता चला, जिससे जीएसटी प्रणाली के बाहर माल की अवैध निकासी स्पष्ट रूप से साबित हो गई। प्रमुख व्यक्तियों, ट्रांसपोर्टरों और प्रसंस्करण इकाई संचालकों से लिए गए बयानों ने नकद-आधारित, चालान-मुक्त आपूर्ति श्रृंखला के अस्तित्व की पुष्टि की।
अब फ्रेंचाइजी की गड़बड़ी पर पान- मसाला ब्रांड के मालिक भी नपेंगे
एक फरवरी से पान मसाला उद्योग में लागू किए गए नए नियमों ने पूरे सेक्टर की कार्यप्रणाली को सख्त निगरानी के दायरे में ला दिया है। अब तक किसी तरह की अनियमितता या कर चोरी पकड़े जाने पर मुख्य रूप से फैक्टरी चलाने वाली फ्रेंचाइजी पर कार्रवाई होती थी, लेकिन नए प्रावधानों के तहत अब ब्रांड मालिक भी जिम्मेदार ठहराए जा सकेंगे। इससे उद्योग में जवाबदेही बढ़ी है और बड़ी कंपनियों से लेकर क्षेत्रीय ब्रांड तक सतर्क हो गए हैं। पान मसाला निर्माण में आमतौर पर मशीन और ब्रांड का मालिक एक ही होता है, लेकिन व्यवहार में मशीनें फ्रेंचाइजी को किराये पर देकर उत्पादन कराया जाता है। पुराने नियमों में मशीन का संचालन करने वाला ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता था। नए बदलावों के बाद जांच एजेंसियों को यह अधिकार मिल गया है कि वे यह भी जांच कर सकें कि कहीं ब्रांड मालिक ने डमी व्यवस्था से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर फ्रेंचाइजी तो नहीं चला रखी है।




