AAP बनी गुजरात की नंबर-2 पार्टी, चैतर वसावा का बड़ा ऐलान, AAP ने भरा खालीपन

गुजरात की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है... आम आदमी पार्टी ने जनता का भरोसा जीतते हुए खुद को गुजरात की दूसरी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है.. यहां की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हो रहा है.. आम आदमी पार्टी अब राज्य की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है.. हाल ही में जनवरी 2026 में हुए एक सर्वे पल्स ऑफ गुजरात 2026 के अनुसार.. AAP का वोट शेयर 24.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है.. जबकि कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17.3 प्रतिशत रह गया है.. वहीं भाजपा अभी भी 49.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सबसे आगे है.. लेकिन अब मुख्य चुनौती AAP से आ रही है, न कि कांग्रेस से..

जानकारी के अनुसार यह बदलाव कांग्रेस की ढिलाई.. और विपक्ष की भूमिका सही से न निभा पाने के कारण हुआ है.. जिसके चलते AAP ने गुजरात की जनता का भरोसा जीत लिया है.. और वह अब सबसे मजबूत विपक्षी पार्टी बन गई है.. AAP के प्रमुख आदिवासी नेता और डेडियापाड़ा विधायक चैतर वसावा ने भी इस पर बड़ा ऐलान किया है कि.. AAP गुजरात में खालीपन भर रही है.. और 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता पर ब्रेक लगाएगी..

आपको बता दें कि गुजरात में भाजपा का शासन 1995 से चल रहा है.. हालांकि कुछ लोग इसे 35 साल कहते हैं.. लेकिन वास्तव में 1995 में पहली बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनी थी.. केशुभाई पटेल से शुरू होकर नरेंद्र मोदी, विजय रूपाणी.. और अब भूपेंद्र पटेल तक, भाजपा ने राज्य को विकास का मॉडल बताया है.. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीती.. और 52.5 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया..

राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री और निवेश बढ़ा है.. जानकारी के मुताबिक वाइब्रेंट गुजरात जैसे कार्यक्रमों से हजारों करोड़ का निवेश आया.. लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह विकास सिर्फ अहमदाबाद और सूरत जैसे बड़े शहरों तक सीमित है.. ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी, किसानों की दिक्कतें, पानी की कमी और महंगाई जैसे मुद्दे अब भी बने हुए हैं.. भाजपा का संगठन मजबूत है.. आरएसएस का समर्थन है.. और अमित शाह जैसे नेता यहां की राजनीति को संभालते हैं.. लेकिन अब AAP की एंट्री से चुनौती बढ़ गई है..

आपको बता दें कि कांग्रेस गुजरात में कभी बहुत मजबूत थी.. 1980–90 के दशक में वह सत्ता में रही.. लेकिन 1995 से विपक्ष में है.. 2022 के चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 17 सीटें मिली.. और वोट शेयर 27.3 प्रतिशत रहा.. 2017 में कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थी.. लेकिन अब गिरावट जारी है.. कांग्रेस की ढिलाई के कई कारण है.. जिनमें नेतृत्व की कमी, संगठन की कमजोरी और स्थानीय मुद्दों पर फोकस न करना शामिल है..

हालांकि राहुल गांधी ने सदन में मोदी को गुजरात में हराने की चुनौती दी है.. जिसके बाद वे ज्यादा एक्टिव नजर आ रहे हैं.. और कई रैलियां भी की है.. इसका असर धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है.. लेकिन आरोप है कि कांग्रेस भाजपा के खिलाफ मजबूत विपक्ष नहीं बन पाई.. विधानसभा में भी कांग्रेस के विधायक कमजोर विपक्ष की भूमिका निभाते नजर आते है.. 2024 के लोकसभा चुनाव में गुजरात की 26 सीटों में से कांग्रेस सिर्फ 1 सीट जीत पाई.. परिवारवाद, भ्रष्टाचार के आरोप और युवाओं से दूरी के कारण कांग्रेस कमजोर हुई है..

वहीं AAP की बात करें तो पार्टी की स्थापना 2012 में हुई थी.. लेकिन गुजरात में वह 2022 के चुनाव से सक्रिय हुई.. दिल्ली और पंजाब में सरकार बनाने के बाद AAP ने गुजरात को निशाना बनाया.. 2022 में AAP ने 5 सीटें जीतीं और 12.9 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया.. अब 2026 के सर्वे में उसका वोट शेयर बढ़कर 24.8 प्रतिशत हो गया है..

AAP ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई है.. खासकर आदिवासी, ग्रामीण और शहरी मध्यम वर्ग में.. AAP की ताकत अरविंद केजरीवाल का चेहरा, दिल्ली-पंजाब मॉडल (मुफ्त बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य) और भ्रष्टाचार विरोधी छवि है.. गुजरात में AAP ने न बेटा, न बाप, गुजरात अब AAP का जैसे नारे दिए.. सौराष्ट्र-कच्छ में AAP की पकड़ मजबूत हुई है.. जहां भाजपा को नुकसान हुआ है..

वहीं 2025 के उपचुनावों में विसावदर और कादी में AAP का प्रदर्शन अच्छा रहा.. स्थानीय निकाय चुनावों में AAP ने कई सीटें जीती.. और कई जगह दूसरे नंबर पर रही.. AAP ने निकाय चुनावों में 12,000 उम्मीदवार उतारने का ऐलान भी किया है.. कहा जा रहा है कि कांग्रेस की कमजोरी से पैदा हुए राजनीतिक खालीपन को AAP ने भर दिया है..

AAP के प्रमुख आदिवासी नेता चैतर वसावा ने हाल ही में नर्मदा जिले के चिकदा गांव में आयोजित परिवर्तन सभा में बड़ा बयान दिया.. और उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ढिलाई के कारण AAP गुजरात की दूसरी सबसे मजबूत पार्टी बन गई है.. वसावा डेडियापाड़ा से विधायक हैं.. और आदिवासी मुद्दों पर काफी सक्रिय रहते हैं.. उन्होंने सरदार सरोवर प्रभावितों, वन अधिकार और मजदूर आंदोलनों में भूमिका निभाई है.. 2025 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी.. लेकिन वे जमानत पर बाहर आ गए..

वसावा का कहना है कि 2027 में AAP भाजपा की सत्ता पर ब्रेक लगाएगी.. तापी और नर्मदा जैसे जिलों में AAP की सभाओं में हजारों लोग जुड़ रहे है.. उन्होंने दावा किया कि गुजरात की जनता अब बदलाव चाहती है.. और AAP ही असली विकल्प है.. आदिवासी बेल्ट में AAP की पकड़ मजबूत हो रही है.. जहां कांग्रेस कमजोर पड़ गई है..

 

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